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ISI के हथियार तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश, क्राइम ब्रांच ने दबोचे दो ऑपरेटर; पाक-थाईलैंड-नेपाल के रास्ते आता गोला-बारूद

ISI Arms Supplier Arrest: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी और आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और अहम आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम इमरान (37) और मोहम्मद कमरान (27) हैं.

ISI के हथियार तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश, क्राइम ब्रांच ने दबोचे दो ऑपरेटर; पाक-थाईलैंड-नेपाल के रास्ते आता गोला-बारूद

ISI Arms Suppler Operator: अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी और आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने दो और अहम आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस पूरे नेटवर्क के तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिसका मकसद भारत में अशांति फैलाना था.

पुलिस ने इमरान (37) और मोहम्मद कमरान (27) नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो इस अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी और आतंकी नेटवर्क के मुख्य सप्लायर के रूप में काम कर रहे थे। दोनों को 2 अप्रैल 2026 को IGI एयरपोर्ट पर लुकआउट सर्कुलर के आधार पर हिरासत में लिया गया, जिसके बाद पूछताछ के बाद उन्हें इस केस में औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया.

10 आरोपी पहले ही हुए गिरफ्तार

इस मामले में पहले ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था. अब इन दो नई गिरफ्तारियों के बाद कुल आरोपियों की संख्या 12 हो गई है. पुलिस अब तक 23 अत्याधुनिक विदेशी हथियार और 211  कारतूस बरामद कर चुकी है, जिनमें एक सब-मशीन गन भी शामिल है. मामले की गंभीरता को देखते हुए इस केस में UAPA की धाराएं भी जोड़ दी गई हैं.

नेटवर्क के मास्टरमाइंड के हैं करीबी

जांच में सामने आया है कि इमरान और कमरान पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड शाहबाज अंसारी के बेहद करीबी हैं. इमरान उसका साला है, जबकि कमरान उसका कजिन है. दोनों पिछले करीब एक साल से इस मॉड्यूल के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे थे.

इमरान यूपी के सिकंदराबाद का रहने वाला है और अपने भाई के साथ डेयरी का काम करता है, जबकि कमरान बुलंदशहर में चूड़ी की दुकान पर काम करता है. साधारण जिंदगी जीने वाले ये दोनों आरोपी असल में बेहद शातिर तरीके से अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी के नेटवर्क का अहम हिस्सा बने हुए थे.

हथियार सप्लाई के लिए बेहद अहम थे दोनों

इनका काम नेपाल से आने वाली हथियारों की खेप को रिसीव (प्राप्त) करना, उसे सुरक्षित तरीके से भारत में लाना, फिर उन्हें जोड़ना  और आगे सप्लाई करना था. ये दोनों आरोपी नेटवर्क में लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी का पूरा जिम्मा संभालते थे.

इस तरह होती हथियारों की सप्लाई, जानकर उड़ जाएंगे होश

जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित और हाई-टेक तरीके से काम करता था. हथियारों को पहले पाकिस्तान से मंगाया जाता था, फिर उन्हें थाईलैंड के रास्ते नेपाल पहुंचाया जाता था, ताकि सीधे भारत से कनेक्शन छिपाया जा सके. नेपाल पहुंचने के बाद हथियारों को अलग-अलग हिस्सों में तोड़ दिया जाता था और फिर आरोपियों द्वारा इन्हें भारत में गैर-कानूनी रास्तों से लाया जाता था. भारत पहुंचने के बाद इन्हें फिर से जोड़कर तैयार किया जाता था और फिर गुप्त ठिकानों पर रखा जाता था.

कार में बनाते थे गुप्त खांचे

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों में बेहद प्रोफेशनल तरीके से छुपे हुए खांचे (Hidden Cavities) बनाए जाते थे. ये खांचे इतने चालाकी से बनाए जाते थे कि सामान्य जांच में उनका पता लगाना लगभग नामुमकिन होता था. बरामद की गई मारुति स्विफ्ट कार में भी ऐसे ही खांचे पाए गए हैं.

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चीनी पिस्टल की बरामद

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर एक 0.30 बोर की चाइनीज पिस्टल, एक 0.32 बोर का रिवॉल्वर और 11 कारतूस बरामद किए हैं. इसके अलावा हथियारों की तस्करी में इस्तेमाल होने वाली कार भी जब्त की गई है, जिसमें छिपे हुए विशेष खांचे बनाए गए थे.

पाक की आईएसआई का हाथ

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का हाथ है. यह नेटवर्क भारत में अवैध हथियारों की सप्लाई कर आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा था.

पाक-नेपाल में बैठे हैंडलर्स से सीधी बातचीत

फरार मास्टरमाइंड शाहबाज अंसारी, पाकिस्तान और नेपाल में बैठे हैंडलर्स के साथ सीधा संपर्क रखता था और उन्हीं के निर्देश पर भारत में अपने गुर्गों के जरिए हथियारों की सप्लाई करवाता था. हथियारों की बिक्री से मिलने वाला पैसा भी आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाना था.

किसी बड़े हमले की थी साजिश

जांच एजेंसियों का मानना है कि ये हथियार किसी बड़े आतंकी हमले के लिए इस्तेमाल किए जा सकते थे. खासतौर पर धार्मिक कार्यक्रमों, त्योहारों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाने की साजिश थी. अगर समय रहते इस नेटवर्क का भंडाफोड़ नहीं होता तो देश में बड़ी आतंकी घटना हो सकती थी, जिससे जान-माल का भारी नुकसान और सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता था.

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शहबाज की तलाश जारी

फिलहाल दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और फरार आरोपी शाहबाज अंसारी की तलाश जारी है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.

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