जब बात ICC रेटिंग के आधार पर सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज या गेंदबाज चुनने की आती है, तो इसके लिए आईसीसी ने परफॉरमेंस के आधार पर 1000 रेटिंग प्वाइंट्स को मानक बनाया हुआ है. जब जब बैटिंग की आती है, तो टेस्ट इतिहास के 149 साल में सिर्फ सर डॉन ब्रेडमैन ने ही यह रेटिंग प्वाइंट हासिल किए. पेसरों की सूची में भी यह उपलब्धि किसी गेंदबाज को नसीब नहीं हुई. वहीं, स्पिनरों की बात करें, तो इतिहास में चुनिंदा ही ऐसे बॉलर हुए हैं, जिन्होंने अपने करियर में 900 प्वाइंट्स हासिल किए. आईसीसी की शीर्ष दस गेंदबाजों में भारत के दो ही ऐसे बॉलर रहे, जो अपने करियर में सर्वश्रेष्ठ रेटिंग प्वाइंट हासिल करते हुए टेस्ट इतिहास के टॉप-10 बॉलरों में जगह बनाने में कामयाब रहे. इसमें नंबर पांच पर रविचंद्रन अश्विन के अलावा रवींद्र जडेजा रहे, जिन्होंने नौवां नंबर हासिल किया, लेकिन टेस्ट इतिहास के चौथे सबसे सफल स्पिनर हरभजन सिंह और एक और भारतीय दिग्गज हरभजन को टॉप टेन बॉलरों में जगह नहीं मिली क्योंकि ये बाकी स्पिनरों की तरह अपने करियर में इन प्वाइंट्स के आस-पास नहीं ही पहुंचे. चलिए आप जान लीजिए कि 149 साल के टेस्ट इतिहास में सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ रेटिंग के आधार पर टॉप-10 स्पिनर कौन हैं.
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1. मुथैया मुरलीधरन
920 प्वाइंट्स बनाम बांग्लादेश, 2007
आईसीसी की सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ टेस्ट रैंकिंग में सर्वोच्च रेटिंग वाले स्पिनर श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन हैं. और उनके विकेटों की संख्या बेजोड़ है. 800 विकेटों के साथ वह टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं. उन्होंने 22.72 के औसत से अपने करियर का अंत किया. उन्होंने 22 मौकों पर एक मैच में 10 विकेट भी लिए. किसी अन्य गेंदबाज ने 10 से अधिक बार ऐसा नहीं किया है. उन्होंने खेल के इतिहास में किसी भी गेंदबाज के लिए सबसे लंबे समय तक यानी 1,711 दिनों तक नंबर 1 रैंकिंग पर कब्जा बनाए रखा.
2. टोनी लॉक
912 प्वाइंट्स बनाम न्यूजीलैंड, 1958
लगातार एक्शन वाले बाएं हाथ के स्पिनर टोनी लॉक साल 1950 के दशक के इंग्लैंड के सबसे सफल धीमे गेंदबाजों में से एक थे. वह 912 की सर्वश्रेष्ठ रेटिंग तक पहुंचे. यह उन्हें स्पिनरों की आईसीसी रैंकिंग में दूसरे स्थान पर रखता है. उन्होंने 49 टेस्ट में 25.58 की औसत से 174 विकेट लिए और अक्सर जिम लेकर के साथ मिलकर इंग्लैंड की सबसे खतरनाक स्पिन जोड़ियों में से एक का निर्माण किया. उन्हें सबसे अधिक उस गेंदबाज के रूप में जाना जाता है जिन्होंने " दूसरा विकेट'जब लेकर ने 1956 में 19-90 का अपना विश्व रिकॉर्ड हासिल किया था. सिर्फ 20 साल की उम्र में उन्हें 1952 की एशेज के लिए चुना गया था. और छह साल बाद उनकी निरंतरता और नियंत्रण ने उन्हें 912 की टेस्ट रेटिंग तक पहुंचा दिया.
3. डेरेक अंडरवुड
907 बनाम न्यूजीलैंड, 1971
बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स स्पिनर ने जब भी परिस्थितियां नमीदार होती थीं, तो वह शानदार प्रदर्शन करते थे. इसने उन्हें "डेडली" (घातक) उपनाम दिलाया. डेरेक अंडरवुड ने 86 टेस्ट में 25.83 की औसत से 297 विकेट के साथ अपना करियर समाप्त किया. यह अभी भी किसी भी इंग्लैंड के स्पिनर द्वारा सबसे अधिक है. अंडरवुड ने करियर में 17 बार पांच और छह बार मैच में 10 विकेट लिए, जबकि उनका स्ट्राइक रेट 73.6 रहा. अंडरवुड साल 1971 में 907 की करियर-सर्वोच्च रेटिंग पर पहुंचे, जो आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में किसी स्पिनर द्वारा हासिल की गई तीसरी सर्वश्रेष्ठ रेटिंग है.

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4. शेन वॉर्न
905 बनाम इंग्लैंड, 1994
शेन वार्न को अपने डेब्यू से 905 की पीक रेटिंग तक पहुंचने में बमुश्किल दो साल लगे. इससे सर्वकालिक महान गेंदबाजों में से एक के रूप में उनका दबदबा पुख्ता हो गया. वॉर्न ने अपनी असाधारण टर्न को अथक सटीकता और शैली के बेजोड़ मेल के साथ लेग-स्पिन की कला को हमेशा के लिए बदल दिया. वह 145 टेस्ट में 708 विकेटों के साथ वह इतिहास में दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने रहे. इसमें 37 बार पांच विकेट और 10 बार दस विकेट शामिल हैं.
