- पुणे में इस साल जनवरी से अक्टूबर तक दो हजार चार सौ तेरह से अधिक डेंगू के मामले दर्ज किए गए हैं
- अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में डेंगू के मामलों में 66 प्रतिशत से अधिक वृद्धि देखी गई है
- डेंगू की वजह से इस साल 8 संदिग्ध मौतें हुई हैं, जिनमें आठ साल की बच्ची की मौत भी शामिल है
पुणे में इस समय डेंगू का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है और अक्टूबर के महीने में मामलों में काफी उछाल देखा गया है. पुणे महानगरपालिका PMC के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 जनवरी से 20 अक्टूबर तक 2,413 से अधिक डेंगू मामले दर्ज किए जा चुके हैं. इनमें से 66% से अधिक मामले अकेले अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के महीनों में सामने आए हैं.इस साल शहर में डेंगू के कारण 8 संदिग्ध मौतें रिपोर्ट हुई हैं, जिनमें लोहेगांव की एक 8 साल की बच्ची की मौत भी शामिल है.
इन मामलों को डेथ ऑडिट कमेटी के पास अंतिम पुष्टि के लिए भेजा गया है. बच्ची की मौत मामले में पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक को मनपा का नोटिस दिया गया है. डेंगू मरीज की जानकारी समय पर न देने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है. बच्ची की लैब रिपोर्ट जमा करने के आदेश दिए गए हैं. रक्त के नमूने पुन: जांच के लिए एनआईवी को भेजने के निर्देश दिए गए हैं. मनपा ने मौत के मामले का संज्ञान लिया है, अस्पताल ने स्पष्ट किया है कि वे नोटिस के बिंदुओं की जांच कर विस्तृत उत्तर देंगे.
हर दिन 1,500 से 1,600 यूनिट ब्लड की जरूरत
डेंगू के साथ-साथ कैंसर और गंभीर बीमारियों के मरीजों के कारण प्लेटलेट्स की मांग बढ़ी है, जिससे ब्लड बैंकों पर दबाव है. अंग प्रत्यारोपण वाले मरीजों को भी प्लेटलेट्स की जरूरत होती है. पुणे में ब्लड और उसके कंपोनेंट्स जैसे प्लेटलेट्स की दैनिक आवश्यकता लगभग 1,500 से 1,600 यूनिट है, जबकि ब्लड बैंकों में रोजाना केवल 700 से 800 यूनिट ही इकट्ठा हो पा रही है. त्योहारों के सीजन और अन्य कारणों से स्वैच्छिक रक्तदाताओं ब्लड डोनर्स की कमी के चलते ब्लड बैंकों के पास कुछ ही दिनों का बैकअप स्टॉक बच रहा है.
प्लेटलेट्स गिरकर 20,000 से भी नीचे पहुंच रहीं
डेंगू के मरीजों में प्लेटलेट काउंट जो सामान्यतः 1.5 लाख से 4.5 लाख होता है, तेजी से गिरकर 20,000 या उससे भी नीचे पहुंच रहा है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव यानी इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है. प्लेटलेट्स को केवल पांच दिनों तक ही स्टोर किया जा सकता है, जिससे मुश्किलें आ रही हैं. पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए नियमित रक्तदान आवश्यक है. 20 अक्टूबर तक पुणे में डेंगू के 2,413 मरीज मिले हैं. डेंगू नियंत्रण के लिए मनपा द्वारा 14 लाख घरों का निरीक्षण किया गया है.
पीएमसी स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों को अलर्ट किया है कि ठीक होकर घर जाने के बाद भी मरीजों के प्लेटलेट्स पर नजर रखी जाए, क्योंकि कई मामलों में ठीक होने के बाद भी प्लेटलेट दोबारा गिरने की संभावना देखी जा रही है.पुणे महानगरपालिका कमिश्नर ने डेंगू को नियंत्रित करने के लिए सभी विभागों को एक्शन मोड पर रहने का निर्देश दिया है.
डेंगू की मुफ्त जांच, अस्पतालों में बेड्स रिजर्व
मरीजों के लिए निजी अस्पतालों में 4,409 बेड, जिसमें 670 ICU बेड शामिल हैं और मनपा अस्पतालों में 333 बेड आरक्षित किए गए हैं.मनपा के सभी दवाखानों और अस्पतालों में रैपिड डायग्नोस्टिक किट के जरिए डेंगू की मुफ्त जांच की सुविधा दी जा रही है.नगर निगम की टीमों ने अब तक लगभग 14 लाख घरों का निरीक्षण किया है.
निजी अस्पतालों को सख्त निर्देश
18,000 से अधिक कंटेनरों में मच्छरों के लार्वा पाए जाने पर 2,664 से अधिक प्रॉपर्टी मालिकों को नोटिस दिया गया है. वहीं 6.3 लाख से अधिक का जुर्माना वसूला गया है. जिन इलाकों में ज्यादा केस मिल रहे हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर धुआं छोड़ने फॉगिंग और दवा छिड़कने का काम जारी है. शहर में डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुणे नगर निगम आयुक्त नवल किशोर राम ने निजी अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए हैं. आदेश में कहा गया है कि निजी अस्पताल डेंगू के मरीजों को बिना देरी तत्काल इलाज मुहैया कराएं. साथ ही, सभी मरीजों का डेटा तय समय के भीतर इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म IHIP पोर्टल पर दर्ज करना भी अनिवार्य किया गया है.
- मई: 34 मामले सामने आए
- जून: 175 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए
- जुलाई: बारिश शुरू होने के साथ मामले बढ़े और 323 संदिग्ध मामले सामने आए
- अगस्त: संक्रमण ने रफ्तार पकड़ी और 484 संदिग्ध मामले दर्ज हुए
- सितंबर: यह महीना सबसे खतरनाक रहा, जिसमें 600 से ऊपर मामले दर्ज किए गए
- अक्टूबर (20 तारीख तक): इस महीने में भी प्रकोप जारी रहा और 500 के करीब संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं
पुणे शहर के कोथरुड, नगर रोड-वडगांव शेरी और औंध-बानेर इलाकों को डेंगू का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बताया जा रहा है, जहां हर वार्ड में 200 से अधिक मामले मिल चुके हैं.
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