नई दिल्ली:
राज्य में कई मानहानि के मामलों से जुड़े केस की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार ने कोर्ट में बताया है कि DMDK के खिलाफ 48 केस हैं जिसमें से 28 पार्टी प्रमुख विजयकांत के खिलाफ ही हैं. DMK के खिलाफ 85 केस और सुब्रमण्यम स्वामी के खिलाफ पांच केस हैं. कांग्रेस के खिलाफ सात केस, और मीडिया के खिलाफ 55 केस दर्ज हैं.
तमिलनाडू में मुख्यमंत्री जयललिता द्वारा राजनीतिक विरोधियों पर आपराधिक मानहानि के मामले दर्ज कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता को नसीहत दी, कहा - आप पबल्कि फिगर हैं आपको आपको आलोचना सहनी चाहिए. आपको इन मामलों में आमने-सामने की लड़ाई लड़नी चाहिए न कि सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करना चाहिए.
तमिलनाडू अकेला राज्य है जिसमें मानहानि के मामलों में बड़े पैमाने पर सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने जया को दोबारा नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. 22 सितंबर को इस मामले की अगली सुनवाई होगी. तमिलनाडू की ओर से बताया गया कि पांच साल में 213 मामले दर्ज किए गए हैं.
पिछली बार भी सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडू की मुख्यमंत्री जयललिता को फटकार लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से दो हफ्ते में उन आपराधिक मानहानि मामलों की लिस्ट मांगी थी जो राज्य सरकार ने दर्ज कराए हैं. कोर्ट ने कहा कि सरकार के भ्रष्टाचार और नाकामी को मानहानि नहीं कहा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मानहानि को इस तरह पलटवार करने का हथियार नहीं बनाया जा सकता. कोर्ट ने इस कानून को बरकरार रखने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद लॉ ऑफिसर के सहारे इस तरह कानून का इस्तेमाल करने की कोशिश हो रही है, लेकिन कोर्ट का काम कानून की रक्षा करना है.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट DMDK चीफ विजयकांत की याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें जया सरकार ने कानून अफसर के माध्यम से उन पर दर्ज कराए गए आपराधिक मानहानि के मामलों को चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों पर रोक लगा रखी है.
तमिलनाडू में मुख्यमंत्री जयललिता द्वारा राजनीतिक विरोधियों पर आपराधिक मानहानि के मामले दर्ज कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता को नसीहत दी, कहा - आप पबल्कि फिगर हैं आपको आपको आलोचना सहनी चाहिए. आपको इन मामलों में आमने-सामने की लड़ाई लड़नी चाहिए न कि सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करना चाहिए.
तमिलनाडू अकेला राज्य है जिसमें मानहानि के मामलों में बड़े पैमाने पर सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने जया को दोबारा नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. 22 सितंबर को इस मामले की अगली सुनवाई होगी. तमिलनाडू की ओर से बताया गया कि पांच साल में 213 मामले दर्ज किए गए हैं.
पिछली बार भी सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडू की मुख्यमंत्री जयललिता को फटकार लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से दो हफ्ते में उन आपराधिक मानहानि मामलों की लिस्ट मांगी थी जो राज्य सरकार ने दर्ज कराए हैं. कोर्ट ने कहा कि सरकार के भ्रष्टाचार और नाकामी को मानहानि नहीं कहा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मानहानि को इस तरह पलटवार करने का हथियार नहीं बनाया जा सकता. कोर्ट ने इस कानून को बरकरार रखने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद लॉ ऑफिसर के सहारे इस तरह कानून का इस्तेमाल करने की कोशिश हो रही है, लेकिन कोर्ट का काम कानून की रक्षा करना है.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट DMDK चीफ विजयकांत की याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें जया सरकार ने कानून अफसर के माध्यम से उन पर दर्ज कराए गए आपराधिक मानहानि के मामलों को चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों पर रोक लगा रखी है.
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