- पुलिस ने की निजामुद्दीन मरकज की जांच
- तबलीगी जमात का हुआ था कार्यक्रम
- कार्यक्रम में पहुंचे थे करीब 9000 लोग
दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की क्राइम ब्रांच और फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम आज (रविवार) जांच के लिए निजामुद्दीन स्थित मरकज पहुंची. टीम द्वारा इमारत के अंदर की वीडियोग्राफी कराई गई. एक अप्रैल को मरकज से करीब 2300 लोगों को बाहर निकाला गया था. तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) के मुखिया मौलाना साद कंधालवी (Maulana Saad Kandhalvi) के खिलाफ 'एपिडेमिक डिज़ीज़ एक्ट' के तहत केस दर्ज किया गया है. मामले के खुलासे के बाद मौलाना साद को दिल्ली पुलिस ने नोटिस भेजा था और 26 सवाल पूछे थे. नोटिस का जवाब देते हुए उसने पुलिस को बताया कि इस समय वह सेल्फ क्वारंटाइन में है और कुछ समय बाद वह पुलिस के सभी सवालों के जवाब देगा.
तबलीगी मरकज (Delhi Nizamuddin Tablighi Markaz) की इमारत पर अब दक्षिणी दिल्ली नगर निगम कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है. दरअसल मरकज की इमारत दो प्लॉट जोड़कर बनाई गई है. यह टोटल 7 मंजिला इमारत है. दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के मुताबिक, इस इमारत का सिर्फ दो फ्लोर का नक्शा पास है. इस इमारत का कभी हाउस टैक्स नहीं भरा गया है. फिलहाल दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के बताया कि पहले इस जगह सिर्फ एक मस्जिद थी और उसके बाद यहां पर एक मदरसा बनाया गया, लेकिन बाद में यहां पर तकरीबन 70 फीसदी अवैध निर्माण करके मरकज की इमारत बनाई गई.
अब दक्षिणी दिल्ली नगर निगम इस इमारत के तमाम दस्तावेजों की जांच कर रहा है और इस इमारत के अवैध निर्माण को तोड़ने की तमाम कागजी कार्रवाई शुरू हो चुकी है. दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन राजपाल सिंह का कहना है कि मरकज की फाइल उन्होंने मंगवाई है, जल्द ही इस पर कार्रवाई होगी. गौरतलब है कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में तबलीगी जमात में शामिल लोगों ने बड़ा सिरदर्द पैदा कर दिया है. इस मरकज में शामिल अब तक कई लोगों को कोरोना वायरस का संक्रमण हो चुका है और कई मरीजों की मौत भी हो चुकी है. भारत में कुल मरीजों की संख्या में इस जमात में शामिल लोगों का हिस्सा 30 फीसदी है.
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