- टेस्ला ने भारत में जुलाई 2025 में दो मॉडल Y के वैरिएंट लॉन्च किए, जिनकी कीमत 70 लाख रुपये तक है
- पिछले दस महीनों में टेस्ला की कुल 460 कारें बिकीं, औसतन हर महीने 46 कारें ही बिक रही हैं
- इस साल अप्रैल से टेस्ला की बिक्री लगातार घट रही है, जून में सिर्फ 35 कारें ही बिकीं
एलन मस्क की कंपनी टेस्ला ने पिछले साल जब भारत में एंट्री की थी, तब माना जा रहा था कि उनकी कारों को खूब पसंद किया जाएगा. लेकिन यहां भी टेस्ला की कारें कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाईं. आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि एक महीने में टेस्ला की 50 कारें भी नहीं बिक रही हैं.
मस्क ने भारत में पिछले साल जुलाई में टेस्ला को लॉन्च किया था. शुरुआत में टेस्ला के दो मॉडल Y के दो वैरिएंट लॉन्च किए थे. इनकी कीमत 70 लाख रुपये तक थी.
भारत में Y मॉडल के दो वैरिएंट लॉन्च किए थे. हालांकि, इसी साल अप्रैल में टेस्ला ने 6 सीटर वाला YL वैरिएंट भी लॉन्च किया है. टेस्ला ने अपनी कारों की बिक्री पिछले साल सितंबर से शुरू कर दी थी.
टेस्ला की कितनी कारें बिक रहीं?
टेस्ला के इस समय दो मॉडल भारतीय मार्केट में हैं, जिनकी कीमत 70 लाख रुपये तक है. Y मॉडल की कीमत 57.18 लाख रुपये और दूसरा YL वैरिएंट 69.50 लाख रुपये से ज्यादा का है.
पिछले साल सितंबर से इनकी बिक्री शुरू हो गई थी. लेकिन केंद्रीय सड़क-परिवहन मंत्रालय के VAHAN डैशबोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में टेस्ला की सिर्फ 460 गाड़ियां ही बिकी हैं. यानी, हर महीने औसतन 46 गाड़ी.
आंकड़ों बताते हैं कि 10 महीने में टेस्ला की कारें सबसे ज्यादा पिछले साल सितंबर और दिसंबर में ही बिकी थीं. दोनों महीनों में टेस्ला की 69-69 कारें बिकी थीं. पिछले साल सितंबर से दिसंबर के 4 महीनों में टेस्ला की 226 कारें बिकी थीं. जबकि, इस साल के 6 महीने में 234 कारें बिकी हैं.
इस साल 4 महीनों से टेस्ला की बिक्री लगातार कम ही हो रही है. मार्च में 53 कारें बिकने के बाद अप्रैल में 43 और मई में 36 कारें बिकीं. जून में सिर्फ 35 कारें ही बिकीं.

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क्यों नहीं बिक रही टेस्ला?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट है. इसके साथ ही EV का मार्केट भी तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि, इस बढ़ते मार्केट का फायदा एलन मस्क को नहीं मिल पा रहा है.
आंकड़ों के मुताबिक, टेस्ला की तुलना में चीनी कंपनी BYD और जर्मन कंपनी BMW और मर्सिडीज बेंज की EV ज्यादा बिक रही हैं.
VAHAN डैशबोर्ड का डेटा बताता है कि इस साल चीनी कंपनी BYD ने भारत में 3,168 गाड़ियां बेची हैं. यानी, हर महीने BYD की औसतन 528 गाड़ियां बिकीं हैं. जबकि, BMW ने इस साल 6 महीनों में 2,339 और मर्सिडीज बेंज ने 400 EV बेची हैं. इस हिसाब से BMW ने हर महीने औसतन 390 और मर्सिडीज बेंज ने 66 गाड़ियां बेचीं.
लग्जरी EV सेगमेंट BMW सबसे आगे है. टेस्ला के लिए सबसे बड़ी चुनौती कीमत है. इसके उलट BMW और मर्सिडीज बेंज की गाड़ियां सस्ती हैं. इसकी एक वजह यह भी है कि BMW और मर्सिडीज अपनी कारें भारत में ही असेंबल करती हैं, जबकि टेस्ला अपनी कारें चीन से इम्पोर्ट करती है और उसे 110-110% तक इम्पोर्ट ड्यूटी देनी पड़ती है, जिससे उसकी कारें काफी महंगी हो जाती हैं.
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भारत में खराब रहा प्रदर्शन?
एलन मस्क ने जिस समय टेस्ला को भारत में लॉन्च किया था, उस वक्त दुनियाभर में कंपनी की बिक्री घट रही थी. मस्क को उम्मीद थी कि भारतीय बाजार में टेस्ला अच्छा प्रदर्शन करेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
पिछले दो सालों में टेस्ला ने जिन नए बाजारों में एंट्री की है, उनमें भारत का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है. कोलंबिया में टेस्ला नवंबर 2025 में आई थी और एक महीने में ही लगभग 1,800 कारें बिक गई थीं. मलेशिया में 2023 में टेस्ला ने एंट्री मारी थी और पिछले साल कंपनी ने हर महीने औसतन 600 कारें बेची हैं. चिली में भी कंपनी ने 2024 में एंट्री की थी और वहां 2025 में लगभग 820 गाड़ियां बेची थीं.
आमतौर पर किसी नए बाजार में एंट्री करने पर ब्रांड के क्रेज की वजह से शुरुआती मांग जबरदस्त होती है. लेकिन टेस्ला की लोकप्रियता को देखते हुए भारत में उसे ठंडा रिस्पॉन्स मिला है.
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