
नासिक:
सचिन तेंदुलकर ने युवा खिलाड़ियों को सलाह दी कि ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने के लिए उन्हें घंटो अभ्यास करना चाहिए।
तेंदुलकर ने साइना का उदाहरण दिया और कहा कि इस बैडमिंटन खिलाड़ी ने कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास की वजह से इतनी ऊंचाई हासिल की है। उन्होंने कहा, युवा खिलाड़ियों को ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता (साइना) से सीख लेनी चाहिए तथा सफलता हासिल करने के लिए अपने खेल पर ध्यान बनाए रखना चाहिए। इस महान क्रिकेटर ने पिछले महीने साइना को ओलिंपिक में सफलता हासिल करने के लिए बीएमडब्ल्यू कार उपहार में दी थी।
तेंदुलकर से इस बातचीत का आयोजन अमित इंटरप्राइजेज नामक फर्म ने किया था। इसका संचालन क्रिकेट पत्रकार सुनंदन लेले कर रहे थे। तेंदुलकर इस फर्म के ब्रांड एम्बैसेडर हैं। तेंदुलकर बहुत सहज लग रहे थे और उन्होंने श्रोताओं के कई सवालों के जवाब दिए। जब उनसे राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के संन्यास के बारे में पूछा गया, उन्होंने कहा कि उन दोनों की अपनी खास शैली थी और वह महान खिलाड़ी थे।
एक अन्य सवाल में उन्होंने कहा कि विश्वकप जीतने का उनका सपना पूरा हो गया है और उन्होंने युवा खिलाड़ियों को अपने सपनों के पीछे भागने की सलाह दी। तेंदुलकर ने कहा कि वह मुंबई से केवल 200 किमी दूर नासिक में लगभग तीन दशक बाद आए हैं। उन्होंने कहा, जब मैं सात या आठ साल का था, तब अपने माता-पिता के साथ त्रयम्बकेश्वर (नासिक के पास स्थित पवित्र नगरी) आया था। इसके बाद मैं 1983-84 में क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए यहां आया था।
तेंदुलकर ने साइना का उदाहरण दिया और कहा कि इस बैडमिंटन खिलाड़ी ने कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास की वजह से इतनी ऊंचाई हासिल की है। उन्होंने कहा, युवा खिलाड़ियों को ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता (साइना) से सीख लेनी चाहिए तथा सफलता हासिल करने के लिए अपने खेल पर ध्यान बनाए रखना चाहिए। इस महान क्रिकेटर ने पिछले महीने साइना को ओलिंपिक में सफलता हासिल करने के लिए बीएमडब्ल्यू कार उपहार में दी थी।
तेंदुलकर से इस बातचीत का आयोजन अमित इंटरप्राइजेज नामक फर्म ने किया था। इसका संचालन क्रिकेट पत्रकार सुनंदन लेले कर रहे थे। तेंदुलकर इस फर्म के ब्रांड एम्बैसेडर हैं। तेंदुलकर बहुत सहज लग रहे थे और उन्होंने श्रोताओं के कई सवालों के जवाब दिए। जब उनसे राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के संन्यास के बारे में पूछा गया, उन्होंने कहा कि उन दोनों की अपनी खास शैली थी और वह महान खिलाड़ी थे।
एक अन्य सवाल में उन्होंने कहा कि विश्वकप जीतने का उनका सपना पूरा हो गया है और उन्होंने युवा खिलाड़ियों को अपने सपनों के पीछे भागने की सलाह दी। तेंदुलकर ने कहा कि वह मुंबई से केवल 200 किमी दूर नासिक में लगभग तीन दशक बाद आए हैं। उन्होंने कहा, जब मैं सात या आठ साल का था, तब अपने माता-पिता के साथ त्रयम्बकेश्वर (नासिक के पास स्थित पवित्र नगरी) आया था। इसके बाद मैं 1983-84 में क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए यहां आया था।
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