
श्रीलंका सीरीज जीतने के बाद जोश से भरे विराट कोहली (सौजन्य : AFP)
विराट कोहली कप्तान के तौर पर श्रीलंका के टेस्ट में पास हो गए। अपनी पहली बड़ी परीक्षा में कप्तान विराट डिसटिंक्शन पाने में कामयाब रहे।
कोहली की सकारात्मक सोच और हार ना मानने का जज़्बा उनके इस बयान से ही साफ झलकता है।
उत्साह से लबरेज कप्तान विराट कोहली ने जीत के बाद कहा, 'टेस्ट मैच को ड्रॉ करना या उस बारे में सोचना हमारे लिए आखिरी विकल्प है।"
यही सोच कोहली को अलग बनाती है, साथी खिलाड़ियों में विश्वास भरती है और फिर वो होता है जो कभी नहीं हुआ...
विराट अब विदेश में टेस्ट सीरीज जीतने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं।
26 साल की उम्र में उन्होंने विदेश में टेस्ट सीरीज जीती है, इससे पहले 1986 में 27 साल के कपिल देव ने इंग्लैंड में सीरीज जीती थी।
विराट आक्रामक हैं और कई बार यह लगता है कि वह खिलाड़ियों पर सख्त होंगे, लेकिन कोहली खिलाड़ियों को पूरी छूट देते हैं, मैच में खिलाड़ियों पर दबाव बनाकर उनसे प्रदर्शन लेना उनके तरीकों में शामिल नहीं।
विराट ने कहा, "मैं अपनी तरफ से सबकुछ करता हूं कि खिलाड़ी रिलैक्स रहें और मैदान पर जाकर खुलकर खेलें, क्योंकि दबाव में खिलाड़ी अपना बेस्ट नहीं दे पाते।"
धोनी से वो अलग हैं और आक्रामक रवैये की खुलकर वकालत करते हैं।
ईशांत के विवाद पर कोहली बचते नजर नहीं आए, बल्कि साफ कहा कि इससे टीम को फायदा हुआ, जो हुआ उससे वो दुखी या निराश नहीं हैं।
विराट ने बयान दिया "मैं इस विवाद से खुश था, सही वक्त पर ईशांत के साथ बहस हुई। इसने ईशांत में गुस्सा भर दिया और वह बहुत आक्रामक हो गया।"
कप्तान कोहली के साथ अच्छी बात यह भी है कि उनका बल्ला बोल रहा है, इससे कप्तान का खुद पर भरोसा और खिलाड़ियों का कप्तान पर भरोसा बढ़ जाता है।
विराट ने इस सीरीज में 3 टेस्ट मैचों में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा 233 रन बनाए हैं।
स्पष्ट है कि कोहली के युग की शुरुआत हो चुकी है, कई लोगों को उनका तरीका या व्यवहार कभी-कभी गलत लग सकता है, लेकिन वह जानते हैं कि वो क्या कर रहे हैं... क्यों कर रहे हैं... उनका खुद पर विश्वास बहुत ज्यादा है, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
कोहली की सकारात्मक सोच और हार ना मानने का जज़्बा उनके इस बयान से ही साफ झलकता है।
उत्साह से लबरेज कप्तान विराट कोहली ने जीत के बाद कहा, 'टेस्ट मैच को ड्रॉ करना या उस बारे में सोचना हमारे लिए आखिरी विकल्प है।"
यही सोच कोहली को अलग बनाती है, साथी खिलाड़ियों में विश्वास भरती है और फिर वो होता है जो कभी नहीं हुआ...
विराट अब विदेश में टेस्ट सीरीज जीतने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं।
26 साल की उम्र में उन्होंने विदेश में टेस्ट सीरीज जीती है, इससे पहले 1986 में 27 साल के कपिल देव ने इंग्लैंड में सीरीज जीती थी।
विराट आक्रामक हैं और कई बार यह लगता है कि वह खिलाड़ियों पर सख्त होंगे, लेकिन कोहली खिलाड़ियों को पूरी छूट देते हैं, मैच में खिलाड़ियों पर दबाव बनाकर उनसे प्रदर्शन लेना उनके तरीकों में शामिल नहीं।
विराट ने कहा, "मैं अपनी तरफ से सबकुछ करता हूं कि खिलाड़ी रिलैक्स रहें और मैदान पर जाकर खुलकर खेलें, क्योंकि दबाव में खिलाड़ी अपना बेस्ट नहीं दे पाते।"
धोनी से वो अलग हैं और आक्रामक रवैये की खुलकर वकालत करते हैं।
ईशांत के विवाद पर कोहली बचते नजर नहीं आए, बल्कि साफ कहा कि इससे टीम को फायदा हुआ, जो हुआ उससे वो दुखी या निराश नहीं हैं।
विराट ने बयान दिया "मैं इस विवाद से खुश था, सही वक्त पर ईशांत के साथ बहस हुई। इसने ईशांत में गुस्सा भर दिया और वह बहुत आक्रामक हो गया।"
कप्तान कोहली के साथ अच्छी बात यह भी है कि उनका बल्ला बोल रहा है, इससे कप्तान का खुद पर भरोसा और खिलाड़ियों का कप्तान पर भरोसा बढ़ जाता है।
विराट ने इस सीरीज में 3 टेस्ट मैचों में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा 233 रन बनाए हैं।
स्पष्ट है कि कोहली के युग की शुरुआत हो चुकी है, कई लोगों को उनका तरीका या व्यवहार कभी-कभी गलत लग सकता है, लेकिन वह जानते हैं कि वो क्या कर रहे हैं... क्यों कर रहे हैं... उनका खुद पर विश्वास बहुत ज्यादा है, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
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