देशभर में एलपीजी गैस संकट को लेकर कई तरह की बातें चल रही हैं और लोग एहतियात के तौर पर एक्स्ट्रा सिलेंडर बुक कराने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि सरकार का कहना है कि गैस की सप्लाई में कोई समस्या नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. फिलहाल ऑनलाइन मोड में गैस की बुकिंग हो रही है और लोगों के घरों तक दो से तीन दिन के भीतर सिलेंडर की डिलीवरी भी हो रही है. इस तरह हर दिन लाखों सिलेंडर की डिलीवर किए जा रहे हैं.
सरकार का कहना है कि आम जनता को पैनिक होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पूरे मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है. साथ ही सरकार गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर भी कड़ी निगरानी बनाए हुए है.
ऐसे में एक कॉमन सवाल लोगों के मन में उठ रहा है कि आम लोग घर में इस्तेमाल के लिए कितना गैस सिलेंडर एक साथ रख सकते हैं. क्या घर में ज्यादा एलपीजी सिलेंडर रखना गैर-कानूनी है? और अगर कोई ज्यादा सिलेंडर जमा करता है तो उस पर क्या कार्रवाई हो सकती है? चलिए जानते हैं...
घर में कितने LPG सिलेंडर रखना है कानूनी?
कानून के अनुसार, सामान्य घरेलू उपभोक्ता को आमतौर पर 14.2 किलोग्राम के दो एलपीजी सिलेंडर रखने की अनुमति होती है.इसमें एक सिलेंडर उपयोग में होता है और दूसरा बैकअप के तौर पर रखा जाता है.यह नियम इंडियन ऑयल,भारत पेट्रोलियम और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा सुरक्षा मानकों के अनुसार लागू की जाती है.
बता दें कि यह नियम Gas Cylinders Rules, 2016 और Petroleum and Explosives Safety Organisation (PESO) के मानकों के तहत तय किए गए हैं.
कब माना जाता है LPG की जमाखोरी?
यदि कोई व्यक्ति घरेलू जरूरत से ज्यादा एलपीजी सिलेंडर जमा करता है, तो इसे जमाखोरी माना जा सकता है.खासतौर पर तब जब यह सामान्य घरेलू जरूरत से अधिक हो या बुकिंग नियमों का उल्लंघन किया गया हो.
Essential Commodities Act के तहत कार्रवाई
भारतीय कानून के तहत एलपीजी को एसेंशियल कमोडिटी यानी जरूरी वस्तु माना गया है.इसलिए अगर कोई व्यक्ति सिलेंडर जमा करके ब्लैक मार्केटिंग करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है.
जमाखोरी पर हो सकती है 7 साल तक की जेल
एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी करने वालों पर Essential Commodities Act, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है.अधिकारियों को अतिरिक्त सिलेंडर जब्त करने और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का अधिकार है.इस कानून की Section 7 के तहत जमाखोरी जैसे मामलों में कम से कम 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है.वहीं Section 6A के तहत अतिरिक्त स्टॉक को जब्त भी किया जा सकता है.
गैस की कमी नहीं, रोजाना 50 लाख LPG सिलेंडर की डिलीवरी
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि देश में एलपीजी सिलेंडर की पूर्ति में कोई दिक्कत नहीं है. सरकार बिना रुकावट ऊर्जा सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है.देशभर में हर दिन लगभग 50 लाख एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी की जा रही है. ऐसे में उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे कुकिंग गैस की पैनिक बुकिंग से बचें.
बयान में कहा गया है कि इस स्थिति को असरदार तरीके से मैनेज करने के लिए, सरकार ने सप्लाई को प्रायोरिटी देने के लिए एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत एक नैचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर जारी किया है.
डिमांड को कंट्रोल करने के लिए बदले बुकिंग नियम
घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध भंडारण को रोकने के लिए सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं. मांग को नियंत्रित करने और समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी वाले सिलेंडर की अगली बुकिंग की न्यूनतम अवधि 45 दिन कर दी गई है. पिछले सप्ताह ही इस अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन किया गया था. वहीं शहरी क्षेत्रों में अगली बुकिंग की सीमा फिलहाल 25 दिन ही रखी गई है.
