कर्ज और अन्य चुनौतियों से जूझ रही एयरलाइन कंपनी SpiceJet का उसे विमान देने वाली कंपनी के साथ पैसे को लेकर विवाद हुआ. मामला NCLT यानी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के पास पहुंचा. NCLT ने सुनवाई शुरू की. मामला चलता रहा. बीच-बीच में NCLT पूछता भी रहा कि क्या सेटलमेंट हो सकता है. कंपनियां अपने-अपने पक्ष में दलील देती रहीं. केस चलता रहा. लंबी कवायद के बाद NCLT ने फैसला सुरक्षित रख लिया. और फैसला सुनाने वाले दिन कंपनियों ने बताया कि मामला सेटल हो गया है. यानी NCLT को बेकार में ही इतने दिन की कवायद करनी पड़ी. समय बर्बाद करने के चलते अब NCLT ने की एक स्पेशल बेंच ने दोनों कंपनियों पर 15-15 लाख का जुर्माना लगाया है.
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने स्पाइसजेट और एयरक्राफ्ट लीज पर देने वाली कंपनी एविएटर ML 29641 लिमिटेड पर 15-15 लाख का जुर्माना लगाया. जुर्माना इसलिए लगाया गया क्योंकि उन्होंने कोर्ट का समय बर्बाद किया, उन्होंने सेटलमेंट की जानकारी उसी दिन दी, जिस दिन ऑर्डर सुनाया जाना था.
दिवालियापन याचिकाओं पर ऑर्डर स्थगित
ट्रिब्यूनल ने कर्ज में डूबी स्पाइसजेट के खिलाफ इनसॉल्वेंसी याचिकाओं पर अपना ऑर्डर टाल दिया और रेगुलर NCLT बेंच से सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करने को कहा. ये ऑर्डर सोमवार को हुई सुनवाई के बाद आया है, जब स्पाइसजेट ने ट्रिब्यूनल को बताया कि उसने एक क्रेडिटर, एविएटर ML के साथ अपना विवाद सुलझा लिया है. एयरलाइन ने बेंच को बताया कि उसने कर्ज मान लिया है और रातों-रात हुए सेटलमेंट एग्रीमेंट के तहत 5,00,000 डॉलर का शुरुआती पेमेंट भी कर दिया है.
स्पाइसजेट ने ट्रिब्यूनल को हल्के में लिया?
ट्रिब्यूनल इस बात पर नाराज हो गया कि सेटलमेंट पहले ही क्यों नहीं हुआ. समय बर्बाद करने के बाद ही क्यों हुआ, जबकि मामला पहले ही ऑर्डर सुनाने के लिए सुरक्षित (रिजर्व) कर लिया गया था. बेंच ने कहा कि उसने बार-बार पार्टियों से पूछा था कि क्या सेटलमेंट की कोई संभावना है और सवाल किया कि इस डेवलपमेंट के बारे में पहले क्यों नहीं बताया गया.
ट्रिब्यूनल ने कहा, न्यायिक समय कीमती है और वह बर्बाद हुआ है. साथ ही, उसने एयरलाइन की आलोचना की कि उसने सेटलमेंट की जानकारी उसी दिन दी जिस दिन ऑर्डर सुनाया जाना था. बेंच ने इस तरीके को "गलत तरीका बताया और कहा कि स्पाइसजेट ने कोर्ट को हल्के में लिया है.
ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि एयरलाइन के खिलाफ इनसॉल्वेंसी मामलों की सुनवाई के लिए एक स्पेशल बेंच बनाई गई थी और ऑर्डर तैयार करने के लिए न्यायिक समय अलग रखा गया था. बेंच ने कहा कि उसके पास पहले से ही समय की कमी थी और उसने स्पाइसजेट के मामलों को देखने के लिए दूसरे काम छोड़ दिए थे.
एक क्रेडिटर से मामला सेटल, 7 का अब भी विरोध
दूसरे क्रेडिटर्स के वकीलों ने और देरी का विरोध किया. उन्होंने तर्क दिया कि एक क्रेडिटर के साथ सेटलमेंट से बाकी सात याचिकाओं पर रोक नहीं लगनी चाहिए, जिनकी सुनवाई पहले ही हो चुकी थी और जिन पर ऑर्डर सुरक्षित रखे गए थे. एक वकील ने इस कदम को 'एक खरीदो-आठ मुफ्त पाओ' जैसा बताया और तर्क दिया कि स्पाइसजेट एक क्लेम का सेटलमेंट करके पूरे बैच को टालने की कोशिश नहीं कर सकती.
एयरलाइन पर दिवालिया होने का संकट बरकरार!
स्पाइसजेट भारी वित्तीय नुकसान और कैश की कमी से जूझ रही है. वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-दिसंबर अवधि के लिए, उसने 1138.15 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया था. ये नुकसान पिछले साल की इसी अवधि में रिपोर्ट किए गए 266.8 करोड़ के नुकसान से कहीं ज्यादा है. 31 दिसंबर को खत्म हुई अवधि के लिए इसका ऑपरेशन से रेवेन्यू 3,271.5 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 14% कम है.
इसने अभी तक अपने FY26 के सालाना नतीजे और जनवरी-मार्च तिमाही (Q4) की कमाई की घोषणा नहीं की है. एयरलाइन का मार्केट शेयर, जो साल की शुरुआत में 3.9% था, उससे घटकर जून 2026 में 1.9% हो गया है.
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