
नई दिल्ली:
भारत के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने राहुल द्रविड़ पर अपनी नई किताब में यह कहकर ताजा विवाद को जन्म दे दिया है कि यदि द्रविड़ को उतना ही सहयोग मिल पाता जितना उसने बाकी कप्तानों को दिया तो वह देश का सबसे सफल कप्तान होता।
चैपल ने लिखा है कि द्रविड़ ने भारत को कई मैचों में जीत दिलाई लेकिन टीम के कुछ सदस्य उसकी कामयाबी पर खुश नहीं होते थे।
उन्होंने अपनी किताब ‘राहुल द्रविड़ : टाइमलेस स्टील’ में लिखा, टीम की कामयाबी का जश्न सभी नहीं मनाते थे। कुछ खिलाड़ियों को इससे डर लगता था और वे राहुल के खिलाफ रहते थे। उन्होंने कहा, यदि उन्होंने पूरे दिल से राहुल का उसी तरह साथ दिया होता जितना राहुल ने दूसरों का दिया है तो भारतीय क्रिकेट का ताजा इतिहास अलग होता। वह भारत का सबसे सफल कप्तान बन सकता था। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ने बताया कि कैसे द्रविड़ की अगुवाई में भारत ने लगातार नौ वनडे जीते थे। टॉस जीतकर उसने विरोधी टीम को बल्लेबाजी का न्योता दिया और बाद में बल्लेबाजी करते हुए लगातार रिकॉर्ड 17 जीत दर्ज की।
चैपल ने कहा, लक्ष्य का पीछा करते हुए बेहतर प्रदर्शन के लिए राहुल विरोधी टीम को पहले बल्लेबाजी का न्योता देता था। हालात चाहे जो हो। उसकी कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ लगातार नौ वनडे जीते। इसके अलावा लक्ष्य का पीछा करते हुए रिकॉर्ड लगातार 17 जीत दर्ज की।
चैपल ने कहा कि द्रविड़ के इसी रवैये के कारण भारत ने विदेश में भी टेस्ट जीते। चैपल ने लिखा, टेस्ट क्रिकेट में भी उसके इसी रवैये से भारत ने वेस्टइंडीज में 35 साल में पहला टेस्ट जीता। दक्षिण अफ्रीका में पहला टेस्ट जीता। केपटाउन में आखिरी टेस्ट की दूसरी पारी में भारत ने अच्छी बल्लेबाजी की होती तो श्रृंखला भी जीत जाते। चैपल ने 2006 में वेस्टइंडीज में टेस्ट श्रृंखला में भारत की जीत का जिक्र कर रहे थे। इसके बाद 2006-07 में जोहानिसबर्ग में भारत ने पहला टेस्ट जीता लेकिन अगले दो टेस्ट हार गया।
भारतीय टीम के कोच के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान चैपल के संबंध जहां द्रविड़ से मधुर रहे तो कप्तान सौरव गांगुली से उनकी नहीं पटी।
वाल्ट डिजनी कंपनी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की किताब में चैपल ने कहा, पुरुष आमतौर पर ऐसी बातें नहीं कहते हैं लेकिन मुझे राहुल द्रविड़ बहुत पसंद है। चैपल ने कहा कि द्रविड़ ने हमेशा मैदान पर अपना शत-प्रतिशत योगदान दिया और वह काफी बेहतर कप्तान था।
उन्होंने कहा, उसने हमेशा पूरे दिल से अपना योगदान दिया। बतौर कप्तान उसका जो रिकॉर्ड है, उससे वह कही बेहतर कप्तान था। चैपल ने कहा कि द्रविड़ ने कभी बतौर खिलाड़ी गलत फैसले नहीं लिए या किसी के बारे में अपशब्द नहीं कहे।
चैपल ने लिखा है कि द्रविड़ ने भारत को कई मैचों में जीत दिलाई लेकिन टीम के कुछ सदस्य उसकी कामयाबी पर खुश नहीं होते थे।
उन्होंने अपनी किताब ‘राहुल द्रविड़ : टाइमलेस स्टील’ में लिखा, टीम की कामयाबी का जश्न सभी नहीं मनाते थे। कुछ खिलाड़ियों को इससे डर लगता था और वे राहुल के खिलाफ रहते थे। उन्होंने कहा, यदि उन्होंने पूरे दिल से राहुल का उसी तरह साथ दिया होता जितना राहुल ने दूसरों का दिया है तो भारतीय क्रिकेट का ताजा इतिहास अलग होता। वह भारत का सबसे सफल कप्तान बन सकता था। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ने बताया कि कैसे द्रविड़ की अगुवाई में भारत ने लगातार नौ वनडे जीते थे। टॉस जीतकर उसने विरोधी टीम को बल्लेबाजी का न्योता दिया और बाद में बल्लेबाजी करते हुए लगातार रिकॉर्ड 17 जीत दर्ज की।
चैपल ने कहा, लक्ष्य का पीछा करते हुए बेहतर प्रदर्शन के लिए राहुल विरोधी टीम को पहले बल्लेबाजी का न्योता देता था। हालात चाहे जो हो। उसकी कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ लगातार नौ वनडे जीते। इसके अलावा लक्ष्य का पीछा करते हुए रिकॉर्ड लगातार 17 जीत दर्ज की।
चैपल ने कहा कि द्रविड़ के इसी रवैये के कारण भारत ने विदेश में भी टेस्ट जीते। चैपल ने लिखा, टेस्ट क्रिकेट में भी उसके इसी रवैये से भारत ने वेस्टइंडीज में 35 साल में पहला टेस्ट जीता। दक्षिण अफ्रीका में पहला टेस्ट जीता। केपटाउन में आखिरी टेस्ट की दूसरी पारी में भारत ने अच्छी बल्लेबाजी की होती तो श्रृंखला भी जीत जाते। चैपल ने 2006 में वेस्टइंडीज में टेस्ट श्रृंखला में भारत की जीत का जिक्र कर रहे थे। इसके बाद 2006-07 में जोहानिसबर्ग में भारत ने पहला टेस्ट जीता लेकिन अगले दो टेस्ट हार गया।
भारतीय टीम के कोच के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान चैपल के संबंध जहां द्रविड़ से मधुर रहे तो कप्तान सौरव गांगुली से उनकी नहीं पटी।
वाल्ट डिजनी कंपनी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की किताब में चैपल ने कहा, पुरुष आमतौर पर ऐसी बातें नहीं कहते हैं लेकिन मुझे राहुल द्रविड़ बहुत पसंद है। चैपल ने कहा कि द्रविड़ ने हमेशा मैदान पर अपना शत-प्रतिशत योगदान दिया और वह काफी बेहतर कप्तान था।
उन्होंने कहा, उसने हमेशा पूरे दिल से अपना योगदान दिया। बतौर कप्तान उसका जो रिकॉर्ड है, उससे वह कही बेहतर कप्तान था। चैपल ने कहा कि द्रविड़ ने कभी बतौर खिलाड़ी गलत फैसले नहीं लिए या किसी के बारे में अपशब्द नहीं कहे।
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