भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरे टी20 मैच का वेलिंगटन का हेनरी स्टेडियम मैच से पहले ही खासा चर्चा का विषय बना हुआ है. अगर मैच से पहले कोई दो बातें सबसे ज्यादा चर्चा का विषय थीं, वह वैभव सूर्यवंशी और यह मैदान ही था. यह पहले से ही साफ था कि अगर अय्यर यहां टॉस जीतते हैं, तो जोखिम लेने के बजाय पहले बॉलिंग करने का ही फैसला लेंगे. हेनरी स्टेडियम की खासियत और मैदान पर आने वाली मुश्किलों के बारे में बताएंगे. पहले आप वह जानें, जो कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतने के बाद कहा.
अय्यर का टॉस पर बयान
"हम गेंदबाजी करने जा रहे हैं. कुछ ऐसे पहलू हैं जिनमें हमें निश्चित रूप से सुधार करते रहने की आवश्यकता है. इस मैदान का आयाम (डाइमेंशंस) और परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए हम जितनी जल्दी अनुकूलन (ढल) जाएंगे, उतना ही हमारे लिए बेहतर होगा. बहुत से खिलाड़ी यह समझने के लिए काफी परिपक्व हैं कि वे कब शुरुआत नहीं कर रहे हैं."
वेलिंगटन के हेनरी स्टेडियम की खासियत
वेलिंगटन का यह मूल रूप से एक मल्टी-पर्पस (मुख्य रूप से रग्बी और क्रिकेट) स्टेडियम है और यहचारों तरफ से ऊंचे स्टैंड्स से घिरा हुआ है. यह एक कटोरे के आकार का स्टेडियम है और इसे स्थानीय लोग प्यार से द के "द केक टिन" भी कहते हैं
डाइमेंशन (आकार): अब जबकि यह एक गोल रग्बी और फुटबॉल ग्राउंड पर बना है, इसलिए इसके मैदान का आकार चौकोर और बड़ा है. यहां मैदान की लंबाई लगभग 235 मीटर और चौड़ाई लगभग 185 मीटर है और यहां सीमित ओवरों (वनडे और टी20) के मैच खेले जाते हैं, लेकिन टेस्ट मैच का आयोजन इस मैदान पर नहीं ही होता.
मैदान की मुख्य खासियत
हेनरी स्टेडियम की पिच आमतौर पर सीमित ओवरों के क्रिकेट में संतुलित मानी जाती है. शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को स्विंग मिलती है, लेकिन एक बार सेट होने के बाद बल्लेबाज यहां अच्छे रन बना सकते हैं. आंकड़ों के ्अनुसार पहली पारी में 170 से 190+ का स्कोर या उससे अधिक (लगभग 196 के आसपास का स्कोर) डिफेंड करना काफी सुरक्षित माना जाता है. अब देखने की बात होगी कि न्यूजीलैंड की टीम भारत के सामने कितने रनों का चैलेंज खड़ा कर पाती है.
खिलाड़ियों और टीमों के सामने आने वाली मुख्य मुश्किलें
वेलिंगटन को दुनिया के सबसे हवादार शहरों में गिना जाता है.हेनरी स्टेडियम का खुला हुआ ढांचा और भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि मैदान के अंदर कई बार तेज और खतरनाक हवा के झोंके चलते हैं. तेज हवाओं के कारण गेंदबाजों को अपनी लाइन और लेंथ सेट करने में भारी परेशानी होती है (खासकर जब हवा की विपरीत दिशा में गेंदबाजी करनी हो). ऐसे में फील्डर्स के लिए हवा में जाती हुई गेंद (कैच) का जजमेंट करना बहुत कठिन हो जाता है, जिससे कैच छूटने का खतरा रहता है.
इसके अलावा बल्लेबाजों को हवा की दिशा को ध्यान में रखकर अपने शॉट खेलने पड़ते हैं क्योंकि कई बार हवा के दबाव से गेंद उम्मीद से पहले ही रुक जाती है या हवा के साथ मिलकर बाउंड्री के बाहर चली जाती है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं