Sridhar Vembu Divorce Case: जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू और उनकी पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन के बीच चल रहा तलाक का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. पिछले कुछ दिनों से ये खबर तेजी से फैल रही है कि अमेरिकी कोर्ट ने श्रीधर वेम्बू को 1.7 बिलियन डॉलर (करीब 15,000 करोड़ रुपये) के बॉन्ड जारी करने का आदेश दिया था, जिस पर श्रीधर वेम्बू के वकील ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 1.7 अरब डॉलर का बॉन्ड आदेश अमान्य है.

क्या है 1.7 बिलियन डॉलर का पूरा सच?
वेम्बू के वकील क्रिस्टोफर सी मेलचर ने साफ किया कि, "सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में जिस 1.7 बिलियन डॉलर के बॉन्ड ऑर्डर की बात की जा रही है, वह कानूनी रूप से अमान्य है. इसका पालन नहीं किया जा सकता है और इस पर अपील की गई. रिसीवरशिप ऑर्डर पर अपील के बाद रोक लगा दी गई है. तो यह एक ऐसे ऑर्डर के बारे में पुरानी खबर है, जो कभी दिया ही नहीं जाना चाहिए था." वकील की बात से पता चलता है कि ये आदेश एक साल पुराना है, जिसे एक्सेस अभी किया गया है.
कोर्ट में श्रीधर वेम्बू के वकील ने रखा पक्ष
श्रीधर वेम्बू के वकील ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा, "श्रीधर ने अपनी पत्नी को कंपनी के 50% शेयर देने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे लेने से मना कर दिया. श्रीधर पहले ही अपने फैमिली घर का हिस्सा प्रमिला के नाम कर चुके हैं. साथ ही वो अपनी पत्नी को पैसे देने के लिए अपने शेयरों पर करीब 1,200 करोड़ रुपये ($150 मिलियन) तक का कर्ज लेने को तैयार थे, लेकिन प्रमिला ने वह पैसा भी लेने से मना कर दिया."
क्या है पूरा मामला
साल 1993 में जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने प्रमिला श्रीनिवासन से अमेरिका में शादी की थी. वेम्बू और प्रमिला, दोनों करीब 30 साल कैलिफोर्निया में रहे. साल 2019 में वेम्बू भारत आ गए. भारत लौटने के बाद उनकी पत्नी के साथ रिश्ते ठीक नहीं रहे. 2 साल बाद 2021 में वेम्बू ने तलाक की याचिका दायर की. दरअसल प्रमिला श्रीनिवासन ने आरोप लगाया कि श्रीधर वेम्बू ने उनकी जानकारी के बिना जोहो के शेयर्स को अपने परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम ट्रांसफर कर दिया. प्रमिला का कहना है कि यह उनकी वैवाहिक संपत्ति का हिस्सा था. वहीं, श्रीधर वेम्बू ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी अपने शेयर्स के साथ कोई धोखाधड़ी नहीं की और वे अपनी कंपनी के भविष्य को लेकर हमेशा पारदर्शी रहे हैं.
कैलिफोर्निया की अदालत में यह मामला अभी चल रहा है. वकील क्रिस्टोफर सी मेलचर के बयान से यह साफ हो गया है कि कोई 1.7 बिलियन डॉलर का जुर्माना या ऑर्डर फिलहाल लागू नहीं है. मामले की सुनवाई अभी जारी है और दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं.
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