दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय ने कहा है कि दिल्ली में प्रदूषण के बहुत सारे फैक्टर हैं जिसमें से पराली भी एक फेक्टर है. अगर सितंबर में दिल्ली में प्रदूषण कम था और अक्टूबर के महीने में अचानक बढ़ा है तो इसकी वजह क्या है? मेरा सभी एजेंसियों से निवेदन है कि वे पराली के प्रवक्ता बनने के बजाय इस बात को सामने लाएं कि अगर अचानक प्रदूषण बढ़ा क्यों है? एक भी एजेंसी यह बताने को तैयार नहीं है.
उन्होंने कहा कि सफ़र बताती है कि पराली से 1-2 प्रतिशत प्रदूषण बढ़ा है, CPCB 7-8 प्रतिशत बताती है, भूरे लाल जी की कमेटी 10 परसेंट बताती है. मसला यह नहीं है कि प्रदूषण पराली से आ रहा है या नहीं आ रहा. मसला यह है कि अगर दिल्ली में अचानक प्रदूषण बढ़ा है तो इसके लिए दिल्ली वाले जिम्मेदार नहीं हैं. इन्हीं दिल्ली वालों ने प्रदूषण 25 फ़ीसदी कम किया था.
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उन्होंने कहा कि यह बताने के लिए आपके पास मशीन है कि पराली से कितना प्रदूषण नहीं हो रहा है, लेकिन यह बताने के लिए कोई मशीन नहीं है कि यह प्रदूषण हुआ कैसे? यह कैसी मशीन है आपके पास? अगर कोई ऐसी तकनीक है तो उसको शेयर करें.केंद्र सरकार को दिल्ली सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए.
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