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This Article is From Oct 29, 2015

सचिन को नहीं पता था कि कैसे बनाए जाते हैं दोहरे और तिहरे शतक : कपिल देव

सचिन को नहीं पता था कि कैसे बनाए जाते हैं दोहरे और तिहरे शतक : कपिल देव
सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर (फाइल फोटो)
दुबई: भारत के पूर्व कप्तान कपिल देव ने कहा कि सचिन तेंदुलकर को यह नहीं पता था कि दोहरे , तिहरे शतक या 400 रन कैसे बनाते हैं। हालांकि उनमें इन बुलंदियों को छूने की क्षमता थी, लेकिन वे ‘मुंबई स्कूल ऑफ क्रिकेट’ में फंसे थे।

कपिल ने ‘खलीज टाइम्स’ से कहा, ‘‘मुझे गलत मत समझिए, लेकिन मेरा मानना है कि सचिन ने अपनी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं किया। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि उन्होंने जो किया, वह इससे कहीं ज्यादा कर सकते थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वह मुंबई क्रिकेट से चिपका रहा। उसे साफ-सुथरा क्रिकेट खेलने वाले मुंबई के खिलाड़ियों की बजाय विवियन रिचर्डस के साथ ज्यादा समय बिताना चाहिए था।’’

भारत को 1983 में विश्व कप दिलाने वाले कप्तान ने कहा, ‘‘सचिन कहीं बेहतर खिलाड़ी थे, लेकिन उन्हें सिर्फ शतक बनाना आता था। उन्हें नहीं पता था कि दोहरे, तिहरे शतक या 400 रन कैसे बनाते हैं।’’

'बेरहम नहीं परफेक्ट क्रिकेटर रहे'
कपिल ने कहा कि वह सचिन को वीरेंद्र सहवाग की तरह खेलने की सलाह देते। उन्होंने कहा, ‘‘सचिन में क्षमता थी। वह तकनीकी रूप से मजबूत थे, लेकिन मुझे लगता है कि वे सिर्फ शतक बनाने उतरते थे। रिचर्डस की तरह वह बेरहम नहीं थे, बल्कि परफेक्ट क्रिकेटर थे। यदि मैं उनके साथ ज्यादा समय बिता पाता, तो मैं उनसे जरूर कहता कि वीरेंद्र सहवाग की तरह खेलो। तुम कहीं बेहतर क्रिकेटर बनोगे।'

कपिल ने यहां शेन वार्न, वसीम अकरम और इयान बाथम की मौजूदगी में जुमेइरा होटल के कोव बीच क्लब पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही।

'उनके जैसा बल्लेबाज नहीं देखा'
वार्न ने कहा कि तेंदुलकर खास थे। उन्होंने कहा, ‘‘वह बेहतरीन खिलाड़ी हैं और मैंने अपने 20 साल के करियर में उनके जैसा बल्लेबाज नहीं देखा। वह तेज गेंदबाजों और स्पिन का बखूबी सामना करते थे और गेंद को भांपने की उसकी क्षमता गजब की थी। वह शानदार खिलाड़ी थे और नब्बे के दशक में गेंदबाजों पर उनका आतंक रहा। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेहतरीन खेला।’’

अकरम ने कहा, साथ में ज्यादा नहीं खेल पाने का मलाल  
तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने खेद जताया कि उन्हें तेंदुलकर के खिलाफ ज्यादा खेलने का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा, ‘‘वकार युनूस और मुझे यह मलाल रहेगा कि हम करीब 10 साल तक तेंदुलकर के खिलाफ टेस्ट नहीं खेल सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने उनके खिलाफ खेला, जब 1989 में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। वह उस समय 16 साल का था। हमने 1999 में सचिन के खिलाफ टेस्ट खेला। वह सर्वश्रेष्ठ था और 100 अंतरराष्ट्रीय शतक उसकी प्रतिभा की बानगी देते हैं।’’ बाथम ने कहा, ‘‘मेरी नजर में विव रिचर्डस सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे। उनसे बेहतर कोई नहीं था। जब मैने शुरुआत की, तब रिचर्डस और सुनील गावस्कर थे। उनके बाद ब्रायन लारा और तेंदुलकर आए।’’

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