क्रिकेट और बॉलीवुड का बहुत ही चोली-दामन का साथ रहा है. अनकों क्रिकेटरों के अलग-अलग हीरोइनों के साथ अफेयर रहे हैं, तो वहीं कई भारतीय स्टार क्रिकेटरों ने फिल्मों में भी काम किया. ज्यादार ने साइड रोल किए, लेकिन इनमें अपने दौर के हैंडसम बल्लेबाज रहे संदीप पाटिल संभवत: ऐसे इकलौते क्रिकेटर रहे, जिन्होंने साल 1985 में हीरो की भूमिका निभाई. संदीप पाटिल इतिहास के उन चुनिंदा बल्लेबाजों में से हैं, जिन्होंने एक ही ओवर में छह चौके जड़े. इन्हीं चौकों से उनका कद बढ़ा, लेकिन साल 1983 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा बनने के बावजूद संदीप पाटिल का करियर ज्यादा परवान नहीं चढ़ा. और इसके कुछ साल बद जब उन्होंने बॉलीवुड में हीरो बनने का फैसला किया, तो यहां उनका हाल कहीं ज्यादा बुरा साबित हुआ. चलिए संदीप पाटिल की फिल्मी कहानी के बारे में आप डिटेल से जान लीजिए
'कभी अजनबी थे' अजनबी बन गए पाटिल
संदीप पाटिल क्रिकेट मैदान से इतर अच्छी पर्सनेलिटी के लिए जाने जाते थे. इसी वजह से उन्हें निर्माता विजय सिंह ने पाटी को कभी अजनबी थे फिल्म में बतौर नायक लॉन्च किया और किसी स्थापित हीरो के बराबर ही फीस भी दी. लेकिन इस फिल्म से फिर पाटिल बॉलीवुड के लिए अजनबी बन गए. इस फिल्म में उनकी हीइरोइन पूनम पूनम ढिल्लों थीं, लेकिन इसके बावजूद यह फिल्म सुपर फ्लॉप साबित हुई. पूनम ढिल्लो तो आगे जाकर काफी बड़ी हीरोइन बनीं, लेकिन संदीप पाटिल के फिल्मी करियर पर यहीं ब्रेक लग गया

साल की सबसे 10 निराशाजनक फिल्मों में से एक
इस फिल्म की नाकामी के साथ ही पाटिल का फिल्मी करियर परवान चढ़ने से पहले ही तितर-बितर हो गया. क्रिकेटर को हीरो बनाने के कारण फैंस और मीडिया में इस देखने की बहुत ही बेताबी थी, लेकिन यह फिल्म दर्शकों को खींचने में नाकाम रही और अपनी लागत भी नहीं निकाल सकी. वहीं, साल 1986 में प्रसिद्ध फिल्मफेयर मैगज़ीन ने इसे पिछले साल (1985) की सबसे 10 निराशाजनक फिल्मों में एक करार दिया.
साल 1982 में जड़े थे पाटिल ने एक ओवर में 6 चौके
संदीप पाटिल वास्तव में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ओवर में 6 चौके जड़ने का कारनामा करने वाले पहले खिलाड़ी थे.इससे पहले ऐसा सिर्फ काउंटी क्रिकेट में ही हुआ था.पाटिल ने जून में मैनचेस्टर (ओल्डट्रैफर्ड) में खेले गए टे्ट मैच में मशहूर मीडियम पेसर बॉब विलिस के ओवर में छह चौके लगाए, तो उनका यह कारनामा उस समय बच्चे-बच्चे की जुबां पर चढ़ गया क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. बिलिस का यह ओवर 7 गेंदों का था. इसमें पांचवीं गेंद नो-बॉल थी और इस पर कोई रन नहीं आया था.
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