UPI MDR Charges: आजकल सब्जी खरीदने से लेकर शॉपिंग और बिल पेमेंट तक, UPI का इस्तेमाल हर जगह होता है. ऐसे में अगर UPI पेमेंट फीस का असर सामान की कीमतों पर पड़ने लगे, तो आपकी जेब पर भी बोझ बढ़ सकता है. IIT बॉम्बे की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि नए MDR फ्रेमवर्क के तहत दुकानदारों पर सीधे चार्ज लगाने की रोक के बावजूद कंपनियां अपनी लागत निकालने के लिए सामान महंगा कर सकती हैं. इससे उन ग्राहकों को भी नुकसान हो सकता है, जो 2,000 रुपये से कम का UPI पेमेंट करते हैं.
IIT बॉम्बे की रिपोर्ट के अनुसार, नए MDR फ्रेमवर्क के तहत मर्चेंट्स पर सीधा सरचार्ज बैन होने के बावजूद कंपनियां अपनी लागत निकालने के लिए सामान की कीमतें बढ़ा सकती हैं, जिससे ग्राहकों पर बोझ पड़ेगा.
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के मुताबिक, नए मर्चेंट डिस्काजउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क से पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियों को सालाना करीब 18,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं. लेकिन दुकानदार अगर इस फीस का खर्च अपनी बिक्री की कीमतों में जोड़ देते हैं, तो इसका असर आम ग्राहकों पर भी पड़ सकता है.रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा प्रस्ताव को लागू करने से पहले इसमें बदलाव करना जरूरी है. ऐसा नहीं हुआ, तो UPI पर लोगों का भरोसा कम हो सकता है.
किन UPI पेमेंट पर लगेगी फीस?
UPI MDR फ्रेमवर्क के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर 0.40% तक MDR लग सकता है. इसकी अधिकतम लिमिट 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन होगी. वहीं, दो लोगों के बीच पैसे भेजने और 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट पर कोई फीस नहीं होगी.कुछ जरूरी सेक्टर के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये की तय फीस का प्रस्ताव है. वहीं, कैपिटल मार्केट से जुड़े ट्रांजैक्शन पर 0.02% फीस होगी, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है.
हर महीने 1,500 करोड़ रुपये की कमाई का अनुमान
रिपोर्ट में अगस्त 2026 के आंकड़ों के आधार पर बताया गया है कि मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन करीब 9 लाख करोड़ रुपये के थे. इनमें लगभग 6 लाख करोड़ रुपये के पेमेंट 2,000 रुपये से ज्यादा के थे.अगर औसतन 0.25% MDR लगाया जाए, तो पेमेंट सर्विस कंपनियों को हर महीने करीब 1,500 करोड़ रुपये की कमाई हो सकती है.
क्रेडिट कार्ड का खर्च भी ग्राहकों पर पड़ने की आशंका
रिपोर्ट में क्रेडिट कार्ड से जुड़ी एक और परेशानी का जिक्र किया गया है. दुकानदार अक्सर कैश, UPI, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने वालों के लिए सामान की कीमत एक जैसी रखते हैं. ऐसे में क्रेडिट कार्ड की फीस का बोझ दूसरे तरीकों से पेमेंट करने वाले ग्राहकों पर भी पड़ सकता है.
IIT बॉम्बे ने दिए ये सुझाव
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में करंट और सेविंग अकाउंट में जमा रकम से 4.84 लाख करोड़ रुपये का नेट इंटरेस्ट मार्जिन कमाया. रिपोर्ट का सुझाव है कि UPI सिस्टम को चलाने के लिए बैंकों को इस कमाई का करीब 3%, यानी लगभग 15,000 करोड़ रुपये सालाना देना चाहिए.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब डिजिटल पेमेंट पर फीस लगाने की बात हो रही है, तब ATM से प्री कैश निकालने की सुविधा पर भी ध्यान देना चाहिए, जबकि करेंसी मैनेजमेंट पर काफी खर्च होता है.इसके अलावा, कर्ज की वसूली और लोन चुकाने वाले ट्रांजैक्शन को MDR से बाहर रखने की मांग की गई है. इससे खासकर माइक्रोफाइनेंस से कर्ज लेने वालों पर डिजिटल पेमेंट का अतिरिक्त खर्च नहीं बढ़ेगा.
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि फीस सिर्फ ऑनलाइन मर्चेंट्स और 50 करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना टर्नओवर वाले कारोबार पर लगाई जाए. प्रतिशत के हिसाब से लगने वाले MDR की अधिकतम सीमा 40 रुपये होनी चाहिए. इससे मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल UPI नेटवर्क को बढ़ाने और सुरक्षित बनाने में किया जाए.
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