
ज्योतिरादित्य सिंधिया... (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
41 साल के अनुराग ठाकुर बीसीसीआई के नए अध्यक्ष बने और इसके साथ ही वह दूसरे सबसे युवा बीसीसीआई अध्यक्ष भी हो गए हैं। उनके अध्यक्ष बनते ही बीसीसीआई सचिव का पद महाराष्ट्र के अजय शिर्के के नाम हुआ। दोनों को निर्विरोध चुना गया, लेकिन इसके बाद शुरू होती है असली कहानी।
चुनौतियां कई हैं सामने
बीसीसीआई की स्वायत्ता को लोढ़ा पैनल के सुझावों के बीच बरकरार रखने की चुनौती है। बीसीसीआई को विश्व स्तर पर इसी तरह कायम रखने की चुनौती ताकि उसका वर्चस्व बरकरार रहे, क्योंकि जाते-जाते पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर ने साफ़ कर दिया कि आखिर क्यों वह बीसीसीआई छोड़कर आईसीसी की तरफ़ गए और साथ ही क्यों वह मानते हैं कि लोढ़ा पैनल के कुछ सुझाव बीसीसीआई को बर्बाद कर सकते हैं, जिनमें एक राज्य एक वोट, दो टर्म के बीच कूलिंग पीरियड होना और सबसे अहम हर ओवर के बाद एडवर्टिज़मेंट पर रोक की बात है।
मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया का मानना है कि अनुराग ठाकुर और अजय शिर्के की जोड़ी बीसीसीआई को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का काम करेगी। साथ ही वह बीसीसीआई में पारदर्शिता के मुद्दे को प्रमुख तौर पर सामने रखेंगे और इस शिकायत को दूर करेंगे।
खराब हालात से उबरा जा सकता है
सिंधिया ने कहा कि मुझे लगता है कि हमें जवाबदेह और पारदर्शी होना चाहिए और मेरे हिसाब से कोई भी हालात इतने खराब नहीं होते कि उनसे उबरा न जा सके। क्रिकेट सिर्फ भारत में नहीं पूरी दुनिया में फैल रहा है और हमारा बोर्ड उम्मीदों पर खरा उतरेगा। कुछ मुद्दे हैं, जिनको लेकर चर्चा हो रही है और हमें इनका सामना करना होगा और उसका समाधान खोजना होगा। जहां तक बात लोढ़ा पैनल के सुझावों की बात है तो मैं उस पर कोई टिपण्णी नहीं कर सकता..लेकिन जिन लोगो को उच्च पदों के लिए चुना गया है वो उम्मीदों पर खरें उतरेंगे"
ज्योतिरादित्य सिंधिया उन कुछ लोगों में से हैं, जिन्होंने सामने आकर आईपीएल फिक्सिंग के बाद क्रिकेट में करप्शन के खिलाफ बोला था। अनुराग ठाकुर 2014 से 2017 की अध्यक्ष पद की टर्म के लिए चुने गए हैं, जिसमें अब महज़ डेढ़ वर्ष का समय बाकी रह गया है और बड़ा सवाल यही है कि क्या इन डेढ़ वर्षों में वह इन सभी चुनौतियों से निबटकर, उबरकर एक मज़बूत एडमिनस्ट्रेटर के तौर पर उभरेंगे।
चुनौतियां कई हैं सामने
बीसीसीआई की स्वायत्ता को लोढ़ा पैनल के सुझावों के बीच बरकरार रखने की चुनौती है। बीसीसीआई को विश्व स्तर पर इसी तरह कायम रखने की चुनौती ताकि उसका वर्चस्व बरकरार रहे, क्योंकि जाते-जाते पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर ने साफ़ कर दिया कि आखिर क्यों वह बीसीसीआई छोड़कर आईसीसी की तरफ़ गए और साथ ही क्यों वह मानते हैं कि लोढ़ा पैनल के कुछ सुझाव बीसीसीआई को बर्बाद कर सकते हैं, जिनमें एक राज्य एक वोट, दो टर्म के बीच कूलिंग पीरियड होना और सबसे अहम हर ओवर के बाद एडवर्टिज़मेंट पर रोक की बात है।
मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया का मानना है कि अनुराग ठाकुर और अजय शिर्के की जोड़ी बीसीसीआई को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का काम करेगी। साथ ही वह बीसीसीआई में पारदर्शिता के मुद्दे को प्रमुख तौर पर सामने रखेंगे और इस शिकायत को दूर करेंगे।
खराब हालात से उबरा जा सकता है
सिंधिया ने कहा कि मुझे लगता है कि हमें जवाबदेह और पारदर्शी होना चाहिए और मेरे हिसाब से कोई भी हालात इतने खराब नहीं होते कि उनसे उबरा न जा सके। क्रिकेट सिर्फ भारत में नहीं पूरी दुनिया में फैल रहा है और हमारा बोर्ड उम्मीदों पर खरा उतरेगा। कुछ मुद्दे हैं, जिनको लेकर चर्चा हो रही है और हमें इनका सामना करना होगा और उसका समाधान खोजना होगा। जहां तक बात लोढ़ा पैनल के सुझावों की बात है तो मैं उस पर कोई टिपण्णी नहीं कर सकता..लेकिन जिन लोगो को उच्च पदों के लिए चुना गया है वो उम्मीदों पर खरें उतरेंगे"
ज्योतिरादित्य सिंधिया उन कुछ लोगों में से हैं, जिन्होंने सामने आकर आईपीएल फिक्सिंग के बाद क्रिकेट में करप्शन के खिलाफ बोला था। अनुराग ठाकुर 2014 से 2017 की अध्यक्ष पद की टर्म के लिए चुने गए हैं, जिसमें अब महज़ डेढ़ वर्ष का समय बाकी रह गया है और बड़ा सवाल यही है कि क्या इन डेढ़ वर्षों में वह इन सभी चुनौतियों से निबटकर, उबरकर एक मज़बूत एडमिनस्ट्रेटर के तौर पर उभरेंगे।
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