
अनिल कुंबले (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
टीम इंडिया के नए कोच अनिल कुंबले को निर्विवाद रूप से देश का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज माना जा सकता है, 18 साल के इंटरनेशनल करियर में हासिल की गईं उपलब्धियां इसका उदाहरण हैं। टेस्ट और वनडे, दोनों में ही वे भारत के लिए सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे हैं।
132 टेस्ट मैचों में 29.65 के औसत से 619 विकेट उनके नाम पर हैं, इसमें पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम का एक पारी के पूरे 10 विकेट (परफेक्ट 10) का करिश्माई प्रदर्शन शामिल हैं। वनडे की बात करें तो 271 मैचों में 30.89 के औसत से 337 विकेट उनके नाम पर हैं, इसमें वेस्टइंडीज के खिलाफ 12 रन देकर छह विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।
'यह कहते हुए रोका गया कि मैं कलाई ज्यादा मोड़ता हूं '
श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन, ऑस्ट्रेलिया के शेन वार्न और भारत के अनिल कुंबले विश्व क्रिकेट के दिग्गज स्पिनरों में रहे। टेस्ट क्रिकेट में विकेट के मामले में ये पहले तीन स्थान पर काबिज हैं। लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि कुंबले ने जब क्रिकेट खेलना प्रारंभ किया था तो स्पिन के बजाय तेज गेंदबाजी करते थे। कुंबले ने खुद इस बात का खुलासा करते हुए एक बार बताया था, 'जब मैंने 13 साल की उम्र में तेज गेंदबाज के रूप में शुरुआत की तो सीनियर खिलाड़ियों ने यह कहते हुए मुझे गेंदबाजी से रोक दिया कि मैं कलाई को अधिक मोड़ता हूं।'
इसके बाद शुरू कर दी स्पिन गेंदबाजी
कुंबले के अनुसार, उस समय न तो टेलीविजन था न ही वीडियो जैसी सुविधाएं। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं इस तरीके से तेज गेंदबाजी नहीं कर सकता। ऐसे में मैंने तेज गेंदबाजी के बजाय लेग स्पिन गेंदबाजी में हाथ आजमाया। इसके बाद जो कुछ हुआ, उसकी तो दुनिया गवाह है। कामयाबी पर कामयाबी हासिल करते हुए कुंबले ने वर्ष 1990 में भारतीय टीम में स्थान बनाया और अपनी फिरकी गेंदबाजी से दुनियाभर के बल्लेबाजों के लिए 'पहेली' बने रहे...।
132 टेस्ट मैचों में 29.65 के औसत से 619 विकेट उनके नाम पर हैं, इसमें पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम का एक पारी के पूरे 10 विकेट (परफेक्ट 10) का करिश्माई प्रदर्शन शामिल हैं। वनडे की बात करें तो 271 मैचों में 30.89 के औसत से 337 विकेट उनके नाम पर हैं, इसमें वेस्टइंडीज के खिलाफ 12 रन देकर छह विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।
'यह कहते हुए रोका गया कि मैं कलाई ज्यादा मोड़ता हूं '
श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन, ऑस्ट्रेलिया के शेन वार्न और भारत के अनिल कुंबले विश्व क्रिकेट के दिग्गज स्पिनरों में रहे। टेस्ट क्रिकेट में विकेट के मामले में ये पहले तीन स्थान पर काबिज हैं। लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि कुंबले ने जब क्रिकेट खेलना प्रारंभ किया था तो स्पिन के बजाय तेज गेंदबाजी करते थे। कुंबले ने खुद इस बात का खुलासा करते हुए एक बार बताया था, 'जब मैंने 13 साल की उम्र में तेज गेंदबाज के रूप में शुरुआत की तो सीनियर खिलाड़ियों ने यह कहते हुए मुझे गेंदबाजी से रोक दिया कि मैं कलाई को अधिक मोड़ता हूं।'
इसके बाद शुरू कर दी स्पिन गेंदबाजी
कुंबले के अनुसार, उस समय न तो टेलीविजन था न ही वीडियो जैसी सुविधाएं। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं इस तरीके से तेज गेंदबाजी नहीं कर सकता। ऐसे में मैंने तेज गेंदबाजी के बजाय लेग स्पिन गेंदबाजी में हाथ आजमाया। इसके बाद जो कुछ हुआ, उसकी तो दुनिया गवाह है। कामयाबी पर कामयाबी हासिल करते हुए कुंबले ने वर्ष 1990 में भारतीय टीम में स्थान बनाया और अपनी फिरकी गेंदबाजी से दुनियाभर के बल्लेबाजों के लिए 'पहेली' बने रहे...।
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