
युवराज सिंह को क्रिकेट फैंस अब भी नहीं भूले हैं। 2011 के वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के सुपर स्टार रहे थे युवराज। अपनी बीमारी के बावजूद वे चार मैचों में मैन ऑफ द मैच रहे थे।
पूरे टूर्नामेंट में 362 रन बनाने और 15 विकेट चटकाने के चलते वे मैन ऑफ द टूर्नामेंट बनकर उभरे थे। लेकिन इस बार वर्ल्ड कप की टीम में उनकी जगह नहीं बनी। हालांकि टीम चयन से पहले घरेलू क्रिकेट में युवराज के बल्ले ने धमाल भी मचाया था, लेकिन बात नहीं बनी।
टीम में युवराज को नहीं चुने जाने पर उनके पिता योगराज सिंह ने यह कहकर सनसनी मचा दी कि टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी युवराज को पसंद नहीं करते हैं। लेकिन न तो इस पहलू पर युवराज कुछ बोले और न ही टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कुछ कहा।
अब जबकि टीम इंडिया वर्ल्ड कप के क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंच गई है, तब धोनी ने पहली बार युवराज सिंह पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने ऑकलैंड में जिंबाब्वे के खिलाफ जीत हासिल करने के बाद पहली बार कहा कि युवराज वनडे में उतने उपयोगी गेंदबाज नहीं रहे। हालांकि उन्होंने युवराज की आलोचना तो नहीं की, लेकिन इसके लिए वनडे क्रिकेट के नए नियमों को जिम्मेदार ठहराया।
धोनी ने कहा, "वनडे क्रिकेट के नए नियमों ने हमसे युवराज जैसा गेंदबाज़ छिन लिया। आपने देखा होगा कि नए नियमों के आने के बाद उन्होंने वनडे क्रिकेट में ज्यादा गेंदबाजी नहीं की। हालांकि वे टी-20 क्रिकेट में अभी भी अच्छे गेंदबाज़ बने हुए हैं।" नए नियमों के मुताबिक अब वनडे मैच के दौरान 30 गज के घेरे के दायरे से बाहर अधिकतम चार फील्डर ही बाहर रह सकते हैं।
धोनी ने युवराज पर चुप्पी तब तोड़ी, जब उनसे पूछा गया कि क्या 2015 के वर्ल्ड कप में सुरेश रैना, युवराज सिंह की 2011 वाली भूमिका निभा सकते हैं। धोनी ने पहली बार युवराज सिंह की गेंदबाजी पर कमेंट किया है, जो बताता है कि ऑलराउंडर के तौर पर युवराज वनडे की टीम में धोनी की स्कीम में फिट नहीं हो रहे होंगे। लेकिन टी-20 क्रिकेट के लिए धोनी अभी भी युवराज सिंह को बेहतर विकल्प मानते हैं, यानी टी-20 क्रिकेट में अभी भी युवी की वापसी संभव है।
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