विराट कोहली को लेकर एक मशहूर और दिल छू लेनेवाली कहानी है कि कैसे अपने पिता की मौत के बाद भी उन्होंने अपनी दिल्ली टीम के लिए रणजी मैच में अपनी ड्यूटी निभाई थी. उससे पहले 1999 वर्ल्ड कप के दौरान सचिन तेंदुलकर के पिता का देहांत हुआ तो पिता के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के बाद वो फौरन टीम इंडिया के लिए मैदान पर उतर गए. चेन्नई के मुकेश चौधरी ने वानखेड़े की पिच पर कमिटमेंट दिखाने की जिस परंपरा की मजबूत मिसाल रखी उसमें मो. सिराज और ऋषभ पंत जैसे कई दिग्गजों के नाम शामिल हैं.
नेट बॉलर की तरह हुई करियर की शुरुआत
राजस्थान में भीलवाड़ा के लेफ़्ट आर्म सीमर मुकेश चौधरी की आईपीएल में शुरुआत चेन्नई के एक नेट बॉलर की तरह हुई. लेकिन 2022 में उन्हें मौका मिला तो वे 13 मैचों में चेन्नई के लिए लीडिंग विकेट लेनेवाले गेंदबाज बन गए और 16 विकेट झटक लिए.
Meet Mukesh Choudhary his mother passed away yesterday, yet he came to play today. Even in such grief, he delivered an outstanding spell, completely outplayed Quinton de Kock and clean bowled him.🫡🙌 pic.twitter.com/IITcnYhR6N
— 𝐑𝐮𝐬𝐡𝐢𝐢𝐢⁴⁵ (@rushiii_12) April 23, 2026
पिछले दो सीजन में मुकेश को सिर्फ़ 3 मैच खेलने के मौके मिल पाये. अबतक खेले गए 18 मैचों में उनके नाम 20 विकेट हैं. वानखेड़े के मैदान पर मुंबई के लिए खेलते हुए चेन्नई के ख़िलाफ मुकेश ने 4 ओवर में 7.75 की इकॉनमी रखते हुए 31 रन खर्चे और क्विंन डिकॉक का बेहद अहम विकेट अपने नाम कर लिया. इस सीजन पिछले मैच में हैदराबाद के ख़िलाफ मुकेश ने 21 रन देकर 2 विकेट अपने नाम किये.
सचिन ने 1999 वर्ल्ड कप में पिता की मौत के बाद जड़ा था शतक
1999 वर्ल्ड कप के दौरान पिता रमेश तेंदुलकर के निधन के बावजूद सचिन तेंदुलकर ने अपनी टीम के लिए कमिटमेंट दिखाते हुए क्रिकेट खेलना जारी रखा. वे पिता के अंतिम संस्कार के लिए देश लौटे. फिर इंग्लैंड वापस जाकर केन्या के खिलाफ नाबाद 140* रनों की पारी खेली और उस पारी को अपने पिता को समर्पित कर दिया. उन दिनों सचिन के आउट होते ही देश में करोड़ों टेलीविजन के बंद हो जाने का दौर था. सचिन और भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह एक बेहद भावुक लम्हा साबित हुआ था. शतक के बाद आसमान की तरफ देखकर पिता को समर्पित किया कहा था, 'मैंने महसूस किया कि मेरे पिता चाहते कि मैं खेलूं.'
किंग कोहली ने पिता की मौत के बाद बनाए थे 90 रन
विराट कोहली के पिता प्रेम कोहली का 54 साल की उम्र में साल 2006 में स्ट्रोक की वजह से सुबह 3 बजे निधन हो गया. तब विराट सिर्फ़ 18 साल के थे. पिता के निधन के बावजूद, विराट अगले दिन दिल्ली के लिए कर्नाटक के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच खेलने मैदान पर उतरे और 90 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेलकर अपनी टीम को फॉलोआन के खतरे से बचाया था. आउट होने के बाद वो सीधा पिता के अंतिम संस्कार के लिए गए. उनके कोच राजकुमार शर्मा ने कहा था, 'उस दिन विराट बदल गया!'
मो. सिराज, पंत ने भी कर दिया था भावुक
2020 के ऑस्ट्रेलियाई दौर पर टीम इंडिया के गेंदबाज मोहम्मद सिराज कोविड की वजह से क्वारंटीन में थे. मो. सिराज के पिता मीर गौस का फेफड़े की बीमारी की वजह से से निधन हुआ तो सिराज कोविड प्रोटोकॉल की वजह से भारत नहीं आ पाए. सिराज को उस दौरे पर टीम के साथ ही रुकना पड़ा. उस सीरीज में दर्द की सीमा लांघकर सिराज ने टेस्ट में डेब्यू किया और सीरीज में 13 विकेट झटके. उन्होंने ब्रिसबेन या गाबा टेस्ट के दौरान उनकी 73 रन देकर 5 विकेट की पारी भी शामिल है. भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद मो. सिराज ने कहा था, 'अब्बा का सपना था मैं इंडिया के लिए खेलूं. उनकी दुआ से ही सब हुआ'.
टीम इंडिया के धमाकेदार विकेटकीपर बैटर ऋषभ पंत के पिता राजेंद्र पंत साल 2017 के IPL सीजन से 2 दिनों पहले हार्ट अटैक और निधन हो गया. पंत पिता का अंतिम संस्कार करके फौरन लौट आए और बैंगलोर के ख़िलाफ दिल्ली के लिए 36 गेंदों पर 57 रनों की पारी खेली और आउट होने के बाद भावुक हो गए.
चेन्नई सुपर किंग्स के मुकेश चौधरी ने अपनी मां के निधन के बावजूद मुंबई बनाम चेन्नई मैच खेलने का फैसला लेकर सभी को भावुक भी किया और अपनी टीम के प्रति अपनी कमिटमेंट भी दिखा दी. मुकेश की मां प्रेम देवी लंबे समय से बीमार थीं. चेन्नई टीम ने काली पट्टी बांधकर उनकी मां को श्रद्धांजलि दी.
This one is for Mukesh's mother.
— Chennai Super Kings (@ChennaiIPL) April 23, 2026
In her memory and in solidarity with Mukesh, we wear black armbands and play with a little more in our hearts today. pic.twitter.com/OKk6bmPK4e
मुंबई के ख़िलाफ चेन्नई टीम का एलान हुआ तो उसमें राजस्थान के भीलवाड़ा के पेसर मुकेश चौधरी का नाम भी चमकता नजर आया. चेन्नई की टीम के सभी खिलाडियों ने उनकी मां के सम्मान में बांह पर काली पट्टी बांधकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. चेन्नई टीम के बांये हाथ के 29 साल के पेसर मुकेश चौधरी का नाम इस परंपरा को आगे बढ़ाकर मिसाल कायम करने वालों की लिस्ट में शामिल हो गया है.
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