इंडियन प्रीमियर लीग (2026) के वर्तमान संस्करण का करीब एक तिहाई ही हिस्सा हुआ है, लेकिन कुछ खिलाड़ियों का असाधारण भविष्य में भारतीय टी20 टीम के चयन मानक के समीकरण बदलता दिख रहा है, तो कुछ स्थापित खिलाड़ियों के लिए भी अब जगह बनाना आसान नहीं होने जा रहा. उदाहरण के तौर पर एक तरफ वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) बल्ले से आग लगाए हुए हैं, तो वहीं दूसरी ओर कुछ अलग तरह के ही खिलाड़ी सामने आ रहे हैं, जो खेल से हैरान कर दे रहे हैं. और इन्हीं में से एक हैं लखनऊ के 21 साल के मुकुल चौधरी, जो एक ही तूफानी पारी से नए 'सुपर फिनिशर' बनकर उभरे हैं. मुकुल ने जिस अंदाज में ऐसे समय नंबर-7 पर 27 गेंदों पर 54 रन जड़कर लखनऊ को मैच जिता दिया, जब सभी ने उसकी हार मान ली थी. और मुकुल के उभार ने टीम इंडिय में बतौर फिनिशिर शामिल रिंकू सिंह (Rinku Singh) के लिए यहां से अपना आगे भविष्य सुरक्षित रखने के लिए खासी चुनौती खड़ी कर दी है.
तूफानी स्ट्राइक-रेट, धोनी स्टाइल और सुपर रिकॉर्ड
मुकुल चौधरी ने केकेआर के खिलाफ नंबर सात पर दो सौ के स्ट्राइक-रेट से बल्ले से कोहराम मचाते हुए लखनऊ को जीत दिला दी, तो वहीं इस पतले-दुबले बल्लेबाज ने 7 छक्के जड़कर दिखाया कि वह भले ही देखने में कमजोर से लगते हों, लेकिन वह न छक्के लगाना जानते हैं, बल्कि खोद-खोद कर छक्के लगाना में माहिर हैं. और उन्हें धोनी की तरह हेलीकॉप्टर शॉट लगाना भी आता है.
आईपीएल इतिहास में सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बने
मुकुल ने 27 गेंदों पर 54 रन की तूफानी पारी से वह कारनामा कर दिखाया, जो आईपीएल के 18 साल के इतिहास में पहले एक ही बार हुआ था. और वह था सफलतापूर्वक लक्ष्य का पीछा करते हुए बचे सिर्फ आखिरी चार ओवरों में पचास या इससे ज्यादा का स्कोर बनाना. इससे पहले यह कारनामा साल 2013 में केरोन पोलार्ड ने किया था.
अब फंस गया रिंकू का पेंच
अगर आप आंकड़ों पर गौर फरमाएंगे, तो साफ दिखेगा कि अगर रिंकू सिंह पिछले दिनों टी20 विश्व कप टीम में जगह पाने में सफल रहे, तो ऐसा उनके प्रदर्शन से ज्यादा 'फिनिशर की छवि' के कारण ज्यादा रहा है क्योंकि उनके आकड़े बतौर फिनिशर ज्यादा अच्छी तस्वीर पेश नहीं करते. रिंकू सिंह ने पिछले करीब एक साल में जहां पिछली 12 पारियों में 32.00 के औसत से 224 रन बनाए, तो इसी दौरान नंबर-7 पर उनका योगदान 6 पारियों में 35 रन का रहा. और औसत रहा 11.67* . उनका नाबाद औसत बताता है कि उन्हें बैटिंग का पर्याप्त समय या गेंद नहीं मिलीं.वहीं, प्रबंधन ने उन्हें कुछ मैचों में ऊपरी क्रम पर भी खिलाया. और इसी बात ने अब रिंकू को दोराहे पर ला खड़ा किया है
इस वजह से रिंकू हैं दोराहे पर!
अब रिंकू के साथ समस्या यह है कि ऊपरी क्रम पर उनका मुकाबला कहीं दिग्गज बल्लेबाजों से है, तो नंबर-7 या 6 पर मुकुल चौधरी जैसे उभरते फिनिशर आ खड़े हुए हैं, जो उनसे कहीं तेजी से खोद-खोद कर छक्के जड़कर विरोधी के मुंह में हाथ डालकर निवाला छीनने की क्षमता रखते हैं. उनके मुकाबले कहीं बड़े शॉट खेल सकते हैं, उनसे कहीं तेज स्ट्राइक-रेट के साथ रन बनाने में सक्षम हैं. और यही बात रिंकू के खिलाफ जा रही है. साफ है कि अब उनका बतौर फिनिशर मुकाबला मुकुल चौधरी जैसे खिलाड़ी से होने जा रहा है. और ऐसे में उनके लिए टीम में जगह बनाना बहुत ही मुश्किल काम होगा.
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