
भारतीय क्रिकेट के युवराज का दौर क्या अब ख़त्म हो गया? विश्व कप के 30 संभावितों में उनके न चुने जाने से ये सवाल उठने लगे थे। विश्वकप के अंतिम 15 में चयनकर्ताओं ने उन्हें जगह ना देकर इसपर लगभग अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है।
2011 विश्वकप के हीरो, 6 गेंदों में 6 छक्के जड़ने वाले युवराज, कैंसर को मात देने वाला योद्धा फिलहाल अपने हुनर की झलक भर रह गया है। मंगलवार को चयनकर्ताओं ने उनके नाम पर चर्चा ज़रूर की, लेकिन बहस इस पर आकर ख़त्म हो गई कि अगर वह चुने भी गए तो खेलेंगे किस पोज़ीशन पर।
टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी कभी कहते थे कि युवराज जैसे खिलाड़ी को बाहर नहीं रखा जा सकता, लेकिन इस बार उन्होंने भी चोटिल जडेजा के आगे उन्हें तवज्जो नहीं दी। नितिन पटेल ने अपनी रिपोर्ट में कह दिया कि रविंद्र जडेजा 10 दिनों में ठीक हो जाएंगे। वैसे अगर वह ठीक नहीं भी होते तो सूत्रों के मुताबिक संभावित 30 में से किसी एक को चुना जाता युवराज को शायद नहीं।
इस सीज़न में रणजी ट्रॉफी में युवराज लगातार तीन शतक जड़ चुके हैं, उनके प्रदर्शन को देखकर उनकी वापसी की अटकलों को बल मिला, लेकिन 293 एकदिवसीय मैचों में 8,329 रन बनाने वाले युवराज के रिकॉर्ड और उनके हालिया प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं को कुछ ख़ास प्रभावित नहीं किया।
2013 में आख़िरी बार टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनने वाले युवराज की ढलती उम्र भी उनके ख़िलाफ गई और आख़िरकार इस खिलाड़ी पर भविष्य का दांव लगाना किसी ने ठीक नहीं समझा।
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