आज यशस्वी जायसवाल टीम इंडिया के सबसे बड़े सितारों में से एक हैं. और कौन जानता है कि वह भविष्य में टीम इंडिया के कप्तान भी बन जाएं. पिछले कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय करियर में आगाज करने के बाद से लेकर बहुत ही कम समय में इस लेफ्टी बल्लेबाज ने अपना कद ऊंचा किया है. टेस्ट टीम में उनकी जगह पक्की है, तो व्हाइट-बॉल में उन्होंने तमाम बाकी खिलाड़ियों को बहुत ही ज्यादा दबाव बनाया है. बहरहाल, जायसवाल के बचपन के दिनों के संघर्ष की कई कहानियां मीडिया में आ चुकी हैं, जैसे वो कैसे गोलगप्पे बेचने वाले के साथ सहयोग करते थे, कैसे यशस्वी ने भदोही (अब संत रविदास नगर भदोही) जिले 12 साल की उम्र में मुंबई आने के बाद रिश्तेदार का घर छोड़ने के बाद कैसे आजाद मैदान पर मैदानकर्मी के घर को ही अपना ठिकाना बना लिया, वगैरह-वगैरह. बहरहाल, आज हम आपको मुंबई पहुंचने से पहले जायसवाल की कहानी के बारे में बताते हैं, जो खुद उनके बचपन के साथी दीपांकर सिंह ने साझा की है.
जायसाल का बड़ा भाई भी मुंबई साथ गया था
दरअसल आज से करीब 14 साल पहले जब यशस्वी जायसवाल पहली बार मुंबई गए, तो एक ही उम्र के कुल मिलाकर सात लड़के मुंबई गए थे. और इसमें यशस्वी जायसवाल का बड़ा भाई तेजस्वी जायसवाल भी शामिल थे. सभी का सपना एक ही था. क्रिकेट खेलना और बड़ा खिलाड़ी बनना, लेकिन आज इन सात में से करोड़ों फैंस यशस्वी जायसवाल के बारे में ही जानते हैं. लेकिन नया शहर, नया माहौल, रहने की मुश्किलें, जूनियर टीमों में जगह बनाने का संघर्ष और भविष्य को लेकर अनिश्चिता. ऐसे में धीरे-धीरे एक-एक करके सभी का मुंबई से मन उखड़ने

(फोटो स्रोत: X)
जायसवाल ने रुकने का फैसला किया
भदोही में जायसवाल के साथ उनके बचपन के दिनों से ही क्लब क्रिकेट खेलने वाले उनके सीनियर दीपाकंर सिंह कहते हैं, 'ऐसे में धीरे-धीरे एक-एक करके सभी लड़के वापस भदोही लौटने लगे. किसी को घर की याद आने लगी, तो किसी को संघर्ष भारी लगने लगा, तो किसी को पैसों की समस्या ने मजबूर कर दिया. किसी को अपना शहर, अपने लोग और पुरानी जिंदगी फिर अपनी ओर खींचने लगी. कुछ महीने, कुछ समय और आखिरकार सभी अपने-अपने वापस भदोही अपने घर लौट आए. यशस्वी का सगा भाई तेजस्वी भी वापस आ गया, लेकिन यशस्वी वहीं रुका रहा.
जब चार साल बाद घर लौटे जायसवाल
दीपांकर ने बताया, 'उसने सिर्फ मुंबई में रहने का फैसला नहीं किया था, उसने अपने सपने का हाथ पकड़कर उसे छोड़ने से इनकार कर दिया था. तमाम मुश्किलों का सामना जायसवाल ने भी किया, लेकिन उसे अपने टैलेंट पर भरोसा बना रहा और आज जो प्रोडक्ट है, वह पूरी दुनिया के सामने है.' उन्होंने कहा, 'कई बार यशस्वी के मन ने वापस लौटने को कहा, लेकिन उसने खुद को समझाया होगा कि अगर अब लौट गया, तो शायद जिंदगी भर यही सोचता रहूंगा कि काश, थोड़ा और रुक जाता. उसने अपने सपने को अपनी परेशानियों से बड़ा बना लिया. कई साल तक वह उसी रास्ते पर चलता रहा. लगभग चार साल बाद जब वह अंडर-16 क्रिकेट खेलने के बाद घर लौटा. तब तक उसकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा क्रिकेट को दिया जा चुका था. मुंबई से बाकी छह साथियों के साथ वापस न लौटने का फैसला उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट बन गया.'
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