टीम श्रेयस अय्यर ने रविवार को नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में अफगानिस्तान को आसानी से 7 विकेट से पीट दिया, लेकिन इस खेल में जीत में अक्सर खामियां भी बड़ी निकलकर आती हैं. और एक बार फिर से भारत के साथ यह दिखाई पड़ा. वह तो शुक्र यह रहा कि बल्लेबाजों खासकर अभिषेक शर्मा के सुनामी अंदाज से या कहें कि विरोधी टीम के तुलनात्मक रूप से कमजोर गेंदबाजों के होने के कारण भारत ने टारगेट करीब सात ओवर पहले ही हासिल कर लिया. लेकिन आप सोचिए कि अगर यही कोई मजबूत टीम होती, तो टीम इंडिया को पांचवें गेंदबाज की कमी कितनी भारी पड़ती या भारी पड़ सकती है.
बड़ी टीमों के खिलाफ न चुकानी पड़ जाए कीमत?
अफगानिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया को साफ-साफ पांचवें गेंदबाजी की कमी खलती दिखाई पड़ी. बुमराह, अर्शदीप, अर्शदीप और अक्षर पटेल ने अपने-अपने चार ओवर फेंके, लेकिन श्रेयस अय्यर ने पांचवें गेंदबाज का कोटा पूरा करने के लिए नितीश रेड्डी, अभिषेक शर्मा और शिवम दुबे की मदद ली. इन तीन बॉलरों ने मिलाकर चार ओवर फेंके, लेकिन तीनों ही एक भी विकेट नहीं ले सके. वहीं, नितीश रेड्डी ने 15 रन प्रति ओवर रन खर्च किए, तो अभिषेक और शिवम दुबे ने फेंके एक-एक ओवर में क्रमश: 8 और 21 रन खर्च किए. और इसने पहले से ही उठ रहे सवालों में और वजन पैदा कर दिया है.
नितीश कितने ऑलराउंडर?
अब इस सवाल में और वजन आ गया है कि क्या नितीश रेड्डी को इस तरह के प्रदर्शन के बाद ऑलराउंडर कहा जा सकता है? अगर वह बल्लेबाज पहले हैं, तो छठे नंबर पर फिर टीम इंडिया को खास तौर पर इस तरह की पिचों पर कुछ और खोजने की जरूरत है क्योंकि लगता नहीं कि आगे छठे नंबर पर नितीश की बैटिंग आएगी भी? फिर क्यों न ऐसे में कुछ दूसरे ही विकल्पों या युवा खिलाड़ियों को खिलाया जाए?
दुबे भी समझ नहीं आ रहे!
यह सही है कि शिवम दुबे ने टीम इंडिया के लिए कई मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया है और टीम में उनकी जगह भी पक्की है, लेकिन कई मौकों पर नंबर-3 पर खिलाए गए दुबे के लिए भी वही स्थिति है, जो कमोबेश रेड्डी की है. आखिर नंबर-7 पर दुबे के लिए क्या रह जाता है? और गेंदबाज कैसे हैं, यह सभी के सामने हैं. ऐसे में क्या यह सवाल पैदा नहीं होता कि हेड कोच गौतम गंभीर को घरेलू पिचों के अनुसार अलग रणनीति तैयार करनी चाहिए? फिलहाल तो यह हालात से इतर कॉमन पॉलिसी ही दिख रही है. और इससे टीम का भला तो होता नहीं दिख रहा. खासकर मुद्दे का और इन हालात में पांचवे गेंदबाज का, जो बड़ी टीमों के खिलाफ दिन विशेष पर ही नहीं, बल्कि नियमित रूप से घरेलू हालात में ही भारी पड़ सकता है.
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