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ICC के नए नियम: खेल और खिलाड़ियों पर होगा बड़ा असर? जानें कब से लागू होंगे नए रूल

ICC ने टी-20 और टेस्ट क्रिकेट के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. 1 अक्टूबर से लागू होने वाले इन नए नियमों का खेल और खिलाड़ियों पर क्या असर होगा, जान लें

ICC के नए नियम: खेल और खिलाड़ियों पर होगा बड़ा असर? जानें कब से लागू होंगे नए रूल
आईसीसी ने कई नियमों में बदलाव किया है और इसका असर साफ खेल पर देखने को मिलेगा
source: social media

ICC makes a new rules: हमेशा की तरह ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) इस साल भी खेल को बेहतर बनाने के लिए नियमों (ICC new cricket rule) में बदलाव किए हैं. जाहिर है जब नए नियम (ICC new rule) आए हैं, तो इनका खेल और खिलाड़ियों पर भी असर होने जा रहा है. इन नियमों की पिछले दिनों पैतृक संस्था की कार्यकारी समिति ने आईसीसी बोर्ड को सिफारिश की थी. और गुजरी 31 मई को अहमदाबाद में हुई बोर्ड की मीटिंग में इन नियमों पर मुहर लगा दी गई. और इस साल 1 अक्टूबर से ये नियम अनिवार्य रूप से प्लइंग कंडीशन (खेल संचालन के नियम) का हिस्सा बन जाएंगे. चलिए पहले ये जान लें कि क्या ये प्रमुख नियम हैं, इनका खेल और खिलाड़ियों पर इन नए नियमों का क्या असर होगा. 

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1. खराब रोशनी के लिए पिंक बॉल का ट्रायल:

टेस्ट में खराब रोशनी के कारण खेल रुकने की संभावना पर दोनों कप्तान आपसी सहमति से गुलाबी गेंद का इस्तेमाल कर सकते हैं. 

खेल पर असर: खेल का समय नुकसान होने से बचाने में मदद मिलेगी. रेड बॉल के कारण खेल रुकता है, तो  पिंक बॉल का चुनाव करने पर गेंद तुलनात्मक रूप से बेहतर दिखाई पड़ेगी. और मैदान पर चलने वाले खेल की गति बरकरार रहेगी. 

पेसरों के लिए स्विंग में  अंतर

लाल गेंद शुरुआती 10-15 ओवरों में अच्छी स्विंग होती है. समय गुजरने पर इसको रिवर्स स्विंग के लिए तैयार किया जा सकता है. वहीं, गुलाबी गेंद ज्यादा देर तक चमकती है क्योंकि जहां रेड बॉल के चमड़े को डाई किया जाता है, तो पिंक बॉल को चमकाने के लिए इस पर तरल पदार्थ की मोटी कोटिंग की जाती है, जो सिलाई पर भी रहती है. यही वजह है कि यह गेंद 20-25 ओवरों तक सीम होती है, लेकिन मोटी कोटिंग के कारण, जो चमक बरकरार रखने लिए की जाती है, इसका हिस्सा कम खुरदुरा होता है और रेड बॉल की तुलना में रिवर्स स्विंग कम मिलती है. ऐसे में जहां बल्लेबाज खराब रोशनी पर पिंक बॉल की मांग करेंगे, तो फील्डिंग करने वाली टीम इसके लिए आसानी से सहमत नहीं होगी. 

स्पिनरों के लिए चुनौती

गेंद जैसे-जैसे पुरानी होती है, तो इस इसकी सीम पर की गई तरल पदार्थ की कोटिंग हटती है, तो स्पिनर को ग्रिप में मदद मिलती है, तो घुमाव भी ज्यादा मिलता है, इसके उलट गुलाबी गेंद पर हेवी कोटिंग होने के कारण यह काफी समय हाथ से फिसलती है. चमक देर से जाती है, तो ग्रिप (पकड़) आने में भी समय लगता है और घुमाव और पिच से मदद भी तुलनात्मक रूप से कहीं देर से मिलती है.

खिलाड़ियों पर असर: पिंक बॉल खेल में आने पर बल्लेबाज, फील्डर और बॉलरों को इसे अपनी तैयारी मतलब प्रैक्टिस में लाना होगा. और इसके लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार करना होगा. लाल गेंद की सीम (सिलाई) पारंपरिक रूप से सफेद या हल्के रंग के धागे से होती है, तो गुलाबी गेंद को आसानी से दिखने के लिए इसकी सिलाई को काले या गहरे हरे रंग के धागे से सिला जाता है. 

