
टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
ईडन गार्डन में श्रीलंका के खिलाफ खत्म हुए पहले टेस्ट के आखिरी दिन क्रिकेट प्रेमियों को विराट कोहली एंड कंपनी ने रोमांच का मजा तो पूरा दिया. लेकिन पहला टेस्ट अफसोस भी दे गया कि जीत पास होकर भी दूर रह गई. बहरहाल कोलकाता का सीरीज का यह पहला टेस्ट पूरी तरह से तेज गेंदबाजों के नाम रहा. तेज गेंदबाजों ने ऐसा हंगामा मचाया, जो भारतीय धरती पर अब से 18 साल पहले ही मचा था. इस मचे हंगामे को लेकर क्रिकेटप्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच खूब चर्चाएं जोरों पर चल रही हैं कि यह टेस्ट क्रिकेट के लिए अच्छा है, या बुरा.
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चलिए हम आपको पेसरों के मचाए इस हंगामे के बारे में बताते हैं. हम यह भी साफ कर दें कि इस हंगामे में श्रीलंका के गेंदबाज भी पूरी तरह से भागीदार हैं. दरअसल बात यह है कि इस हंगामे के पीछे सबसे बड़ी वजह रही ईडन की पिच पर अब से पहले कभी न देखी गई घास. जब घास छोड़ी गई, तो इसने पूरी तरह से आग उगली और यह बल्लेबाजों के लिए जहर से कम साबित नहीं हुई. घास से पिच में दोहरी पेस पैदा हो गई, तो तेज गेंदबाजों ने हंगामा मचाने में भी कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी. नतीजतन साल1999 के बाद यह भारतीय धरती पर पहला मौका रहा, जब किसी टेस्ट मैच में तेज गेंदबाजों ने तीस विकेट चटकाए. इससे पहले साल 1999 में कोलकाता में भी भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए टेस्ट मैच में तेज गेंदबाजों ने तीस विकेट चटकाए थे, तो साल 1979 में दिल्ली में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए टेस्ट में तेज गेंदबाजों ने 30 विकेट लिए थे.
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वहीं, साल 1979 के बाद 1983 में अहमदाबाद में भारत और विंडीज के बीच खेले गए टेस्ट में तेज गेंदबाजों ने 33 विकेट लिए थे. मतलब यह कि जब-जब क्यूरेटर ने पिच पर घास का खेल खेला, तब-तब तेज गेंदबाजों ने गेंद से आग उगली.
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वहीं, साल 1979 के बाद 1983 में अहमदाबाद में भारत और विंडीज के बीच खेले गए टेस्ट में तेज गेंदबाजों ने 33 विकेट लिए थे. मतलब यह कि जब-जब क्यूरेटर ने पिच पर घास का खेल खेला, तब-तब तेज गेंदबाजों ने गेंद से आग उगली.
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