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This Article is From Aug 13, 2021

कभी शतक जड़कर भारत को वर्ल्ड कप जिताया था, इस वजह से 28 साल की उम्र में लिया संन्यास

संन्यास का ऐलान करते हुए उन्मुक्त चंद ने एक लंबा लेटर लिखा. अपने प्रथम श्रेणी करियर में उन्मुक्त ने 48 मैच खेले, जिसमें उनका औसत 35.39 का रहा, तो लिस्ट ए (घरेलू वनडे) मैचों की संख्या 79 रही. उन्मुक्त ने पत्र के आखिर में लिखा कि अगले अध्याय का इंतजार कर रहा हूं. 

कभी शतक जड़कर भारत को वर्ल्ड कप जिताया था, इस वजह से 28 साल की उम्र में लिया संन्यास
उन्मुक्त को लेकर फैंस हमेशा ही चर्चा करते रहेंगे कि आखिर उनके साथ क्या गलत गया
नयी दिल्ली:

क्रिकेट में जीवन की डोर आपके हाथ में नहीं होती. जिसके बारे में उम्मीद नहीं होती, वह आसमान पर होता है. जिसे बड़ा सितारा करार दिया जाता है, वह गुमनाम हो जाता है! एक ऐसे ही सितारे का नाम है उन्मुक्त चंद (Unmukt Chand), जिसकी बैटिंग का शोर पूरी दुनिया ने सुना, लेकिन समय गुजरता गया, तो उन्मुक्त के क्रिकेट करियर को अंधेरी  राहों ने अपने आगोश में ले लिया. और शुक्रवार को सिर्फ 28 साल के क्रिकेटर ने संन्यास का ऐलान कर दिया. उन्मुक्तचंद साल 2012 में अंडर-19 विश्व कप में फाइनल में बेहतरीन शतक जड़कर भारत को खिताब दिलाने के बाद सुर्खियों में आए थे. 

उन्मुक्त ने अपने संन्यास का ऐलान करते हुए कहा का थोड़ी देर सोचने के बाद मेरे पत्र की इससे अच्छी शुरुआत नहीं हो सकती थी. इसे लिखते हुए मेरे भीतर मिश्रित भाव पैदा हो रहे हैं. मैं नहीं जानता कि मुझे कैसा महसूस करना चाहिए क्योंकि ईमानदारी से कहूं, तो मैं इन भावों का अभी भी पता लगाने की कोशिश कर रहा हूं. देश का फिर से प्रतिनिधित्व न कर पाने का विचार कुछ देर के लिए मेरे दिल की धड़कनें रोक सा देता है. मैं भारत के लिए खेलने के सिर्फ एक ही सपने के साथ बड़ा हुआ हूं. 

संन्यास का ऐलान करते हुए उन्मुक्त चंद ने एक लंबा लेटर लिखा. अपने प्रथम श्रेणी करियर में उन्मुक्त ने 48 मैच खेले, जिसमें उनका औसत 35.39 का रहा, तो लिस्ट ए (घरेलू वनडे) मैचों की संख्या 79 रही. उन्मुक्त ने पत्र के आखिर में लिखा कि अगले अध्याय का इंतजार कर रहा हूं. और सूत्रों के अनुसार उन्मुक्त आगे अमरीका में अपना क्रिकेट करियर आगे बढ़ाने जा रहे हैं. उनके संन्यास के ऐलान के पीछे भी यही वजह रही कि अब वह अपना क्रिकेट भविष्य किसी दूसरे देश में ढूंढना चाहते हैं. उन्मुक्त का उम्मीदों के अनुसार आग न बढ़ना बहुत ही दुखद अध्याय रहा और आज भी समीक्षक विमर्श करते हैं कि आखिरकार उन्मुक्त के साथ क्या गलत गया. 

साल 2012 में जब अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताया
ऑस्ट्रेलिया ने भारत को जीतने के लिए 226 रनों का टारगेट दिया था. भारत की शुरुआत खराब हुई थी और खिताब मुश्किल दिख रहा था, लेकिन उन्मुक्त चंद ने 130 गेंदों पर नाबाद 111 रन बनाकर भारत को विश्व कप जिता दिया. और उन्मुक्त एक बड़े सितारे के रूप में उभरे. पारी की खासियत थी उन्मुक्त के छह छक्के और बेहतरीन स्ट्रोक-प्ले

मिले थे कई बड़े विज्ञापन
इस पारी के बाद उन्मुक्त एक बड़े सितारे के रूप में उभरे. और इन्हें कोक सहित कई बड़े विज्ञापन बहुत ही कम उम्र में मिल गए. इन विज्ञापनों में उन्मुक्त चंद एमएस धोनी और विराट कोहली के साथ देखे गए. इस समय उन्मुक्त को एक बड़े सितारे के रूप में देखा जा रहा था. उन्मुक्त ने अंडर-19 विश्व कप को लेकर किताब भी लिखी. वह आईपीएल में दिल्ली डेयर डेविल्स (पुराना नाम) और फिर राजस्थान के लिए भी खेले, लेकिन उन्मुक्त को कामयाबी नहीं ही मिली. 
 

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