
जिम्बाब्वे:
टीम इंडिया को सीरीज़ के आख़िरी T-20 मैच में ज़िम्बाब्वे ने 10 रनों से हरा दिया। ये पहला मौका था जब ज़िम्बाब्वे ने किसी टी-20 मैच में भारत को पटखनी दी। हार की वजह बल्लेबाज़ रहे जो 146 के लक्ष्य को भी हासिल नहीं कर सके। दरअसल इस पूरे दौरे में भारतीय बल्लेबाज़ी में की कमी नज़र आई है। 3 वनडे मैच की सीरीज़ में भारत ने 300 का आंकड़ा एक बार भी नहीं छुआ,वहीं 3 वनडे मैच की सीरीज़ में भारत का सर्वोच्च स्कोर रहा 276 रन का। दो T-20 मैच की सीरीज़ में भी 200 का आंकड़ा टीम इंडिया नहीं लगा पाई और T-20 में टीम इंडिया का सर्वोच्च स्कोर रहा 178 रनों का।
इस औसत प्रदर्शन के बाद भी कप्तान अजिन्कय रहाणे ये मानने को तैयार नहीं कि खिलाड़ियों में जोश की कमी दिखी। अजिन्कय का कहना है "खिलाड़ियों में जोश की कमी नहीं थी, पूरे दौरे पर जिस तरीके की क्रिकेट हमने खेली उससे में संतुष्ट हूं। लेकिन हां, आखिरी टी-20 में मिली हार ने हमें थोड़ा निराश ज़रूर किया है।" बल्लेबाज़ों का निजी प्रदर्शन भी बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं बांधता है। अंबाति तो खैर चोटिल हो गए, लेकिन दूसरे खिलाड़ी जो चले भी वो एक अच्छी पारी ही खेल पाए। वनडे सीरीज़ में केदार जाधव, स्टूअर्ट बिन्नी और मुरली विजय ने 1-1 अच्छी पारी खेली लेकिन T-20 सीरीज़ में ये तीनों एक भी अर्धशतक नहीं लगा पाए।
मनोज तिवारी वनडे में फ़्लॉप रहे, टी-20 में उन्हें प्लेइंग 11 से ड्रॉप किया गया। रॉबिन उथप्पा वनडे में फ़्लॉप रहे, आख़िरी टी-20 में उन्होंने 42 रन बनाए। आख़िरी वनडे में चमके मनीष भी टी-20 में प्रभावित नहीं कर पाए। गेंदबाज़ी में संदीप शर्मा को छोड़कर बाकी सभी गेंदबाज़ों ने ठीक-ठीक प्रदर्शन किया। हालाकि रहाणे इस प्रदर्शन के लिए अपनी कमज़ोरी से ज्यादा विरोधी की ताकत को ज़िम्मेदार मानते हैं।
रहाणे के मुताबिक "हमें ज़िंबाब्वे को अच्छी क्रिकेट खेलना का श्रेय देना चाहिए। पूरी सीरीज़ में वो अच्छा खेले हैं। हमने आखिरी टी-20 में बहुत जल्दी 4 विकेट गंवा दिए जिसके कारण हमें हार मिली। गेंदबाज़ों ने अच्छा काम किया मगर बल्लेबाज़ आखिरी मैच में चूक गए।" बेंच स्ट्रेंथ या युवा टीम जो भी इसे नाम दिया जाए, ऐसा कुछ नहीं कर सकी जिसपर जश्न मनाया जा सके।। चयनकर्ताओं के लिए ये चेतावनी है, उन्हें अब इन रिज़र्व खिलाड़ियों से आगे भी सोचना होगा ताकि भविष्य की टीम इंडिया बेहतर ढंग से तैयार की जा सके।
इस औसत प्रदर्शन के बाद भी कप्तान अजिन्कय रहाणे ये मानने को तैयार नहीं कि खिलाड़ियों में जोश की कमी दिखी। अजिन्कय का कहना है "खिलाड़ियों में जोश की कमी नहीं थी, पूरे दौरे पर जिस तरीके की क्रिकेट हमने खेली उससे में संतुष्ट हूं। लेकिन हां, आखिरी टी-20 में मिली हार ने हमें थोड़ा निराश ज़रूर किया है।" बल्लेबाज़ों का निजी प्रदर्शन भी बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं बांधता है। अंबाति तो खैर चोटिल हो गए, लेकिन दूसरे खिलाड़ी जो चले भी वो एक अच्छी पारी ही खेल पाए। वनडे सीरीज़ में केदार जाधव, स्टूअर्ट बिन्नी और मुरली विजय ने 1-1 अच्छी पारी खेली लेकिन T-20 सीरीज़ में ये तीनों एक भी अर्धशतक नहीं लगा पाए।
मनोज तिवारी वनडे में फ़्लॉप रहे, टी-20 में उन्हें प्लेइंग 11 से ड्रॉप किया गया। रॉबिन उथप्पा वनडे में फ़्लॉप रहे, आख़िरी टी-20 में उन्होंने 42 रन बनाए। आख़िरी वनडे में चमके मनीष भी टी-20 में प्रभावित नहीं कर पाए। गेंदबाज़ी में संदीप शर्मा को छोड़कर बाकी सभी गेंदबाज़ों ने ठीक-ठीक प्रदर्शन किया। हालाकि रहाणे इस प्रदर्शन के लिए अपनी कमज़ोरी से ज्यादा विरोधी की ताकत को ज़िम्मेदार मानते हैं।
रहाणे के मुताबिक "हमें ज़िंबाब्वे को अच्छी क्रिकेट खेलना का श्रेय देना चाहिए। पूरी सीरीज़ में वो अच्छा खेले हैं। हमने आखिरी टी-20 में बहुत जल्दी 4 विकेट गंवा दिए जिसके कारण हमें हार मिली। गेंदबाज़ों ने अच्छा काम किया मगर बल्लेबाज़ आखिरी मैच में चूक गए।" बेंच स्ट्रेंथ या युवा टीम जो भी इसे नाम दिया जाए, ऐसा कुछ नहीं कर सकी जिसपर जश्न मनाया जा सके।। चयनकर्ताओं के लिए ये चेतावनी है, उन्हें अब इन रिज़र्व खिलाड़ियों से आगे भी सोचना होगा ताकि भविष्य की टीम इंडिया बेहतर ढंग से तैयार की जा सके।
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