5. आर अश्विन
904 बनाम इंग्लैंड, 2016
21वीं सदी में एक दशक से अधिक समय तक भारत आने वाली टीमों के लिए सबसे कठिन स्थलों में से एक बन गया और उस दबदबे के केंद्र में रविचंद्रन अश्विन थे. तेज ऑफ-स्पिन को चतुराई भरी विविधताओं के साथ मिलाते हुए उन्होंने जल्दी ही खुद को आधुनिक युग के भारत के सबसे प्रभावशाली स्पिनर के रूप में स्थापित कर लिया. उनके 537 टेस्ट विकेटों में से 383 घरेलू मैदान पर आए और उन्होंने अक्सर अकेले दम पर मैच का पासा पलट दिया. रवींद्र जडेजा के साथ मिलकर अश्विन ने हालिया इतिहास की सबसे घातक स्पिन जोड़ियों में से एक बनाई. और इस ऑफी ने 32 बार पांच तथा आठ बार दस विकेट लेने के साथ अपने करियर का समापन किया.
6. क्लेरी ग्रिमेट
901 बनाम दक्षिण अफ्रीका, 1936
क्लेरी ग्रिमेट ने 1925 में अपने पदार्पण मैच में 11 विकेट के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. यह टेस्ट पदार्पण करने वाले खिलाड़ी के लिए आज भी तीसरा सबसे बड़ा प्रदर्शन है. वह सिर्फ 36 मैचों में 200 विकेट तक पहुंचने वाले सबसे तेज गेंदबाज बने. यह रिकॉर्ड आठ दशकों से अधिक समय तक कायम रहा. 1935/36 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 5 टेस्ट में 14.59 के औसत के साथ चटकाए 44 विकेट किसी एकल सीरीज में तीसरे सबसे ज्यादा विकेट हैं. ग्रिमेट 45 वर्ष की आयु तक उच्चतम स्तर पर खेले और दस विकेट लेने वाले दूसरे सबसे उम्रदराज गेंदबाज बने.
7. बिल जॉनस्टन
900 बनाम वेस्ट इंडीज, 1952
बिल जॉनस्टन ऑस्ट्रेलिया के सबसे बहुमुखी गेंदबाजों में से एक थे. उन्होंने किसी भी परिस्थिति में बल्लेबाजों को चकमा देने के लिए स्विंग, सीम और विविधताओं का उपयोग करते हुए गति और ऑफ-स्पिन का बेहतरीन मिश्रण किया. 40 टेस्ट मैचों में उन्होंने 23.91 की औसत से 160 विकेट लिए. उनकी अनुकूलन क्षमता ने उन्हें तेज गति के साथ गेंदबाजी की शुरुआत करने की अनुमति दी या जब पिच की मांग हुई तो वे ऑफ-स्पिन पर आ गए.जॉनस्टन का शानदार प्रदर्शन 1948 की एशेज के दौरान पूरी तरह से दिखाई दिया, जहां उन्होंने 15.33 की औसत से 27 विकेट लिए.
7. बिल ओ' रेली
900 बनाम न्यूजीलैंड, 1946
बिल ओ'रेली की लेग-स्पिन गेंदबाजी, साथ ही भयंकर टर्न और सटीकता ने बल्लेबाजों का जीवन दूभर कर दिया था. 27 टेस्ट मैचों में उन्होंने 22.59 की औसत से 144 विकेट लिए. जैक फिङ्ग्लटन ने उन्हें "अंगों, आग और स्टील के किनारों वाले गुस्से का बवंडर" बताया गया, जबकि डॉन ब्रैडमैन ने उन्हें अपने द्वारा सामना किया गया सबसे महान गेंदबाज कहा.

9. रवींद्र जडेजा
899 बनाम ऑस्ट्रेलिया, 2017
इस सूची में एकमात्र सक्रिय स्पिनर रवींद्र जडेजा का रिकॉर्ड खुद बहुत कुछ कहता है. 330 टेस्ट विकेट और 15 बार पांच विकेट लेने के साथ उन्होंने तेजी से दुनिया के कुलीन खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई है. अक्सर आर. अश्विन की छाया में रहने वाले जडेजा भारत के लंबे समय से चले आ रहे घरेलू दबदबे के एक मजबूत स्तंभ रहे हैं. उनकी पैनी बाएं हाथ की स्पिन और क्षेत्ररक्षण में असाधारण चपलता ने उन्हें एक निरंतर खतरा बना दिया है. वहीं, जबकि उनकी निचली क्रम की बल्लेबाजी ने महत्वपूर्ण गहराई जोड़ी है, जिससे भारत को टेस्ट क्रिकेट में सबसे लंबे समय तक अजेय घरेलू दौरों में से एक को बनाए रखने में मदद मिली.
10. जिम लेकर
897 बनाम ऑस्ट्रेलिया, 1956
जिम लेकर इंग्लैंड के इतिहास के सबसे कुशल ऑफ-स्पिनरों में से एक रहे हैं. उन्होंने 46 टेस्ट में 21.24 की औसत से 193 विकेट लिए. इसमें नौ बार पांच विकेट और तीन बार दस विकेट लेना शामिल है. साल 1956 में ओवल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लेकर का ऐतिहासिक 19 विकेट का प्रदर्शन इतिहास में किसी एक टेस्ट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. इसमें जिसमें 37 रन देकर 9 और 53 रन देकर 10 विकेट शामिल है.
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