जब भी केरल और नारियल की बात होती है, तो सबसे पहले कोकोनट ऑयल, कोकोनट वॉटर और कॉयर प्रोडक्ट्स का नाम आता है. लेकिन नारियल का एक हिस्सा ऐसा भी है जिसे ज्यादातर लोग कचरा समझकर फेंक देते हैं या फिर जला देते हैं वो है कोकोनट शेल .यहीं से शुरू हुई केरल की एंटरप्रेन्योर मारिया कोरियाकोस (Maria Kuriakose) की स्टार्टअप जर्नी. मारिया ने देखा कि कोकोनट ऑयल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में हजारों कोकोनट शेल्स को वेस्ट की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था. इन्हें जलाने से मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हार्मफुल गैसें निकलती हैं.लेकिन मारिया को इसी वेस्ट में एक बड़ा बिजनेस मौका दिखा.
आइए जानते हैं कि जिस कोकोनट शेल को लोग बेकार समझकर फेंक देते थे, मारिया ने कैसे उसी से प्रीमियम होम डेकोर और किचन प्रोडक्ट्स बनाकर Thenga Coco जैसा बड़ा सस्टेनेबल ब्रांड खड़ा कर दिया.
2019 में शुरू हुआ Thenga Coco
मारिया कोरियाकोस ने साल 2019 में केरल के त्रिशूर से अपने सस्टेनेबल ब्रांड Thenga Coco की शुरुआत की. वह पहले मुंबई में कॉर्पोरेट जॉब करती थीं, लेकिन उनका सपना खुद का बिजनेस शुरू करने का था. सस्टेनेबिलिटी और इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स में उनकी खास दिलचस्पी थी.जब उन्होंने कोकोनट प्रोसेसिंग यूनिट्स का दौरा किया, तो पता चला कि कोकोनट शेल्स को बड़े पैमाने पर बेकार समझा जाता है. तभी उन्होंने तय किया कि इन्हीं शेल्स से यूजफुल और स्टाइलिश प्रोडक्ट्स बनाए जाएंगे.
सिर्फ ₹5000 से शुरू किया बिजनेस
इस स्टार्टअप की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसकी शुरुआती इन्वेस्टमेंट ₹5000 से भी कम थी.मारिया ने सबसे पहले कोकोनट शेल से एक सिंपल बाउल बनाया. शुरुआती ऑर्डर्स बेंगलुरु और दिल्ली जैसे शहरों से आए.शुरुआत में शेल कटिंग और पॉलिशिंग घर पर ही होती थी. पहले ऑर्डर्स से जो रेवेन्यू आया, उसी पैसे को दोबारा बिजनेस में लगाया गया. बाद में हैंडहेल्ड टूल्स, बफिंग मशीन और लोगो प्रिंटिंग टूल्स खरीदे गए.प्रोडक्शन बढ़ाने में मारिया के पिता ने भी मदद की. उन्होंने कुछ सिंपल मशीनरी तैयार की, जिससे हैंडमेड प्रोडक्शन फास्ट हो सका.
डिमांड बढ़ाने के लिए अपनाई ये स्मार्ट स्ट्रेटजी
शुरुआत में सबसे बड़ा सवाल था कि लोग कोकोनट शेल से बने प्रोडक्ट्स खरीदेंगे क्यों? लेकिन मारिया ने मार्केट ट्रेंड को समझा. उन्होंने देखा कि बड़े शहरों और इंटरनेशनल मार्केट में एस्थेटिक और इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. लोग हैंडमेड और सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स के लिए प्रीमियम प्राइस देने को तैयार थे.यहीं से Thenga Coco ने अपनी स्ट्रेटजी बदली.
सिर्फ बाउल्स बनाने के बजाय ब्रांड ने टी कप्स, स्मूदी बाउल्स, कैंडल्स, प्लांटर्स, किचनवेयर और होम डेकोर प्रोडक्ट्स बनाना शुरू किया. इन प्रोडक्ट्स को प्रीमियम हैंडमेड लुक दिया गया, जिसने अर्बन कस्टमर्स और इंटरनेशनल बायर्स को आकर्षित किया.
आज ग्लोबल मार्केट तक पहुंच चुका है ब्रांड
आज Thenga Coco भारत के कई शहरों में अपने प्रोडक्ट्स बेच रहा है और इंटरनेशनल मार्केट्स में एक्सपोर्ट भी कर रहा है.ये ब्रांड हर महीने करीब 4000 से 5000 यूनिट्स सेल करता है.सबसे खास बात यह है कि यह स्टार्टअप गांव की महिलाओं और रूरल आर्टिजन्स को रोजगार भी दे रहा है. हर प्रोडक्ट हैंडमेड होता है और कोकोनट शेल की नेचुरल टेक्सचर और डिजाइन को हाईलाइट करता है.
प्लास्टिक का सस्टेनेबल अल्टरनेटिव
मारिया कोरियाकोस का मानना है कि कोकोनट शेल बेहद स्ट्रॉन्ग और ड्यूरेबल होते हैं. ये दशकों तक चल सकते हैं और प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का बेहतर अल्टरनेटिव बन सकते हैं.Thenga Coco का पूरा बिजनेस मॉडल रीयूज और रिपर्पज पर बेस्ड है. कोशिश यही रहती है कि प्रोडक्शन यूनिट में किसी भी चीज को वेस्ट न होने दिया जाए.
वेस्ट से बना प्रीमियम बिजनेस मॉडल
Thenga Coco की कहानी दिखाती है कि सस्टेनेबिलिटी सिर्फ सोशल कॉज नहीं, बल्कि एक प्रोफिटेबल बिजनेस मॉडल भी बन सकती है.जिस कोकोनट शेल को लोग कचरा समझते थे, आज वही लग्जरी होम डेकोर और प्रीमियम लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स में बदल चुका है.केरल की मारिया कोरियाकोस ने यह साबित कर दिया कि सही इनोवेशन, स्मार्ट ब्रांडिंग और सस्टेनेबल थिंकिंग के दम पर वेस्ट को भी ग्लोबल लग्जरी ब्रांड बनाया जा सकता है.
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