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फॉरेन डिस्‍क्‍लोजर स्‍कीम: विदेश में बैंक खाता या एसेट्स रखने वालों को बड़ी राहत, जानें कैसे मिलेगा फायदा

सरकार 1 जुलाई से विदेशी संपत्ति और इनकम को उजागार करने के लिए फॉरेन डिस्क्लोजर स्कीम करने जा रही है. ये योजना बड़े जुर्माने से बचने का एक मौका देती है.

फॉरेन डिस्‍क्‍लोजर स्‍कीम: विदेश में बैंक खाता या एसेट्स रखने वालों को बड़ी राहत, जानें कैसे मिलेगा फायदा
विदेशी निवेश से होने वाली इनकम के बारे में निवेशक सरकार को फॉरेन डिस्क्लोजर स्कीम के जरिए बता सकते हैं.
NDTV File Photo

1 जुलाई 2026 से देश में वॉलंटरी फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर स्कीम की शुरुआत हो रही है. ये स्कीम सरकार उन निवेशकों के लिए लाई गई है, जो अपनी आईटीआर में जरूरी इंफोर्मेशन देना भूल गए थे. जैसे विदेश में बैंक खाते और विदेशी कंपनी के शेयर खरीदने की जानकारी नहीं दे पाए थे. ऐसे में ये स्कीम आपकी पुरानी गलतियों को सुधारने का एक आखिरी मौका ले कर आई है. इस खबर में आपको बताते हैं कि बजट 2026 के दौरान ऐलान की गई ये अहम स्कीम क्या है और कैसे ये टैक्स पेयर्स के लिए मददगार साबित हो सकती है. 

क्या है फॉरेन डिस्क्लोजर स्कीम

नाम से ही पता चलता है कि ये स्कीम विदेशी मामलों से जुड़ी हुई है. ऐसे में अगर आपका विदेश से कोई संबंध नहीं है तो फिर ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है. देश के ब्लैक मनी एक्ट 20215 के अनुसार, अगर कोई भारतीय नागरिक विदेश में किसी भी तरह की संपत्ति, बैंक अकाउंट या शेयर रखता है तो उसे अपनी आईटीआर के शेड्यूल FA में इसकी जानकारी देना जरुरी होता है. कई बार देखा गया है कि छोटे निवेशक या फिर विदेश में पढ़ाई कर चुके छात्र अनजाने में इसके बारे में बताना भूल जाते हैं. इस समस्या को सीबीडीटी ने देखा और सरकार ने बजट 2026 में 6 महीने की टाइम बाउंड विंडों देने का ऐलान किया. यानी इन 6 महीने में निवेशक अपने विदेशी निवेश के बारे में सरकार को बता सकते हैं, जो अभी तक नहीं बता सकें हैं. 

कैसे मिलेगा इस स्कीम का निवेशकों को फायदा

इस योजना के जरिए तीन तरीके से निवेशकों को मदद मिल सकती है. पहला तो ये कि अभी के समय में विदेश में किए गए निवेश की जानकारी ना देने पर 10 लाख रुपये तक का बड़ा जुर्माना लगता है और 7 साल की जेल भी हो सकती है. ऐसे में इस स्कीम के जरिए निवेश के बारे में बताने से इन समस्याओं से बचा जा सकता है. 

दूसरा फायदा है कि इस योजना के जरिए 1 करोड़ रुपये तक की अनडिक्लेयर्ड फॉरेन इनकम रखने वाले टैक्सपेयर्स 30 फीसदी टैक्स के साथ एक्सट्रा 30 फीसदी टैक्स और 1 लाख रुपये की फीस देकर अपनी इस संपत्ति को लीगल करा सकते हैं.

तीसरा बड़ा फायदा आपको मानसिक टेंशन के हटने का होगा. दरअसल बहुत से लोग टैक्स नोटिस के डर के चक्कर में अपनी गलती को ठीक ही नहीं करते थे. अब 1 जुलाई से शुरू हो रही 6 महीने की ये विंडो निवेशकों के लिए बड़ा मौका लेकर आई है कि वो अपने सभी विदेशी निवेश के बारे में जानकारी दे सकें.

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