
युवराज सिंह (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाना मुश्किल है लेकिन एन्ट्री करने के बाद अगर आपकी जगह चली गई तो उसे वापस हासिल करना उससे भी ज़्यादा मुश्किल है। 21 महीनो के बाद युवराज फिर से टीम इंडिया की जर्सी में नज़र आएंगे जब वो ऑस्ट्रेलियाई दोरे के लिए टी20 खेलने के लिए उतरेंगे।
वनडे टीम में वापसी करते तो बेहतर होता
चयनकर्ताओं के इस फैसले पर हैरानी होती है क्योंकि जिस घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन के आधार पर युवराज को चुना गया है वो 50-ओवर का फार्मेट है न कि 20-20 का। बाएं हाथ का ये शानदार क्रिकेटर वनडे टीम में वापसी करता तो ज़्यादा बेहतर होता। युवराज ने अपने चयन पर खुशी तो जताई लेकिन ये भी कहा कि पहले ही मैच से मुझ से चमत्कार की उम्मीदें न रखें। युवी ने साफ़ किया कि वो चाहते तो हैं कि पहले मैच से ही अपनी टीम की जीत में अहम योगदान करें, लेकिन ये इतना आसान नहीं होने वाला। युवराज कई महीनों से टी-20 क्रिकेट से दूर हैं और रणजी ट्रॉफी के 4 दिन और वनडे मुकाबलों के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। विजय हज़ारे ट्राफी के 5 मैच में उन्होंने 85.25 की औसत से 341 रन बनाए हैं जिनमें 3 अर्धशतक शामिल हैं और दो बार तो वे शतक से चूक गए।
(ये भी पढ़ें- केन विलियमसन के शतक से न्यूजीलैंड ने श्रीलंका के खिलाफ सीरीज जीती)
'हिट एंड मिस' का होता है टी-20 का चरित्र
सबसे बड़ा सवाल ये है कि वनडे के बेतरीन प्रदर्शन के आधार पर अगर चयन हुआ है तो फिर वनडे में उन्हें शामिल क्यों नहीं किया गया? युवराज खुद ये जानते हैं कि टी20 का फार्मेट 'हिट एंड मिस' का होता है। यहां आप पल में हीरो और पल में ज़ीरो बन जाते हैं। यहां आपको अपनी पारी संवारने का मौका बहुत कम मिलता है। युवराज ने कहा कि घरेलू गेंदबाज़ों और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों के बीच ज़मीन-आसमान का फर्क है। कंगारुओं की तेज़ पिचों और बड़े मैदान पर उनके गेंदबाज़ों को खेलना इतना आसान नहीं। अगर उन्हें वनडे में मौक़ा मिलता तो उन्हें टीम के साथ और हालातों के साथ तालमेल बिठाने के लिए ज़्यादा वक्त मिलता, लेकिन अब वे सिर्फ़ दौरे के अंत में टीम इंडिया के साथ जुडेंगे।
तब रातोंरात फैंस हो गए थे उनके खिलाफ
20 महीने पहले साल 2014 का टी20 विश्व कप फ़ाइनल शायद युवराज सिंह के जेहन में अभी भी ताज़ा है। फ़ाइनल मुक़ाबले में श्रीलंका के गेदबाज़ों के सामने वो 21 गेंदों पर सिर्फ 11 रन बना पाए थे। आखिर के ओवरों में युवराज की नाकामी ने फैंस को रातोंरात उनके खिलाफ़ कर दिया और भारत फ़ाइनल हार गया। इस हार का जिम्मेदार युवराज सिंह को बताया गया और उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। आज 20 महीने बाद उनकी वापसी तो हुई है लेकिन ये डर अभी भी उनके ज़हन में है कि क्या टी20 की नाकामी से कहीं फिर उनका करियर हाशिए पर न आ जाए।
वनडे टीम में वापसी करते तो बेहतर होता
चयनकर्ताओं के इस फैसले पर हैरानी होती है क्योंकि जिस घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन के आधार पर युवराज को चुना गया है वो 50-ओवर का फार्मेट है न कि 20-20 का। बाएं हाथ का ये शानदार क्रिकेटर वनडे टीम में वापसी करता तो ज़्यादा बेहतर होता। युवराज ने अपने चयन पर खुशी तो जताई लेकिन ये भी कहा कि पहले ही मैच से मुझ से चमत्कार की उम्मीदें न रखें। युवी ने साफ़ किया कि वो चाहते तो हैं कि पहले मैच से ही अपनी टीम की जीत में अहम योगदान करें, लेकिन ये इतना आसान नहीं होने वाला। युवराज कई महीनों से टी-20 क्रिकेट से दूर हैं और रणजी ट्रॉफी के 4 दिन और वनडे मुकाबलों के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। विजय हज़ारे ट्राफी के 5 मैच में उन्होंने 85.25 की औसत से 341 रन बनाए हैं जिनमें 3 अर्धशतक शामिल हैं और दो बार तो वे शतक से चूक गए।
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'हिट एंड मिस' का होता है टी-20 का चरित्र
सबसे बड़ा सवाल ये है कि वनडे के बेतरीन प्रदर्शन के आधार पर अगर चयन हुआ है तो फिर वनडे में उन्हें शामिल क्यों नहीं किया गया? युवराज खुद ये जानते हैं कि टी20 का फार्मेट 'हिट एंड मिस' का होता है। यहां आप पल में हीरो और पल में ज़ीरो बन जाते हैं। यहां आपको अपनी पारी संवारने का मौका बहुत कम मिलता है। युवराज ने कहा कि घरेलू गेंदबाज़ों और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों के बीच ज़मीन-आसमान का फर्क है। कंगारुओं की तेज़ पिचों और बड़े मैदान पर उनके गेंदबाज़ों को खेलना इतना आसान नहीं। अगर उन्हें वनडे में मौक़ा मिलता तो उन्हें टीम के साथ और हालातों के साथ तालमेल बिठाने के लिए ज़्यादा वक्त मिलता, लेकिन अब वे सिर्फ़ दौरे के अंत में टीम इंडिया के साथ जुडेंगे।
तब रातोंरात फैंस हो गए थे उनके खिलाफ
20 महीने पहले साल 2014 का टी20 विश्व कप फ़ाइनल शायद युवराज सिंह के जेहन में अभी भी ताज़ा है। फ़ाइनल मुक़ाबले में श्रीलंका के गेदबाज़ों के सामने वो 21 गेंदों पर सिर्फ 11 रन बना पाए थे। आखिर के ओवरों में युवराज की नाकामी ने फैंस को रातोंरात उनके खिलाफ़ कर दिया और भारत फ़ाइनल हार गया। इस हार का जिम्मेदार युवराज सिंह को बताया गया और उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। आज 20 महीने बाद उनकी वापसी तो हुई है लेकिन ये डर अभी भी उनके ज़हन में है कि क्या टी20 की नाकामी से कहीं फिर उनका करियर हाशिए पर न आ जाए।
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