आज के जेनरेशन के युवाओं यानी Gen Z में इन्वेस्टमेंट को लेकर काफी क्रेज है. यही वजह है कि म्यूचुअल फंड और SIP में हर महीने पैसा लगाने वालों की संख्या तेजी से बढ रही है. लेकिन इसी बीच एक नई रिपोर्ट सामने आई है,जिसके अनुसार, देश के कई युवा अपना वेल्थ तो बना रहे हैं, लेकिन अपनी हेल्थ सेफ्टी को नजरअंदाज कर रहे हैं. बजाज कैपिटल इंश्योरेंस ब्रोकिंग लिमिटेड की रिपोर्ट 'Indias Health Insurance Reality Report 2026' के मुताबिक, देश के 51 फीसदी Gen Z म्यूचुअल फंड और SIP जैसे इन्वेस्टमेंट ऑप्शन के जरिये पैसा लगा रहे हैं. लेकिन इनमें से काफी लोग अपना अलग हेल्थ इंश्योरेंस नहीं खरीद रहे हैं. ज्यादातर युवा अभी भी माता पिता या कंपनी की ओर से मिलने वाले हेल्थ कवर के भरोसे हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि युवाओं को हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरत का पता है, लेकिन वे इसे 30 साल की उम्र के बाद, शादी के बाद या जीवन के किसी बड़े मौके पर खरीदने की चीज मानते हैं. इसी वजह से वे अभी इसे टाल रहे हैं.
SIP पसंद है, लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस लेने से क्यो कतरा रहे?
रिपोर्ट के मुताबिक, युवा हर महीने SIP में पैसा लगाने और बाजार के उतार-चढाव को संभालने के लिए तैयार रहते हैं. उन्हें इन्वेस्टमेंट का रिटर्न दिखाई देता है, इसलिए वे इसमें ज्यादा पैसे लगाना पसंद करते हैं.वहीं हेल्थ इंश्योरेंस में तुरंत कोई फायदा नजर नहीं आता. इसकी असली जरूरत तब महसूस होती है, जब अचानक कोई बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी आ जाती है. यही वजह है कि रिसर्च करने के बाद भी कई लोग पॉलिसी नहीं खरीदते.
सिर्फ एक मेडिकल इमरजेंसी खत्म कर सकती है पूरी सेविंग
रिपोर्ट के अनुसार, 65 फीसदी Gen Z युवा सिर्फ एक बड़ी मेडिकल इमरजेंसी से दूर हैं. अगर अस्पताल का बड़ा बिल आ जाए, तो उन्हें अपनी सेविंग निकालनी पड़ सकती है, परिवार से मदद लेनी पड़ सकती है, कर्ज लेना पड़ सकता है या फिर अपने इन्वेस्टमेंट को समय से पहले बेचना पड़ सकता है.करीब 35 फीसदी युवाओं का मानना है कि माता-पिता या कंपनी का हेल्थ कवर उनके लिए काफी है. लेकिन नौकरी बदलने या कवर खत्म होने पर मुश्किल हो सकता है.
क्या सिर्फ SIP करना सही है?
SIP और हेल्थ इंश्योरेंस एक दूसरे के ऑप्शन नहीं हैं. दोनों का काम अलग है. हेल्थ इंश्योरेंस आपको अचानक आने वाले बड़े मेडिकल खर्च से बचाता है, जबकि SIP लंबे समय में पैसा बनाने का जरिया है.अगर आप केवल SIP करते हैं और हेल्थ इंश्योरेंस नहीं लेते, तो किसी मेडिकल इमरजेंसी में आपको अपनी SIP का पैसा समय से पहले निकालना पड़ सकता है. इससे आपके लंबे समय के निवेश का प्लान भी बिगड़ सकता है.
निवेश शुरू करने से पहले क्या होना चाहिए?
जानकारों का कहना है कि निवेश शुरू करने से पहले कुछ जरूरी बातें पूरी कर लेनी चाहिए. सबसे पहले आपके पास इमरजेंसी फंड होना चाहिए. इसके बाद हेल्थ इंश्योरेंस और जरूरत के हिसाब से टर्म इंश्योरेंस लेना चाहिए. इन सब के बाद लंबे समय के लिए SIP शुरू करना बेहतर माना जाता है.इससे किसी भी मुश्किल समय में आपको अपना इन्वेस्टमेंट वाला फंड निकालना नहीं पड़ता है.
हेल्थ इंश्योरेंस से क्यों बचते हैं लोग? क्यों ये आपके लिए है सबसे जरूरी
कई लोगों का कहना है कि हेल्थ इंश्योरेंस लेने के बाद भी हर क्लेम आसानी से पास नहीं होता. कई बार डॉक्यूमेंट्स की मांग, क्लेम डिडक्शन या दूसरी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसी वजह से कुछ लोग सीधे SIP या शेयर बाजार में निवेश को बेहतर मानते हैं.हालांकि क्लेम की परेशानी अपनी जगह है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरत नहीं है. आपके लिए सही कंपनी और सही पॉलिसी चुनना उतना ही जरूरी है.
इसे एक आसान उदाहरण से समझाते हैं... अगर कोई कहता है कि हेल्थ इंश्योरेंस मत लो, सिर्फ इन्वेस्ट करो,तो ये ठीक वैसा ही है जैसे कोई कहे कि हेलमेट मत पहनो, बस सावधानी से गाड़ी SIP चलाओ. हम मानते हैं कि सावधानी जरूरी है, लेकिन सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी होती है.
आखिर सही फैसला क्या है?
अगर आपका लक्ष्य पैसा बनाना है, तो SIP अच्छी शुरुआत हो सकती है. लेकिन अगर आप अपनी सेविंग को किसी अचानक आने वाले बड़े मेडिकल खर्च से बचाना चाहते हैं, तो हेल्थ इंश्योरेंस भी उतना ही जरूरी है.यही वजह है कि कई एकस्पर्ट हमेशा कहते हैं कि SIP और हेल्थ इंश्योरेंस में किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है. दोनों साथ साथ होने चाहिए. एक आपके भविष्य की कमाई बनाता है, जबकि दूसरा मुश्किल समय में आपकी बचत और परिवार की सुरक्षा करता है.
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