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भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न बनी Skyroot, $1.1 बिलियन वैल्यूएशन के साथ रचा इतिहास

India's First Spacetech Unicorn:बीते साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद हैदराबाद में स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) के भव्य इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन किया था. यह वही मौका था जब पूरी दुनिया ने भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-I' (Vikram-I) की पहली झलक देखी थी.

भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न बनी Skyroot, $1.1 बिलियन वैल्यूएशन के साथ रचा इतिहास
Skyroot की इस उपलब्धि को भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए बड़ा माइलस्टोन माना जा रहा है.

First Spacetech Unicorn India: भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक पल सामने आया है. हैदराबाद की स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace⁠) अब भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न बन गई है. कंपनी ने नई फंडिंग में करीब 60 मिलियन डॉलर जुटाए हैं, जिसके बाद उसकी वैल्यूएशन बढ़कर लगभग 1.1 बिलियन डॉलर पहुंच गई है.यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब कंपनी अपने सबसे अहम मिशन Vikram-1 लॉन्च की तैयारी में जुटी हुई है.

Vikram-1 लॉन्च से पहले हासिल की बड़ी फंडिंग

कंपनी के लिए यह फंडिंग बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि आने वाले कुछ हफ्तों में Vikram-1 लॉन्च होने वाला है. Skyroot के मुताबिक, यह रॉकेट श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा.अगर यह मिशन सफल रहता है, तो Vikram-1 भारत का पहला प्राइवेट तौर पर डेवलप ऑर्बिटल रॉकेट बन जाएगा, जो सैटेलाइट्स को ऑर्बिट में भेजने में सक्षम होगा.

किन निवेशकों ने लगाया पैसा?

इस फंडिंग राउंड को Sherpalo Ventures और Singapore के Sovereign Wealth Fund GIC ने को-लीड किया है. इसके अलावा BlackRock द्वारा मैनेज किए जाने वाले फंड्स, Greenko Group के फाउंडर्स, Arkam Ventures, Playbook Partners और Shanghvi Family Office समेत कई बड़े निवेशकों ने इसमें हिस्सा लिया.

टेक इन्वेस्टर राम श्रीराम Skyroot के बोर्ड में शामिल

इस फंडिंग राउंड के तहत टेक इन्वेस्टर राम श्रीराम (Ram Shriram) भी स्काईरूट के बोर्ड में शामिल होने जा रहे हैं. Sherpalo Ventures के फाउंडर राम श्रीराम ने कहा कि स्पेस तक पहुंच आज के समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. उनके मुताबिक, Skyroot भविष्य के लिए जरूरी स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है और कंपनी ने बेहद कम लागत में शानदार तकनीक विकसित की है.

नए फंड का कहां होगा इस्तेमाल ?

कंपनी ने बताया कि इस नए निवेश का इस्तेमाल लॉन्च की संख्या बढ़ाने, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत करने और अगली पीढ़ी के Vikram-2 रॉकेट के डेवलपमेंट को तेज करने में किया जाएगा.Skyroot का कहना है कि कंपनी अब भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर को ग्लोबल स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है.

CEO ने बताया भारत के स्पेस सेक्टर के लिए बड़ा माइलस्टोन

Skyroot के को-फाउंडर और CEO पवन कुमार चंदना ने कहा कि Vikram-1 लॉन्च भारत और ग्लोबल स्पेस इंडस्ट्री दोनों के लिए बड़ा माइलस्टोन साबित होगा.उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े निवेशकों का कंपनी पर भरोसा दिखाता है कि भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है.

ISRO के पूर्व वैज्ञानिकों ने शुरू की थी कंपनी

Skyroot Aerospace की शुरुआत ISRO के पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने की थी.भारत में स्पेस सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों के लिए नियम आसान होने के बाद Skyroot उन शुरुआती कंपनियों में शामिल रही, जिन्हें ISRO की सुविधाओं और तकनीकी मदद तक पहुंच मिली.

Vikram-S से चर्चा में आई थी कंपनी

साल 2022 में Skyroot ने Vikram-S नाम का सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था, जिसने सफलतापूर्वक स्पेस तक पहुंच बनाई थी. इसी लॉन्च के बाद कंपनी चर्चा में आई थी.हालांकि, Vikram-1 उससे कहीं बड़ा और एडवांस मिशन माना जा रहा है. यह रॉकेट सैटेलाइट्स को ऑर्बिट में पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है. दुनिया में अभी बहुत कम कंपनियां ही इस तरह की क्षमता हासिल कर पाई हैं.

प्राइवेट स्पेस रेस में भारत की बड़ी छलांग

बता दें कि बीते साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद हैदराबाद में स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) के भव्य इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन किया था. यह वही मौका था जब पूरी दुनिया ने भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-I' (Vikram-I) की पहली झलक देखी थी.पीएम ने इस रॉकेट से पर्दा उठाते हुए साफ कर दिया था कि अब स्पेस की रेस में भारत का प्राइवेट सेक्टर किसी से पीछे नहीं रहने वाला है.

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्काईरूट के फाउंडर्स पवन चंदना और भरत डाका की खूब सराहना की थी. उन्होंने कहा था कि ये दोनों युवा देश के करोड़ों युवाओं के लिए एक मिसाल हैं.पीएम मोदी ने कहा, "भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी साख (Credibility), क्षमता (Capacity) और वैल्यू (Value) का लोहा मनवाया है." उन्होंने स्काईरूट की इस उपलब्धि को 'न्यू इंडिया' के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक बताया था.

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