Vaibhav Sooryavanshi reveals fathers lesson : राजस्थान रॉयल्स (आरआर) और गुजरात टाइटंस (जीटी) के बीच आईपीएल 2026 का दूसरा क्वालीफायर मुकाबला शुक्रवार को खेला जाएगा. इस अहम मैच से पहले वैभव सूर्यवंशी ने क्वालीफायर 2 को लेकर बात की और बताया कि इस मैच में वो किस मानसिकता के साथ मैदान पर उतरने वाले हैं. बता दें कि आईपीएल 2026 में वैभव ने अपनी बल्लेबाजी से तहलका मचा दिया है. वैभव ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ मैच को लेकर कहा, "हम एक अच्छी मानसिकता और सकारात्मक इरादे के साथ मैदान में उतरना चाहते हैं, और वही करते रहना चाहता हूं जो पूरी टीम ने इस पूरे टूर्नामेंट में किया है. हमें खेल का आनंद लेते रहना चाहिए..जो हम हमेशा करते हैं. किसी बड़े मैच का दबाव नहीं लेना चाहिए, और अपनी ताकतों पर भरोसा रखना चाहिए. एक टीम और एक यूनिट के तौर पर, हम फ़ाइनल तक पहुंचना चाहते हैं और उम्मीद है कि ट्रॉफ़ी भी जीतेंगे."
राजस्थान में चुने जाने के बाद सबसे पहले किसका फोन आया था
जिया स्टार से बात करते हुए, 'Fearless Prodigy' वैभव सूर्यवंशी ने 2025 में अपने आईपीएल डेब्यू के बारे में बात की और यह भी बताया कि ऑक्शन में राजस्थान की ओर से चुने जाने के बाद उन्हें सबसे पहले किसका फोन आया था, वैभव ने इस बारे में कहा, "मुझे सबसे पहला फ़ोन टीम मैनेजर रोमी भिंडर सर का आया. मैं दुबई में था, और ऑक्शन भी वहीं हो रहा था. ट्रायल्स के बाद, मैंने उनसे बात की थी और उन्होंने मुझसे कहा था कि वे मुझे टीम में लेने की कोशिश करेंगे. फिर फोन पर हमारी दो-तीन मिनट बात हुई, जिसमें उन्होंने मुझे बधाई दी. अपने डेब्यू मैच में, मैंने पहली ही गेंद पर छक्का मारा था, इसलिए वह पल मेरे लिए बहुत खास था और एक बेहतरीन याद बन गया. फिर, उसी सीजन में मैंने शतक भी बनाया, जो मेरे और मेरे परिवार, दोनों के लिए बहुत गर्व का पल था. वह मेरा सिर्फ तीसरा ही मैच था, इसलिए आईपीएल करियर की इतनी शानदार शुरुआत करना मुझे बहुत अच्छा लगा, और अब मैं उसी लय को आगे बढ़ा रहा हूं."
मेरे लिए टीम का जीतना सबसे अहम
"बचपन से ही मेरे पिता मुझसे हमेशा कहते आए हैं कि अगर तुम 100, 200 या यहां तक कि 300 रन भी बना लो, लेकिन तुम्हारी वजह से टीम न जीते, तो उन रनों की कोई कीमत नहीं होती. वे शायद सिर्फ तुम्हारे निजी रिकॉर्ड के लिए हों, लेकिन उनसे टीम को कोई फ़ायदा नहीं होता. आख़िरकार, क्रिकेट एक टीम गेम है. इसलिए, अगर मैं 100 की जगह 80 रन बनाऊं और मेरी टीम जीत जाए, और अगर मेरे शतक बनाने के बावजूद हम न जीत पाएं, तो मेरे लिए उन 100 रनों से ज्यादा अहमियत उन 80 रनों की होगी. मुझे शतक बनाने और जो भी रिकॉर्ड मैं तोड़ना चाहता हूं, उन्हें हासिल करने के उतने ही ज़्यादा मौके मिलेंगे. तो, इससे मुझे व्यक्तिगत रूप से भी फायदा होता है और टीम को भी."
अभी भी कार्टून देखते हैं वैभव सूर्यवंशी
"जब मैं दो-तीन साल पहले घर पर रहता था और वहीं मैच खेलता था या अभ्यास करता था, तो जब भी घर पर मेरे पास खाली समय होता था, मैं कार्टून देखता था, और मुझे इसमें बहुत मज़ा आता था. अब भी, जब भी मुझे लगता है कि मुझे थोड़ी राहत या शांति चाहिए, तो मैं कार्टून देखता हूं. मैं अपने कमरे में आराम से बैठ जाता हूं और जो भी कार्टून मुझे पसंद आते हैं, उन्हें देखता हूं. यह सच में बहुत अच्छा लगता है और मुझे घर की बहुत याद दिलाता है."
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