हाल ही में ईशान किशन की कप्तानी में पूर्व क्षेत्र ने दक्षिण क्षेत्र को हराकर दलीप ट्रॉफी पर कब्जा किया था. करीब 14 साल बाद दलीप ट्रॉफी जीतने वाले पूर्व की ओर से कई युवा खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन किाय, लेकिन महान गावस्कर ने ईस्ट जोन के नजरिए की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि पहली पारी की बढ़त के आधार पर खिताब जीतने का सुरक्षित रवैया ही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से भारतीय टीम को टेस्ट क्रिकेट में विरोधी टीम के 20 विकेट चटकाने में संघर्ष करना पड़ता है.चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला गया दिलीप ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ. इसे पूर्व क्षेत्र ने अपनी 372 रनों की पहली पारी की बढ़त के आधार पर 14 साल बाद खिताब जीता. गावस्कर ने ईस्ट ज़ोन के फैसले पर इस वजह से सवाल उठाया क्योंकि टीम ने दूसरी पारी में साउथ ज़ोन को दोबारा आउट करने का प्रयास करने के बजाय खुद बल्लेबाजी जारी रखने को प्राथमिकता दी. ईस्ट ज़ोन ने पहली पारी में 708 रन बनाए थे. उसने पांचवें दिन अपनी दूसरी पारी घोषित करने तक कुल 760 रनों की बढ़त बना ली थी. इसके बाद दोनों कप्तानों की सहमति से मैच समाप्ति की घोषणा कर दी गई.
बहरहाल,
. अगर खेल को जल्दी ही रोकना था, तो इसे लंच के समय ही क्यों नहीं रोक दिया गया, जब यह साफ था कि बचे हुए दो सेशन में में साउथ ज़ोन 650 से अधिक रनों का लक्ष्य कभी हासिल नहीं कर पाता.' गावस्कर ने इस सुरक्षित मानसिकता को हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में हुए दूसरे टेस्ट मैच से जोड़ा, जहां भारत आखिरी दिन श्रीलंका के 20 विकेट लेने में नाकाम रहा था और मैच ड्रॉ पर छूटा था.
'इसी रवैये से भारत संघर्ष कर रहा'
सनी ने लिखा, 'यह पहली पारी की बढ़त ही काफी है' का रवैया ही उन मुख्य कारणों में से एक है जिसकी वजह से भारत अच्छी पिचों पर 20 विकेट लेने के लिए संघर्ष करता है. कोई टीम 20 विकेट लेना कैसे सीखेगी अगर वे घरेलू मैचों की दोनों पारियों में गेंदबाजी ही नहीं करेंगे? श्रीलंका में दूसरे टेस्ट के आखिरी दिन भारत हांफता रह गया और जीत के लिए अंतिम 4 विकेट भी नहीं ले सका.' उन्होंने आगे कहा कि दूसरी पारी में 10 विकेट चटकाना एक ऐसी कला है जिसे समय के साथ निखारना पड़ता है.
'यह कला सीखने में समय लगता है'
गावस्कर ने लिखा, 'जिस तरह एक बल्लेबाज के लिए 20-30 रन से अर्धशतक और 70-80 रन से शतक तक पहुँचने की कला सीखने में समय लगता है, ठीक वैसे ही दूसरी पारी में 10 विकेट लेने की समझ विकसित करने में भी समय लगता है. जाहिर तौर पर इसमें स्टैमिना का सवाल भी आता है, क्योंकि चार दिनों के तनावपूर्ण क्रिकेट के बाद न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक दबाव भी बहुत अधिक हो सकता है. और इसे सीखने का एकमात्र तरीका प्रथम श्रेणी क्रिकेट ही है. लेकिन अगर कोई टीम जिसने पहली पारी में बड़ी बढ़त बना ली है, वह मैदान पर वापस उतरने में दिलचस्पी ही नहीं दिखाती, तो खिलाड़ियों को यह अनुभव कैसे मिलेगा?"
F & Q= Frequently Asked Questions
प्र.: 1. पूर्व क्षेत्र (East Zone) ने किसकी कप्तानी में और कितने साल बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब जीता?
उ.: पूर्व क्षेत्र ने ईशान किशन की कप्तानी में 14 साल बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब जीता.
प्र.: 2. सुनील गावस्कर ने दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट ज़ोन की रणनीति की आलोचना क्यों की?
उ.: गावस्कर ने आलोचना इसलिए की क्योंकि ईस्ट ज़ोन ने पहली पारी में 372 रनों की बड़ी बढ़त बनाने के बाद भी दूसरी पारी में दक्षिण क्षेत्र को आउट करने का प्रयास नहीं किया और केवल पहली पारी की बढ़त के आधार पर खिताब जीतने का सुरक्षित रवैया अपनाया.
प्र.: 3. सुनील गावस्कर के अनुसार भारतीय टीम को टेस्ट क्रिकेट में विरोधी टीम के 20 विकेट लेने में क्यों संघर्ष करना पड़ता है?
उ.: उनके अनुसार, घरेलू क्रिकेट में "पहली पारी की बढ़त ही काफी है" वाली सुरक्षित मानसिकता के कारण गेंदबाजों को दोनों पारियों में गेंदबाजी करने और दूसरी पारी में 10 विकेट चटकाने की कला व अनुभव नहीं मिल पाता.
प्र.: 4. गावस्कर ने दलीप ट्रॉफी के इस मैच की तुलना श्रीलंका में हुए किस अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट मैच से की?
उ.: उन्होंने इसकी तुलना कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ हुए दूसरे टेस्ट मैच से की, जहाँ भारतीय टीम मैच के आखिरी दिन श्रीलंका के अंतिम 4 विकेट (कुल 20 विकेट) नहीं ले सकी थी और मैच ड्रॉ हो गया था.
प्र.: 5. दूसरी पारी में 10 विकेट लेने के अनुभव और क्षमता को विकसित करने के लिए गावस्कर ने क्या सुझाव दिया है?
उ.: गावस्कर ने कहा कि दूसरी पारी में विकेट लेने और शारीरिक व मानसिक दबाव सहने की कला केवल प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलकर ही सीखी जा सकती है, जिसके लिए बड़ी बढ़त मिलने पर भी विरोधी टीम को दोबारा आउट करने का प्रयास करना चाहिए.
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