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जिस नक्सली से मिला था 7 किलो सोना, उस पर लगे गंभीर आरोप-'विदेशी नेटवर्क से था संबंध'

Naxal Free India: नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बीच आदिवासी नेता मनीष कुंजाम ने यह भी दावा किया कि हालिया आत्मसमर्पण सरकारी नीति का हिस्सा नहीं, बल्कि कथित समझौते का परिणाम हो सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पूर्व नक्सलियों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ “डील” के बाद सरेंडर किया.

जिस नक्सली से मिला था 7 किलो सोना, उस पर लगे गंभीर आरोप-'विदेशी नेटवर्क से था संबंध'

Naxal Free Chhattiisgarh: नक्सल प्रभावित इलाकों में हाल ही में बरामद सात किलो सोने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. आदिवासी नेता मनीष कुंजाम ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि नक्सलियों तक सोने की आपूर्ति के तार विदेशों से हो सकती है. उन्होंने दावा किया कि इस कथित नेटवर्क का संबंध स्विट्जरलैंड जैसे देशों से भी जुड़ा हो सकता है. लिहाजा, उसकी गहराई से जांच जरूरी होनी चाहिए.

कुंजाम के मुताबिक, यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है. उन्होंने मांग की कि बस्तर सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय संगठनों की फंडिंग के स्रोतों की पूरी पारदर्शिता से जांच होनी चाहिए, ताकि बाहरी आर्थिक मदद के जरिए नक्सली गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की सच्चाई सामने आ सके.

सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर उठाए सवाल

मनीष कुंजाम ने हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को लेकर भी तीखा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इन लोगों ने कभी भी जल, जंगल और जमीन की असली लड़ाई नहीं लड़ी. उनके अनुसार, अगर नक्सलियों का संघर्ष वास्तव में आदिवासी हितों के लिए होता, तो खनन परियोजनाओं और कॉर्पोरेट विस्तार के खिलाफ लगातार और मजबूत आंदोलन दिखाई देता.

 खदान विरोध से डील तक का आरोप

कुंजाम ने आरोप लगाया कि कई मामलों में नक्सली पहले खदानों के विरोध में आंदोलन खड़ा करते थे, लेकिन बाद में कथित तौर पर बड़ी “डील” होने के बाद उनका विरोध अचानक खत्म हो जाता था. इसके बाद खदान परियोजनाओं का रास्ता साफ हो जाता था और काम शुरू हो जाता था. उन्होंने इसे आदिवासी समुदाय के साथ विश्वासघात बताते हुए कहा कि इन घटनाओं से स्थानीय लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है और उनकी जमीन तथा संसाधनों को गंवाना पड़ा.

 सरेंडर के पीछे ‘डील' का दावा

नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बीच मनीष कुंजाम ने यह भी दावा किया कि हालिया आत्मसमर्पण सरकारी नीति का हिस्सा नहीं, बल्कि कथित समझौते का परिणाम हो सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पूर्व नक्सलियों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ “डील” के बाद सरेंडर किया.

 इनामी राशि से भी अलग भुगतान का आरोप

कुंजाम के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की ओर से घोषित इनामी राशि के अलावा भी अलग से बड़ी रकम दी गई है. उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त भुगतान खास तौर पर बड़े कैडर के नक्सलियों को किया गया है.

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इन सभी आरोपों के बीच मनीष कुंजाम ने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यदि इन दावों में सच्चाई है, तो इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था बल्कि आदिवासी समाज के विश्वास पर भी गंभीर असर पड़ सकता है.

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