कभी क्रिकेट स्टार्स के साथ सेल्फी लेने के बजाय उनके जैसा बनने का सपना देखने वाले आकिब नबी अब खुद उस मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां पहुंचना हर युवा क्रिकेटर का सपना होता है. जम्मू-कश्मीर के बारामूला के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय टीम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा. अब न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे और पांचवे वनडे सीरीज के लिए टीम इंडिया में उन्हें एक बार फिर चुने जाने के बाद आकिब की कहानी फिर चर्चा में है.
आकिब नबी के पिता चाहते थे कि वह क्रिकेट के बजाय पढ़ाई पर ध्यान दें और डॉक्टर बनें, क्योंकि परिवार को खेल में भविष्य नजर नहीं आता था. लेकिन आकिब के जुनून ने धीरे-धीरे परिवार की सोच बदल दी. बचपन में बेहतर पिच पर अभ्यास करने के लिए उन्हें करीब 70 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था. शुरुआती ट्रायल के समय उनके पास स्पाइक वाले क्रिकेट जूते तक नहीं थे.
आकिब ने बताया क्यों स्टार्स के साथ नहीं लेते थे सेल्फी
एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब आकिब नबी से पूछा गया कि तुम इतने सारे क्रिकेट स्टार्स के साथ खेलते हो. उनके साथ सेल्फी क्यों नहीं लेते? आकिब ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- 'एक दिन मैं ऐसी जगह पहुंचूंगा, जहां वे मेरे साथ सेल्फी लेना चाहेंगे.' हालांकि, कुछ समय लगा लेकिन उसकी यह बात सच हो गई है.
पिता चाहते थे बेटा डॉक्टर बने
आकिब को पहली बार 30 सितंबर 2026 को भारत बनाम वेस्टइंडीज के बीच दूसरे वनडे में डेब्यू का मौका मिला. बारामूला जिले के एक छोटे से गांव में पले-बढ़े आकिब ने बहुत कम सुविधाओं और सीमित मौकों के बीच, स्थानीय मैदानों पर खेलकर क्रिकेट सीखा. उनके पिता, गुलाम नबी डार, जो एक स्कूल टीचर हैं, चाहते थे कि आकिब अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें और डॉक्टर बनें. लेकिन आकिब की लगन ने आखिरकार उनके पिता का मन बदल दिया.
रोज तय करते थे 70 किलोमीटर का सफर
आकिब को बचपन से ही क्रिकेट का बहुत शौक था. अपने सपने को पूरा करने के लिए, आकिब नियमित रूप से लगभग 70 किलोमीटर (43 मील) का सफर तय करके श्रीनगर जाते थे, ताकि वे सही क्रिकेट पिच पर प्रैक्टिस कर सकें. जब उन्होंने अपने पहले क्रिकेट ट्रायल में हिस्सा लिया, तब उनके पास स्पाइक वाले जूते तक नहीं थे.
10 साल तक जमकर बहाया पसीना
वे सुबह जल्दी उठकर जिम जाते थे और फिर दिन भर प्रैक्टिस करते थे. उन्होंने 10 साल तक लगभग हर दिन ऐसा ही किया उन्हें बड़ा मौका 2020 में मिला, जब उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लिए रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया और झारखंड के खिलाफ 5 विकेट लिए. हालांकि, सफलता रातों-रात नहीं मिली. 2024-25 रणजी ट्रॉफी सीजन में आकिब ने 44 विकेट लिए और टूर्नामेंट के सबसे सफल तेज गेंदबाज रहे, लेकिन फिर भी वे राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा चर्चा में नहीं आ पाए.
जम्मू-कश्मीर को दिलाया पहला रणजी खिताब
अगले सीजन में आकिब ने हाल के रणजी ट्रॉफी इतिहास के सबसे बेहतरीन बॉलिंग प्रदर्शनों में से एक किया. उन्होंने 10 मैचों में 60 विकेट लिए और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने. उनकी इस शानदार परफॉरमेंस की बदौलत जम्मू-कश्मीर ने 67 साल के लंबे इंतजार के बाद अपना पहला रणजी ट्रॉफी खिताब जीता.
आईपीएल में भी मिला मौका
घरेलू क्रिकेट में उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में दिल्ली कैपिटल्स के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है. आखिरी दो मैचों के लिए टीम में शामिल किए जाने से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का एक और मौका मिला है. हालांकि, टीम में चुने जाने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें प्लेइंग XI में जगह मिल ही जाएगी, लेकिन इस क्रिकेटर के लिए यह एक बड़े सम्मान की बात है.
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