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T20 World Cup 2026: क्या है प्री-सीडिंग सिस्टम? सुपर-8 के शेड्यूल को लेकर ICC की क्यों हो रही आलोचना? ये वजह आई सामने

Why ICC faces Criticism Over T20 World Cup 2026 Super Eight Schedule: आलोचकों ने यह भी बताया है कि यह शेड्यूल को-होस्ट श्रीलंका को कैसे नुकसान पहुंचाता है. अब तक अपना पूरा कैंपेन घर पर खेलने के बावजूद, अगर वो सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करते हैं, तो पहले से तय ब्रैकेट उन्हें भारत आने के लिए मजबूर करता है.

T20 World Cup 2026: क्या है प्री-सीडिंग सिस्टम? सुपर-8 के शेड्यूल को लेकर ICC की क्यों हो रही आलोचना? ये वजह आई सामने
Why ICC faces Criticism Over T20 World Cup 2026 Super Eight Schedule: 

Why ICC faces Criticism Over T20 World Cup 2026 Super Eight Schedule: इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को T20 वर्ल्ड कप 2026 सुपर 8 फॉर्मेट को लेकर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. जैसे ही टूर्नामेंट के अगले राउंड के लिए क्वालीफाई करने वाली 8 टीमों के नाम फाइनल हुए, ICC 'प्री-सीडिंग' फॉर्मेट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. इसके चलते, सभी चार ग्रुप विनर एक ही सुपर 8 ग्रुप में हैं, जबकि 4 रनर-अप को दूसरे ग्रुप में रखा गया है.

प्री-सीडिंग सिस्टम से सुपर 8 ग्रुप में उथल-पुथल

प्री-सीडिंग सिस्टम ने अनजाने में सुपर 8 ग्रुप में बहुत बड़ा उथल-पुथल पैदा कर दिया है. ICC ने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही टॉप टीमों को फिक्स्ड स्लॉट (जैसे, A1, B1, C1, और D1) दे दिए थे. वहीं ग्रुप 1 में अब वो सभी चार टीमें हैं जो अपने ग्रुप में टॉप पर थीं (इंडिया, जिम्बाब्वे, वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका). इस बीच, ग्रुप 2 में पूरी तरह से रनर-अप (पाकिस्तान, श्रीलंका, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड) ही हैं.

टूर्नामेंट में सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाली दो टीमें सेमीफाइनल से पहले बाहर!

यह स्ट्रक्चर यह गारंटी देता है कि पहले राउंड से टूर्नामेंट की सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाली दो टीमें सेमीफाइनल से पहले बाहर हो जाएंगी, जबकि जो टीम अपने ग्रुप में सिर्फ दूसरे नंबर पर रही, उसके लिए अब फाइनल चार में पहुंचने का रास्ता "आसान" हो गया है. वैसे, स्पोर्ट्स टूर्नामेंट में प्रोग्रेस ग्रुप विनर्स को रिवॉर्ड देने के लिए होती है, लेकिन इस फॉर्मेट में, टॉप पर रहने से बहुत कम फायदा होता है.

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उदाहरण के लिए, साउथ अफ्रीका ने अपना ग्रुप जीता लेकिन उसे लोअर सीड माना गया क्योंकि न्यूज़ीलैंड जो अपने ग्रुप में दूसरे नंबर पर रहा उसको पहले से ही ऊंची रैंक दी गई थी. नतीजतन, एक बार टॉप आठ टीमें कन्फर्म हो जाने के बाद, फाइनल ग्रुप-स्टेज मैच सुपर 8 प्लेसमेंट के लिए इंपॉर्टेंस खो देते हैं, जिससे टूर्नामेंट से वह रोमांचक एंड-गेम ड्रामा खत्म हो जाता है जिसकी फैंस उम्मीद करते हैं.

क्या ये शेड्यूल को-होस्ट श्रीलंका को भी नुकसान पहुंचा रहा?

आलोचकों ने यह भी बताया है कि यह शेड्यूल को-होस्ट श्रीलंका को कैसे नुकसान पहुंचाता है. अब तक अपना पूरा कैंपेन घर पर खेलने के बावजूद, अगर वो सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करते हैं, तो पहले से तय ब्रैकेट उन्हें भारत आने के लिए मजबूर करता है, जिससे उन्हें कोलंबो में अपने होम क्राउड के सामने खेलने का मौका नहीं मिलता.

ICC ने लॉजिस्टिक चुनौतियों का हवाला देते हुए इस कदम का बचाव किया है. वहीं भारत और श्रीलंका में टूर्नामेंट को को-होस्ट करने के लिए पहले से प्लानिंग की जरूरत है, और गवर्निंग बॉडी का कहना है कि वेन्यू और शेड्यूलिंग को मैनेज करने के लिए प्री-सीडिंग सिस्टम जरूरी था.

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