विंडीज के खिलाफ इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले में अर्शदीप प्लेयर ऑफ द मैच बने, लेकिन युवा मीडिया पेसर प्रिंस यादव का आखिरी ओवर में कमाल अभी भी फैंस के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. ये प्रिंस यादव के आखिरी ओवर में जड़े तीन चौके ही थे, जिसकी वजह से भारत अतिरिक्त 12 रन जोड़ते हुए आखिर में मेहमान टीम को 224 रनों का टारगेट देने में सफल रहा. प्रिंस यादव ने गेंदों पर 13 रन बनाए थे. और ये 1 रन भारत की जीत में बहुत ही अहम साबित हुए. मैच के बाद बीसीसीआई टीवी पर प्रिंस यादव ने बातचीत में अभिषेक ने प्रिंस यादव को उम्दा बल्लेबाज बताते हुए उनके कौशल के के पीछे की वजह को 'सिंगल फट्टी' या बॉक्स क्रिकेट बताया, जो दिल्ली में खूब खेला जाता है.
प्रिंस ने अभिषेक के साथ मैच के बाद हुई बातचीत में कहा कि उन्होंने पहले उन्होंने आयरलैंड दौरे पर भी अभिषेक शर्मा के ही बल्ले से छक्का जड़ा था और वे भविष्य में भी मौका मिलने पर अपने इस 'लकी बैट' का इस्तेमाल करना चाहेंगे. इस पर अभिषेक शर्मा ने भी हंसते हुए सहमति जताई और दिल्ली के स्थानीय क्रिकेट में प्रिंस की 'सिंगल फट्टी' (वन-ऑन-वन मैच) शैली के दौरान विकसित हुई आक्रामक बल्लेबाजी क्षमता की सराहना की. अभिषेक ने कहा, 'मैंने इसी बैटिंग देखी है. नाम चलता है दिल्ली में इसका 'सिंगल फट्टी' में. यह वन बनाम वन मुकाबला होता है. बैटिंग भी करनी पड़ती है, बॉलिंग भी करनी पड़ती है. इसलिए इस वजह से इसमें चौके-छक्के मारने का टैलेंट है. थोड़ा सा अभी और सीखेगा. मेरा बैट होना ठीक है, लेकिन इसके साथ ताकत भी चाहिए.'
The batting talent you know 🔥 The reason you don't 😄 🎥 Prince Yadav and Abhishek Sharma reveal it in this 𝙛𝙪𝙣 𝙗𝙖𝙩 𝙨𝙩𝙤𝙧𝙮 👌 - By @ameyatilak #TeamIndia | #INDvWI | @mflone_ | @OfficialAbhi04 https://t.co/fl4WZkuKrr
— BCCI (@BCCI) October 12, 2026
सिंगल फट्टी क्रिकेट को डिटेल से जानें
दिल्ली की स्थानीय भाषा में लकड़ी के बल्ले (चाहे वह लकड़ी का तख्ता हो, हल्का टेनिस बैट हो या कटी हुई लकड़ी) को फट्टी कहा जाता है. और इसी से ही यहां सिंगल फट्टी का जन्म हुआ. इसका मतलब होता है वन-ऑन-वन सिंगल क्रिकेट का मुकाबला. इसमें 11 खिलाड़ियों की बड़ी टीमें नहीं होतीं बल्कि सिर्फ दो खिलाड़ी आपस में एक-दूसरे को चैलेंज करते हैं.
सिंगल फट्टी' के मुख्य नियम और फॉर्मेट
इस मुकाबले में आमतौर पर एक बल्लेबाज होता है और एक गेंदबाज. बाकी फील्डिंग करने के लिए मोहल्ले के बच्चों या न्यूट्रल (निष्पक्ष) दोस्तों को रख लिया जाता है, जिन्हें केवल फील्डिंग करनी होती है. ये लोग बैटिंग या बॉलिंग नहीं करते. मैच अक्सर 1 ओवर (6 गेंदें), 2 ओवर, या 12-15 गेंदों का होता है. शर्त यह होती है कि जो बल्लेबाज सबसे कम गेंदों में ज्यादा से ज्यादा रन बनाएगा या जो गेंदबाज सबसे कम रन देकर विकेट लेगा. वही विजेता बनेगा.
टेनिस बॉल और हल्का बल्ला
यह मैच हमेशा सॉफ्ट या हार्ड टेनिस बॉल (जैसे कोस्को/सीवी केके आदि) से खेला जाता है. बल्ले काफी हल्के और विशेष रूप से टेनिस बॉल से बड़े-बड़े शॉट्स खेलने के लिए तैयार किए गए होते हैं.
डायरेक्ट हिट/रन्स के लोकल रूल्स
छोटे पार्कों या तंग गलियों में खेलने के कारण सीमा रेखा बहुत करीब होती हैं. दीवार या ग्रिल पर सीधी गेंद लगने पर 4 या 6 रन माने जाते हैं, जबकि सामने के शॉट से अक्सर सामने की दिशा में छक्का मारने पर ही सबसे ज्यादा पॉइंट/रन दिए जाते हैं।
दिल्ली के लोकल क्रिकेट कल्चर में इसकी अहमियत
दिल्ली के ज्यादातर लोकल खासकर जेन जी और इससे पहले की कई पीढ़ी सिंगल फट्टी क्रिकेट खेलते हुए बड़ी हुई है. इसका एक बड़ा फायदा पेशवेर क्रिकेट में यह मिलता है कि बल्लेबाजों में रिफ्लेक्सेस और टाइमिंग में सुधार होता है. इस फॉर्मेट में गेंदबाज को हर गेंद पर विकेट निकालना होता है और बल्लेबाज को हर गेंद पर बाउंड्री मारनी होती है. इससे बल्लेबाजों का हैंड-आई कोऑर्डिनेशन भी बेहतर होता है. सहवाग ने भी बचपन में सिंगल फट्टी जमकर खेली है.
इम्पैक्ट शॉट्स पर पकड़ मजबूत
अब जबकि यह मुकाबला बहुत छोटा और हाई-इंटेंसिटी वाला होता है, तो यहां डॉट गेंद फेंकना या सिंगल लेना मायने नहीं रखता. बल्लेबाजों को पहली ही गेंद से आक्रामक (रुख अपनाना पड़ता है. ऐसे में यह फॉर्मेट बल्लेबाजों के भीतर न केवल शुरुआत में ही शॉट खेलने की झिझक खत्म कर देता है, बल्कि टेम्प्रामेंट का भी विकास होता है. खिलाड़ियों में बिल्कुल निडर होकर पहली गेंद से ही बड़े शॉट्स खेलने की आदत विकसित होती है.
बॉलरों की डेथ ओवरों की प्रैक्टिस
वहीं गेंदबाजों के लिए यह यॉर्कर और और अलग-अलग तरह की गेंद फेंकने की कला विकसित करने में यह फॉर्मेट मदद करता है. वजह यह है कि छोटी बाउंड्री और हल्के बल्ले के कारण जरा सी चूक पर छक्का पड़ जाता है. ऐसे में गेंदबाज यहां जमकर प्रयोग करते हैं. और यहां से जो उन्हें फिर कौशल या कला मिलती है, उसका बाद में पेशेवर क्रिकेट में यह कौशल खासी मदद करता है. और उसका उदाहरण हाल ही में प्रिंस यादव की बैटिंग में देखने को मिला.
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