रणजी ट्रॉफी 2026-27 में मन्वंथ कुमार ने सौराष्ट्र के खिलाफ मैच में नंबर 9 पर बल्लेबाजी करते हुए 135 रन की एक ऐसी पारी खेली जो इस युवा 22 साल के खिलाड़ी के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है. कर्नाटक के 22 साल के मन्वंथ कुमार ने नंबर 9 पर बल्लेबाजी करते हुए 213 गेंदों पर 135 रन की पारी खेली, जिसमें 11 चौके और 6 छक्के शामिल रहे. बता दें कि एक समय जब कर्नाटक का स्कोर 187/7 था, तब मन्वंथ कुमार बल्लेबाजी करने आए, जल्द ही यह स्कोर 194/8 हो गया, ऐसा लगा कि अब कर्नाटक की पारी जल्द खत्म हो जाएगी लेकिन फिर चमत्कार हुआ. इसके बाद मन्वंथ ने शानदार शतक जड़ा, नौवें विकेट के लिए 146 रनों की साझेदारी हुई.
मन्वंथ कुमार जिन्होंने पिछले हफ्ते आंध्र के खिलाफ अपना डेब्यू किया था और दूसरी पारी में 44 रनों की अहम पारी खेली थी, उन्होंने अपने साहसिक खेल से सबको प्रभावित किया. इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण तब देखने को मिला जब उन्होंने भारतीय तेज गेंदबाज और सौराष्ट्र के अनुभवी खिलाड़ी जयदेव उनादकट की गेंदों पर दो शानदार छक्के जड़े, एक छक्का उन्होंने आगे बढ़कर सीधा मैदान के ऊपर से मारा, जबकि दूसरा छक्का स्क्वायर-लेग के ऊपर से बहुत ही शानदार अंदाज में लगाया.
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शानदार बल्लेबाजी से जीता दिल
लेफ्ट-आर्म स्पिनर पार्थ भूत को भी मन्वंथ के आक्रामक खेल का सामना करना पड़ा. मन्वंथ जो मार्च 2024 में कर्नल सी.के. नायडू (U-23) ट्रॉफी जीतने वाली टीम का हिस्सा थे, उन्होंने पार्थ की गेंदों पर तीन छक्के जड़े. उन्होंने 65 गेंदों में अपने करियर का पहला अर्धशतक पूरा किया था. मन्वंथ कुमार ने निचले क्रम में मोर्चा संभाला और अभिलाष शेट्टी के साथ नौवें विकेट के लिए 146 रन की अहम साझेदारी की. उनकी पारी के दम पर कर्नाटक ने पहली पारी में 342 रन बनाए. पहले दिन मन्वंथ कुमार 124 गेंदों में 86 रन बनाकर नाबाद थे. अगले दिन उन्होंने अपनी पारी को आगे बढ़ाते हुए इसे शानदार शतक में तब्दील किया.
कौन है मन्वंथ कुमार
मैसूर के श्रीनगर इलाके के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे मन्वंथ कुमार का पालन-पोषण सादगी भरा रहा, लेकिन उनके सपने बहुत बड़े थे.मन्वंथ के पिता लक्ष्मी कुमार, जो BMTC बस के रिटायर्ड ड्राइवर हैं, और मां श्रीदेवी कुमार, जो एक गृहिणी हैं, उन्होंने अपने दोनों बेटों में कड़ी मेहनत और लगन के संस्कार डाले. मन्वंथ कुमार के बड़े भाई हेमंत कुमार, जो खुद एक क्रिकेटर हैं, उन्होंने अपने छोटे भाई का करियर संवारने में अहम भूमिका निभाई.
आर्थिक तंगी के बावजूद, कुमार परिवार के अटूट समर्थन ने यह सुनिश्चित किया कि मन्वंथ को अपनी स्किल्स निखारने के लिए जरूरी ट्रेनिंग मिल सके. लक्ष्मी कुमार बताते हैं, "दोनों बेटों को क्रिकेट की ट्रेनिंग दिलाना मुश्किल था, लेकिन मैसूर के एक क्रिकेट इंस्टीट्यूट ने मुफ्त कोचिंग दी, जो उनके करियर का एक अहम मोड़ साबित हुआ."
सपनों को ढोने वाली साइकिल
मन्वंथ कुमार का क्रिकेट सफर दो पहियों, यानी साइकिल से शुरू हुआ. मन्वंथ रोज 15 किलोमीटर साइकिल चलाकर 'बालचंद्र क्रिकेट क्लब' में प्रैक्टिस करने जाया करते थे. शुरुआत में दोनों भाइयों के पास सिर्फ एक ही साइकिल थी, जिसे वे आपस में बांटकर इस्तेमाल करते थे. उनके पिता ने कड़ी मेहनत करके मनवंत के लिए एक नई साइकिल खरीदी. उनकी इस मेहनत और लगन ने मन्वंथ कुमार के क्रिकेट सपनों की नींव रखी.
मन्वंथ कुमार कुमार का सफर लगातार कोशिश करने, परिवार के सहयोग और कोच बालचंद्र जैसे मार्गदर्शकों के मार्गदर्शन के महत्व को दर्शाता है. प्रैक्टिस के लिए 15 किलोमीटर साइकिल चलाकर जाने से लेकर दुनिया की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी लीग में खेलने तक, मन्वंथ कुमार की कहानी इस बात का सबूत है कि जो लोग अपने सपनों का पीछा करने की हिम्मत रखते हैं, उनके लिए कोई भी सपना बहुत बड़ा नहीं होता.
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