हाल ही में विंडीज के खिलाफ आखिरी टी20 बारिश के कारण धुलने से टी20 सीरीज 2-2 से बराबर रही. इस सीरीज में वास्तव में भारत ने कमाने ज्यादा गंवाया ज्यादा! कई पहलुओं को लेकर चर्चा हो रही है. बड़ी संख्या में पंडितों को विंडीज के खिलाफ 2-2 का परिणाम गले नहीं उतर रहा है. इसके पीछे पीछे कई वजह हैं, तो इन लोगों की नाराजगी के पीछे एक वजह वैभव सूर्यवंशी भी हैं, जिनके बारे में फैंस से लेकर पूर्व दिग्गज लगातार बातें कर रहे हैं. इन दोनों ही वर्गों का एक बड़ा सेक्शन कह रहा है कि वैभव के साथ गलत हुआ है और उन्हें कुछछ मैचों में खिलाया जाना चाहिए था. लेकिन इनकी नाराजगी से उलट पूर्व ओपनर आकाश चोपड़ा ने अब एक अलग ही राय देते हुए कहा है कि वैभव को टीम से बाहर कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह दिल तोड़ने वाला है, लेकिन फिलहाल इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है. ऐसे में वैभव की बेहतरी के लिए सर्वश्रेष्ठ बात यही है कि उन्हें बेंच पर लगातार बैठाने के बजाय खेली जा रही रणजी ट्रॉफी खिलाने के लिए भारतीय टीम से रिलीज कर दिया जाए.
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आप वैभव को किसकी जगह खिलाओगे?
अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए, जब पूर्व भारतीय बल्लेबाज से पूछा गया कि क्या सूर्यवंशी को तिलक वर्मा की जगह प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाना चाहिए? इस पर चोपड़ा ने कहा, 'वैभव सूर्यवंशी को मौके नहीं मिल रहे हैं क्योंकि उनके लिए जगह नहीं बन पा रही है. आप किसकी जगह पर उन्हें खिलाएंगे? निष्पक्ष रूप से देखा जाए, तो वह केवल संजू सैमसन, अभिषेक अच्छा (अभिषेक शर्मा) या इशान किशन की जगह ही खेल सकते हैं.'
'रोटेशन पर वैभव को ज्यादा समर्थन नहीं'
चोपड़ा का मानना है कि प्लेइंग इलेवन में इस युवा खिलाड़ी की अनुपस्थिति मुख्य रूप से उपलब्ध जगहों की कमी का परिणाम है, न कि उनकी क्षमता पर कोई सवाल है. उन्होंने सुझाव दिया कि शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को रोटेट (बारी-बारी से मौका) करना सूर्यवंशी को अवसर देने का एक तरीका हो सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस विचार को बहुत अधिक समर्थन नहीं मिला है.
'बेहतर होगा रणजी ट्रॉफी के लिए रिलीव किया जाए'
उन्होंने आगे कहा, 'जब शीर्ष तीन खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, तो आपको अचानक मौका नहीं मिल सकता. मैं जानता हूं कि यह दिल तोड़ने वाला है, लेकिन इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. जो तरीका मैं सुझा रहा हूं, उससे कोई सहमत नहीं है. आप रोटेशन कर सकते हैं. उन चारों को बारी-बारी से मौके दें, लेकिन शायद ही कोई इस नीति पर समहत होगा.' वहीं, यदि सूर्यवंशी बेंच पर ही बैठते हैं, तो चोपड़ा ने देश के अलग-अलग हिस्सों में खेली जा रही रणजी ट्रॉफी मैचों में खेलने का सुझाव दिया. चोपड़ा ने तर्क दिया कि सूर्यवंशी को पूरी सीरीज के दौरान बिना कोई मैच खिलाए सिर्फ स्क्वॉड में बनाए रखने का कोई खास फायदा नहीं होगा. ऐसी स्थिति में उनका मानना है कि इस युवा खिलाड़ी को रणजी ट्रॉफी खेलने के लिए टीम से मुक्त कर दिया जाना चाहिए. और लगातार मैचों में बेंच पर बैठने के बजाय रणजी ट्रॉफी में खेलना उन्हें ज्यादा फायदा पहुंचाएगा.
तिलक पर निशाना सही नहीं?
चोपड़ा ने तिलक वर्मा का बचाव भी किया और उस सुझाव से असहमति जताई कि भारतीय उप-कप्तान का प्रदर्शन खराब रहा है और उन्हें सूर्यवंशी के लिए अपनी जगह छोड़ देनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'अगर आप यह कहते हैं कि तिलक वर्मा बिल्कुल प्रदर्शन नहीं करते हैं, तो आप जो कह रहे हैं वह थोड़ा गलत है. तिलक वर्मा ने जब नंबर 3 पर बल्लेबाजी की थी, तब दो शतक जड़े थे. उसके बाद, वे चोटिल हो गए थे और विश्व कप से पहले उन्हें थोड़ी समस्या हुई थी.' पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने मध्य क्रम और निचले-मध्य क्रम में तिलक के योगदान की ओर इशारा करते हुए तर्क दिया कि उनके हालिया प्रदर्शन को केवल इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि वे हमेशा अपने पसंदीदा स्थान पर बल्लेबाजी नहीं कर सके हैं.
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