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घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर अब भी ₹700 की अंडर-रिकवरी, पेट्रोलियम मंत्रालय का खुलासा

मध्य पूर्व में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते भारत में एलपीजी आपूर्ति और आयात पर गंभीर असर पड़ा है. सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 550 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.

घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर अब भी ₹700 की अंडर-रिकवरी, पेट्रोलियम मंत्रालय का खुलासा
एलपीजी आयात पर गंभीर असर पड़ा है
  • पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर अंडर-रिकवरी लगभग सात सौ रुपये के आसपास बनी हुई है.
  • मध्य पूर्व में युद्ध के कारण एलपीजी आयात में लगभग इक्यावन प्रतिशत की भारी गिरावट मार्च महीने में दर्ज की गई.
  • भारत अपनी एलपीजी जरूरत का साठ प्रतिशत आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलमार्ग से करता था जो युद्ध से प्रभावित हुआ है.
नई दिल्ली:

पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर अंडर-रिकवरी अभी भी लगभग 700 रुपये के आसपास बनी हुई है. पिछले तीन हफ्तों के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के आयात पर सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 550 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

पिछले तीन महीनों में तेल कंपनियों ने वाणिज्यिक (कमर्शियल) एलपीजी की कीमतों में कई बार वृद्धि की है, लेकिन घरेलू एलपीजी की कीमतों में 7 मार्च 2026 के बाद से कोई बदलाव नहीं किया गया है.

युद्ध का असर एलपीजी आयात पर

दरअसल, मध्य पूर्व एशिया में युद्ध और तनाव के कारण देश में एलपीजी आयात पर गंभीर असर पड़ा है. भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी विदेशी बाजारों से आयात करता है, जिसमें से युद्ध शुरू होने से पहले बड़ी मात्रा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से आती थी. हालांकि, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण इस जलमार्ग से तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही पिछले तीन महीनों में बुरी तरह प्रभावित हुई है.

एलपीजी आयात में करीब 51 प्रतिशत की गिरावट

पेट्रोलियम मंत्रालय की पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण मार्च महीने में भारत को एलपीजी की भारी कमी का सामना करना पड़ा. एलपीजी आयात में करीब 51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. फरवरी 2026 में एलपीजी का कुल आयात 17,00,000 मीट्रिक टन था, जबकि मार्च में यह घटकर 8,26,000 मीट्रिक टन रह गया.

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को दिल्ली में बताया कि 28 फरवरी को सैन्य संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के एलपीजी आयात का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए आता था. युद्ध के प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने तेल कंपनियों के साथ मिलकर पिछले तीन महीनों में एलपीजी आयात के स्रोतों में बड़े स्तर पर विविधीकरण किया है और नए बाजारों से एलपीजी खरीदा जा रहा है. हालांकि, इससे आयात की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है.

आपूर्ति बढ़ाने पर भी तेजी से काम चल रहा है

इस बीच, गैस कंपनियों ने संकट के बावजूद एलपीजी उत्पादन को 32 मीट्रिक टन प्रति दिन से बढ़ाकर लगभग 52 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया है. साथ ही पाइपलाइन के जरिए प्राकृतिक गैस और सीएनजी की आपूर्ति बढ़ाने पर भी तेजी से काम चल रहा है. एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगातार कार्रवाई की जा रही है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि पिछले तीन दिनों में 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं.

मौजूदा परिस्थितियों में एलपीजी आपूर्ति प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है. वितरकों के स्तर पर एलपीजी की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं है. उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग में करीब 99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. लगभग 1.50 करोड़ सिलेंडरों की बुकिंग के मुकाबले करीब 1.43 करोड़ सिलेंडरों की डिलीवरी की जा चुकी है.

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