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2. टी-20 में ब्रेक के समय में बदलाव और कोच को इजाजत

अब टी20 में दोनों टीमों के खेल के बीच ब्रेक का समय 20 मिनट का नहीं, बल्कि अनिवार्य रूप से 15 मिनट का होगा.  ब्रेक में पहले अतिरिक्त खिलाड़ी ड्रिंक्स के साथ जरूरी संदेश लेकर मैदान पहुंचा था, लेकिन अब हेड कोच या उसके द्वारा नामित कोई स्टॉफ का सदस्य यह भूमिका निभा सकता है. 

खेल पर असर: इस बदलाव के बाद खेल की गति तुलनात्मक रूप से तेज होगी, तो वहीं फुटबॉल की तरह ब्रेक के दौरान कोच के मैदान पर सलाह-मशविरे के लिए जाने के बाद बल्लेबाजों को और स्पष्टता आएगी, तो रणनीति पर असर  देखने को मिलेगा

खिलाड़ियों पर असर: इस बदलाव का सबसे बड़ा असर खिलाड़ियों पर होगा. उदाहरण के तौर पर फील्डिंग करने वाली टीम के बल्लेबाजों खासकर खासकर उदाहरण के तौर पर ओपनिंग करने  वाले संजू सैमसन को बैटिंग के लिए तैयार खासा तेजी से होना पड़ेगा. विकेटकीपर को आराम कम मिलेगा और तुरंत ही कीपिंग पैड और ग्लव्स उतारकर बैटिंग के उपकरण धारण करने होंगे. वहीं, बैटिंग करने वाली टीम के बॉलरों और फील्डरों को फिर से वॉर्म अप होने के लिए पांच मिनट का समय कम मिलेगा. यहां से खिलाड़ियों को इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तैयारी करनी होगी.  

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3. लेग-साइड वाइड  नियम को स्थाई रूप से लागू करना:

रंपरिक क्रिकेट नियमों (MCC Laws) के मुताबिक अगर गेंद बल्लेबाज के पीछे या लेग स्टंप के बाहर से निकलती है, तो अंपायर उसे तब तक वाइड नहीं देते जब तक कि वह बल्लेबाज की पहुंच से बहुत ज्यादा दूर न हो. अगर बल्लेबाज थोड़ा भी लेग साइड में मूव करता था, तो अंपायर्स को फैसला लेने में काफी छूट मिलती थी.

बदलाव: अब लेग स्टंप के बाहर जाने वाली गेंद को लेकर अंपायर के व्यक्तिगत अनुमान  को खत्म कर दिया गया है. अगर गेंद बल्लेबाज को छुए बिना लेग स्टंप की लाइन के जरा सा भी बाहर निकलती है, तो उसे तुरंत वाइड करार दिया जाएगा. फिर चाहे बल्लेबाज क्रीज में कहीं भी खड़ा हो. यह लगभग वैसा ही सख्त नियम है जैसा हम वनडे और टी20 में आमतौर पर देखते हैं, लेकिन अब इसे बिना किसी ढील के एक निश्चित लाइन के साथ लागू किया गया है. कुल मिलाकर इससे बल्लेबाजों को मनोदशा (शॉट प्लान करने, एक तय मानसिकता से खेलने) के लिहाज से फायदा होगा. और जब ऐसा होगा, तो इसका स्कोर स्कोर पर भी पड़ेगा. फिलहाल टी20 में बन रहे स्कोर से और ज्यादा टीम बनाएंगी

बॉलरों (पेसरों) पर असर: अब पेसरों के लिए गलती गलती की गुंजाइश (मार्जिन ऑफ एरर) खत्म हो गई है. अगर गेंदबाज यॉर्कर फेंकने के लिए जाते हैं या बल्लेबाज को फ्लिक शॉट खेलने के लिए मजबूर करने वाली गेंद फेंकते हैं, तो उन्हें बहुत ध्यान रखना होगा. गेंद लेग स्टंप के बाहर गई नहीं कि इससे वाइड से बैटिंग टीम को एक रन और गेंद दोनों ही मिल जाएंगे

बॉलरों (स्पिनरों) पर असर: स्पिनरों को पेसरों से भी ज्यादा सतर्क होना पड़ेगा. और इनमें भी खासकर ऑफ स्पिनरों को. स्पिनर लेग साइड में फील्डरों की तैनाती कर टप्पे को लेग स्टंप पर रखते हैं. और टप्पा लाइन के जरा सा बाहर हुआ, तो बल्लेबाज इसे छोड़ देगा और यह गेंद वाइड करार दी जाएगी. पेसरों और स्पिनरों पर पड़े इस दबाव के असर का फायदा बल्लेबाजों को होगा. मानसिक रूप से बल्लेबाज लेग साइड को लेकर रिलैक्स और पूर्वअनुमानित होंगे और बिना परेशानी के पहले से ही ऑफ या मिड्ल स्टंप पर आकर शॉट के बारे में प्लान कर सकेंगे
 

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