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5 महीने में 1 लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म, AI के दौर में खाली हो रहे दफ्तर?

साल 2026 के पहले पांच महीनों में ग्लोबल टेक सेक्टर में उथल-पुथल मची है. आंकड़ों के अनुसार इस पीरियड में 1 लाख से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरी जा चुकी है.

5 महीने में 1 लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म, AI के दौर में खाली हो रहे दफ्तर?
Layoff.fyi के आंकड़ों से पता चला है कि ग्लोबल टेक सेक्टर में साल 2026 के पांच महीने सबसे ज्यादा भारी रहे हैं.
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ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए साल 2026 किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है. दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के ऊपर छंटनी की तलवार लगातार लटकी हुई है. हालात कितने बिगड़े हुए हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2026 के पहले 5 महीनों में ही 1 लाख से ज्यादा टेक प्रोफेशनल्स अपनी नौकरी गवां चुके हैं. इनमें से करीब 25 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को तो आखिरी दो महीने में बाहर का रास्ता दिखाया गया है. ले-ऑफ में शामिल कंपनियों में उबर, मेटा, क्लाउडफ्लेयर के साथ इंटुइट जैसी कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं. 

मार्च 2026 में सबसे ज्यादा ले-ऑफ

Layoff.fyi के आंकड़ों के अनुसार बीते महीने यानी मई में ही 28 हजार से ज्यादा नौकरियां खत्म हो गई, ये आंकड़ा पिछले साल के इसी पीरियड के मुकाबले दो गुना से ज्यादा है. पिछले साल मई में लगभगल 10,577 लोगों की नौकरी गई थी. वहीं कुल मिलाकर अभी तक टेक सेक्टर में 1,16,739 कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है. इस साल सबसे खराब महीने मार्च का रहा, जिसमें 46 हजार से ज्यादा लोगों की नौकरियां गईं.

छंटनी में छोटी कंपनी नहीं बल्कि मेटा, सिस्को, उबर शामिल

आंकड़ों से साफ पता चल रहा है कि इस छंटनी के पीछे कोई छोटी-मोटी स्टार्टअप्स नहीं बल्कि इंडस्ट्री के बड़े नाम शामिल रहे हैं. 

  • फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने अपने ग्लोबल वर्कफोर्स से 10 फीसदी कर्मचारियों को निकालने का ऐलान किया, जबकि 7 हजार कर्मचारियों को एआई बेस्ड प्रोजेक्ट्स में शिफ्ट किया गया है.
  • डिजिटल पेमेंट की बड़ी कंपनी पेपाल ने अगले दो से 3 सालों में अपने टोटल वर्कफोर्स को 20 फीसदी कम करने का प्लान बनाया है, नतीजन करीब 5 हजार नौकरियां इससे खत्म हो जाएंगी.
  • सिस्को ने भी अपने वर्कफोर्स से करीब 5 फीसदी कर्मचारी यानी 4 हजार लोगों की छंटनी की. गौर करने वाली बात ये कि कंपनी ने ये फैसला तब लिया है जब उसने करीब 15.8 बिलियन डॉलर का अपना अभी तक का सबसे ज्यादा तिमाही का रेवेन्यू हासिल किया.
  • दूसरी तरफ उबर ने अपने पीपुल एंड प्लेसेज यानी एचआर और रिक्रूटमेंट डिवीजन से 23 फीसदी स्टाफ कम कर दिया है.
  • टर्बोटैक्स की पैरेंट कंपनी इनट्यूट ने ऑपरेशनल को मजबूत बनाने के लिए 3 हजार कर्मचारियों को निकाल दिया है.

छंटनी करने वाली कंपनियां

मेटा - 8000

पेपाल - 4760

सिस्को - 4000

इंट्यूट - 3000

क्लाउडफ्लेयर - 1100

विक्स - 1000

लिंक्डइन - 875

बिल.कॉम - 709

फ्रेशवर्क्स - 500

गिटलैब - 350

टिकटमास्टर - 350

इनोवेसर - 340

आर्कटिक वुल्फ - 250

अड्डा247 - 200

सेंटिनलवन - 230

स्टाफबेस - 176

अपवर्क - 151

क्रैकेन - 150

क्रेडिट कर्मा - 117

पॉकेटएफएम - 100

लाइटट्रिक्स - 75

नेटएप - 77

इंटरव्यू किकस्टार्ट - 50

ऊबर - अपने पीपल्स डिवीजन के 23% कर्मचारी

क्लिकअप - वर्कफोर्स का 22%

बिगआईडी - वर्कफोर्स का 20%

मैनहट्टन एसोसिएटेड - वर्कफोर्स का 6%

छंटनी के पीछे AI वजह?

इन आंकड़ों ने मार्केट में एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या एआई नौकरियों को लगातार खा रहा है? सिस्को और पेपैव जैसी कंपनियों ने इस बात पर खुलकर सहमति जताई है कि वो एआई और सेफ्टी जैसे सेक्टर्स में अपना निवेश बढ़ाने के लिए रीस्ट्रक्चरिंग पर फोकस कर रहे हैं. कंपनियां पुराने रोल्स को खत्म करके एआई एक्सपर्ट्स को तवज्जो ज्यादा दे रही हैं. हालांकि इनट्यूट का मानना कुछ और ही है. कंपनी के सीईओ सासन गूडार्जी ने बताया कि कंपनी में छंटनी की वजह एआई नहीं है, बल्कि कंपनी अपने काम को बेहतर और तेज करने के लिए बदलाव कर रही है.

वजह कुछ भी हो, लेकिन क्वोरा, कॉइनबेस, क्लाउडफ्लेयर जैसी कंपनियों में मची इस हलचल ने टेक प्रोफेशनल्स के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है. पूरी खबर से एक बात साफ है कि इस बदलाव के दौर में खुद को टिकाए रखने के लिए अब कर्मचारियों को एआई से जुड़ी स्किल्स के साथ खुद को अपग्रेड करना ही होगा. 

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