Heat impact on cricket in india: भारत में भीषण गर्मी और उमस का क्रिकेट पर बुरा असर पड़ रहा है,जिससे खिलाड़ियों की सेहत और टूर्नामेंट के शेड्यूल को लेकर बड़ी चिंताएं सामने आ गई है. गर्मियों में बढ़ते तापमान की वजह से बीसीसीआई को आईपीएल को मार्च के बीच में कराने पर गंभीरता से विचार करना पड़ रहा है, ताकि मई की भीषण गर्मी और लू से बचा जा सके. भीषण गर्मी क्रिकेट को पूरी तरह से बदल रही है.आउटडोर खेल होने,लंबे समय तक चलने और गर्मियों में खेले जाने के कारण यह दुनिया के उन खेलों में से एक बन गया है जिन पर जलवायु परिवर्तन का सबसे ज़्यादा असर पड़ने की शुरुआत हो गई है. ऐले में जानते हैं भीषण गर्मी के कारण क्रिकेट पर क्या-क्या असर पड़ रहे हैं.
खिलाड़ियों की सेहत को खतरा
टॉप लेवल के खिलाड़ियों को मैदान पर भीषण गर्मी के कारण शारीरिक थकान, शरीर में पानी की भारी कमी, जी मिचलाना, चक्कर आना और हीटस्ट्रोक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. गेंदबाजी हो या फिर बल्लेबाजी के दौरान खिलाड़ी ज्यादा थकान महसूस कर रहे हैं. भारी सुरक्षा उपकरण पहनकर मैराथन दौड़ने के कारण भारी गर्मी के बीच मैदान पर समय बिताना खिलाड़ियों को नुकसान पहुंचा रहा है.
इक्विपमेंट पहनकर खेलने से गर्मी का ज्यादा सामना करना
क्रिकेट के पारंपरिक सामान हेलमेट, मोटे पैड और ग्लव्स पहनकर खेलने से खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा गर्मी लगती है. इक्विपमेंट पहनकर खेलने से हवा का शरीर तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है.जो पसीने से होने वाली ठंडक को रोकते हैं. इससे खिलाड़ी के शरीर का अंदरूनी तापमान खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है.
परफॉर्मेंस और सोचने-समझने की क्षमता पर असर
गर्मी के तनाव के कारण खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया देने की गति धीमी हो जाती है,रिफ्लेक्स खराब हो जाते हैं और एकाग्रता में भारी कमी आती है. मैदान पर चोट लगने की समस्य भी बढ़ जाती है. भीषण गर्मी के कारण खिलाड़ियों के परफॉर्मेंस पर भी इसका असर पड़ता है.
बॉल और पिच के व्यवहार में होने लगता है बदलाव
भीषण गर्मी में पिच का व्यवहार भी बदल जाता है. पि सूखकर कड़ी हो जाती है, जिससे पिच पर दरारें पड़ने लगती हैं. जिसके कारण गेंद का उछाल असमान और बल्लेबाजों के लिए बहुत अनिश्चित हो जाता है, बल्लेबाज पिच के व्यवहार के कारण शरीर पर चोट खा बैठते हैं. तेज़ गर्मी में क्रिकेट की गेंद बहुत तेजी से नरम हो जाती है, जिससे समय के साथ उसकी सीम मूवमेंट और उछाल पर भी इसका असर पड़ता है. लगातार फील्डिंग करने के कारण खिलाड़ियों को प्यास बहुत ज्यादा लगती है. जिससे खिलाड़ियों के एकाग्रता पर असर पड़ता है.
पानी की भारी दरकार
आउटफील्ड को हरा-भरा बनाए रखने के लिए बहुत ज्यादा पानी की जरूरत होती है. सामान्य हालात में हर हफ्ते लगभग 270,000 से 300,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है. वहीं, भीषण गर्मी के कारण सूखे की स्थिति इस जरूरत को कई गुना बढ़ा देती हैं, जिससे स्थानीय जल संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है. मैदान के रखरखाव पर भी इसका बुरा असर पड़ता है.