देश के बड़े शहरों में महंगे घरों की मांग भले ही बनी हुई है, लेकिन इनकी बिना बिकी यूनिट्स यानी अनसोल्ड इन्वेंट्री तेजी से बढ़ रही है. नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही यानी H1 2026 के अंत तक आठ बड़े शहरों में कुल अनसोल्ड घरों की संख्या सालाना आधार पर 4% बढ़कर 5,25,695 यूनिट्स हो गई. लेकिन इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह सस्ते घर नहीं, बल्कि महंगे और प्रीमियम घर हैं.
2 से 5 करोड़ रुपये वाले घरों का स्टॉक 43% बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक, ₹2 से ₹5 करोड़ कीमत वाले घरों का अनसोल्ड स्टॉक 43% बढ़कर 65,671 यूनिट्स हो गया है. यह दिखाता है कि इस सेगमेंट में घरों की सप्लाई तेजी से बढ़ी है.
हालांकि, सिर्फ अनसोल्ड मकानों की संख्या बढ़ने से यह नहीं कहा जा सकता कि महंगे घरों की मांग खत्म हो रही है. इस सेगमेंट की बिक्री भी मजबूत बनी हुई है. H1 2026 में ₹2-5 करोड़ वाले घरों की बिक्री सालाना आधार पर 19% बढ़ी और कुल बिक्री में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी करीब 20% रही.
क्या अब महंगे घर सस्ते होंगे?
₹2-5 करोड़ या इससे ज्यादा कीमत का घर खरीदने की प्लानिंग कर रहे लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या उन्हें इन अनसोल्ड प्रीमियम मकान की खरीद पर बड़ा डिस्काउंट मिल सकता है?बता दें कि अनसोल्ड स्टॉक 43% बढ़ने के बावजूद अभी ऐसा नहीं लग रहा है कि बिल्डर्स तुरंत बड़े डिस्काउंट देंगे या कीमत घटाने के लिए मजबूर होंगे.
इसकी वजह है Quarters to Sell यानी QTS. 43% अनसोल्ड स्टॉक बढ़ने के बावजूद प्रीमियम घरों की बिक्री दर मजबूत है₹2-5 करोड़ वाले घरों के लिए QTS 4.4 क्वार्टर है. इसका मतलब मौजूदा बिक्री की रफ्तार को देखते हुए उपलब्ध स्टॉक को बेचने में करीब 4.4 क्वार्टर लग सकते हैं.QTS जितना कम होता है, आमतौर पर बाजार में घरों की बिक्री उतनी ही बेहतर मानी जाती है. इसलिए अभी के आंकड़े किसी बड़े डिस्काउंट साइकिल की तरफ इशारा नहीं करते.
सिर्फ ₹2-5 करोड़ नहीं, दूसरे महंगे घरों का स्टॉक भी बढ़ा
अनसोल्ड घरों की बढ़ती संख्या सिर्फ ₹2-5 करोड़ वाले सेगमेंट तक नहीं है. ₹1-2 करोड़ वाले घरों की इन्वेंट्री सालाना आधार पर 12% बढ़ी है.वहीं ₹5-10 करोड़ कीमत वाले घरों का अनसोल्ड स्टॉक 23% बढ़ा है. सबसे महंगे सेगमेंट यानी ₹20-50 करोड़ वाले घरों में अनसोल्ड इन्वेंट्री में 52% की तेज बढ़ोतरी हुई है.यानी कुल मिलाकर नए अनसोल्ड घरों का स्टॉक तेजी से प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट की तरफ बढ़ रहा है.
सस्ते घरों की मांग अभी भी मजबूत
महंगे घरों के मुकाबले किफायती घरों का मामला अलग है. ₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों का अनसोल्ड स्टॉक 7% घटकर 1,71,363 यूनिट्स रह गया है.इसी तरह ₹50 लाख से ₹1 करोड़ वाले घरों की इन्वेंट्री में भी 3% की गिरावट आई और यह 1,34,841 यूनिट्स रही.
इससे साफ है कि सस्ते और अफोर्डेबल घरों की मांग अभी भी बनी हुई है, जबकि अनसोल्ड स्टॉक का दबाव ज्यादा महंगे घरों में दिखाई दे रहा है.
क्या हामबायर्स को डिस्काउंट के लिए इंतजार करना चाहिए?
सिर्फ अनसोल्ड स्टॉक बढ़ने की वजह से यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब हर जगह महंगे घरों की कीमत कम हो जाएगी. फिर भी, जिन प्रोजेक्ट्स में घरों का स्टॉक ज्यादा जमा हो गया है, वहां खरीदारों के पास बिल्डर से बेहतर डील और नेगोशिएशन करने का मौका हो सकता है.
इन शहरों में मिल सकती है बेहतर डील
खासकर NCR और अहमदाबाद जैसे बाजारों में खरीदारों को बातचीत की बेहतर गुंजाइश मिल सकती है. अहमदाबाद में QTS 8.1 क्वार्टर और NCR में 7.6 क्वार्टर है. इसका मतलब इन बाजारों में उपलब्ध स्टॉक को बिकने में दूसरे कुछ बाजारों की तुलना में ज्यादा समय लग रहा है.इसके मुकाबले पुणे में QTS 4.0 क्वार्टर और चेन्नई में 4.5 क्वार्टर है, यानी इन बाजारों में बिक्री की रफ्तार अपेक्षाकृत बेहतर है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि अनसोल्ड घरों की औसत उम्र घट रही है. H1 2025 में यह 14.3 क्वार्टर थी, जो H1 2026 में घटकर 13.5 क्वार्टर रह गई.इसका मतलब पुराने पड़े घरों की बिक्री हो रही है. साथ ही खरीदार ऐसे घरों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जिनका पजेशन जल्दी मिल सके या जो पहले से तैयार हों.
तो क्या महंगे घरों पर मिलेगा बड़ा डिस्काउंट?
फिलहाल ऐसा मानना जल्दबाजी होगी कि प्रीमियम घरों की कीमतों में बड़ी गिरावट आने वाली है. ₹2-5 करोड़ वाले घरों का स्टॉक 43% बढ़ा जरूर है, लेकिन इसी सेगमेंट में बिक्री भी 19% बढ़ी है और QTS 4.4 क्वार्टर है.इसलिए पूरे बाजार में बड़े डिस्काउंट की उम्मीद कम है. हालांकि, जिस प्रोजेक्ट या शहर में अनसोल्ड स्टॉक ज्यादा है और बिक्री की रफ्तार धीमी है, वहां खरीदार कीमत, पेमेंट प्लान या दूसरे ऑफर्स पर बेहतर डील हासिल कर सकते हैं.
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