LPG सप्लाई को डायवर्सीफाई करने की कोशिश
पहले भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत आयात कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे खाड़ी देशों से करता था.अब सप्लाई को डायवर्सीफाई करने के लिए अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से भी तेलवाहक जहाज मंगाए जा रहे हैं.
बुकिंग से डिलीवरी तक औसतन 2.5 दिन का समय
अधिकारियों के मुताबिक, देश में एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक का औसत समय अभी भी लगभग 2.5 दिन ही है और कहीं भी कमी की कोई खबर नहीं है.सरकार का कहना है कि कुछ स्थानों पर एक्स्ट्रा बुकिंग और जमाखोरी लोगों के पैनिक होने के कारण हो रही है, न कि सप्लाई में कमी की वजह सेहो रही है.
रिफाइनरियों में बढ़ाया गया LPG प्रोडक्शन
सरकार के अनुसार दुनिया भर में हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन देश में मांग और आपूर्ति के बीच बैलेंस बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए गए हैं.इनमें रिफाइनरियों द्वारा एलपीजी का उत्पादन बढ़ाना भी शामिल है. सी3 और सी4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम का पूरा आउटपुट, जिसमें प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपलीन और ब्यूटेन शामिल हैं, घरेलू कुकिंग गैस के लिए तीनों ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को दिया जा रहा है. पिछले पांच दिनों में रिफाइनरी के निर्देशों के जरिए एलपीजी प्रोडक्शनमें 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
देशभर में 25 हजार से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर
सरकार के अनुसार पूरे देश में 25 हजार से ज्यादा एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर हैं और कहीं भी गैस खत्म होने यानी ‘ड्राई आउट' की कोई रिपोर्ट नहीं है.देशभर में हर दिन 50 लाख से ज्यादा सिलेंडर डिलीवर किए जाते हैं. हालांकि पैनिक की वजह से सिलेंडर की बुकिंग में तेजी देखी गई है.कन्ज्यूमर से अपील की गई है कि वे पैनिक बुकिंग से बचें, अधिकारियों के साथ सहयोग करें और जहां तक संभव हो ईंधन की बचत करें.
सरकार जरूरी सेक्टर को दे रही प्राथमिकता
नॉन-डोमेस्टिक एलपीजी के लिए हॉस्पिटल और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन जैसे जरूरी सेक्टर को प्राथमिकता दी जा रही है.रेस्टोरेंट, होटल और अन्य कमर्शियल यूजर्स के लिए एलपीजी अलॉटमेंट की समीक्षा करने के लिए आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है.यह कमेटी राज्य सरकारों और इंडस्ट्री संगठनों से बातचीत कर रही है ताकि गैस का पारदर्शी और सही वितरण सुनिश्चित किया जा सके.
कमर्शियल LPG अलॉटमेंट पर भी नजर
एक बड़े फैसले के तहत ऑयल मार्केटिंग कंपनियां राज्य सरकारों के साथ मिलकर कमर्शियल एलपीजी की औसत मासिक जरूरत का 20 प्रतिशत अलॉटमेंट तय करेंगी.इसका मकसद गैस की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग को रोकना है.
देश में तेजी से बढ़े LPG कनेक्शन
सरकार के मुताबिक वर्ष 2014 तक देश में करीब 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे.अब यह संख्या बढ़कर 33 करोड़ से ज्यादा हो गई है.पिछले एक दशक में एलपीजी बॉटलिंग क्षमता को दोगुना किया गया है, जबकि डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर की संख्या 13 हजार से बढ़कर 25 हजार हो गई है.
गैस संकट के समय बढ़ जाती है निगरानी
जब सप्लाई में बाधा आती है, तब सरकार एलपीजी के स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन पर और सख्त नियंत्रण लागू कर सकती है.ऐसे समय में निरीक्षण बढ़ाए जाते हैं, अतिरिक्त स्टॉक जब्त किया जा सकता है और जमाखोरी या ब्लैक मार्केटिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है.इन कदमों का मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि एलपीजी की सप्लाई सभी उपभोक्ताओं तक बराबरी से पहुंच सके.
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