Sensex Nifty50: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के चलते बिगड़े सेंटिमेंट के बीच आज सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की फ्लैट ओपनिंग हुई. तीन दिन के लॉन्ग वीकेंड के बाद हफ्ते के पहले कारोबारी दिन कमजोर संकेतों के बावजूद प्री ओपनिंग सेशन में सेंसेक्स हल्की बढ़त के साथ खुला. ईरान को ट्रंप की धमकी के बाद आशंका जताई जा रही थी कि मार्केट में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है, लेकिन जिस तरह से प्रतिक्रिया दिखी, वो यही इशारा कर रहा है कि भारतीय शेयर बाजार ने ट्रंप की धमकी वाले बयान को गंभीरता से नहीं लिया. सोशल मीडिया पर ये चर्चा भी तैरती दिखाई दी कि ईरान की तरह बाजार ने भी ट्रंप के बयान से डरना छोड़ दिया है.
शेयर मार्केट की जरा चाल देख लीजिए. प्री-ओपन में सोमवार करीब 9:05 बजे इसमें 185 अंकों का उछाल दिखा. वहीं निफ्टी 50 में भी हल्का उछाल देखा गया. ये 0.30 फीसदी या 67.20 अंकों के उछाल के साथ 22,780 के लेवल पर कारोबार करता दिखा.
इससे पहले बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे थे. सुबह करीब 8:30 बजे गिफ्ट निफ्टी 22,623 के स्तर पर कारोबार करता दिखा था. इसमें करीब 82 अंकों (-0.36%) की गिरावट देखी गई थी. मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक संकेत नकारात्मक बने हुए थे. लेकिन बाजार ने कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं दी.

कई सेक्टर्स हरे निशान पर?
इससे पहले, निफ्टी 22,780 पर खुला था, जिसमें 67 अंक या 0.30 प्रतिशत की बढ़त हुई थी, जबकि सेंसेक्स 158 अंक या 0.22 प्रतिशत बढ़कर 73,477.53 पर पहुंच गया था. शुरुआती कारोबार में सेक्टोरल इंडेक्स ज़्यादातर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, जिसमें बैंकिंग और ऑटो शेयरों की अगुवाई रही. निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में 0.51 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.30 प्रतिशत ऊपर चढ़ा. निफ्टी ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज और IT इंडेक्स भी हरे निशान में थे.
व्यापक बाजारों में, निफ्टी 100, निफ्टी 200 और निफ्टी 500 इंडेक्स में 0.31 प्रतिशत तक की बढ़त हुई. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी मामूली बढ़त के साथ ऊपर कारोबार कर रहे थे. दूसरी ओर, निफ्टी मेटल इंडेक्स में 0.22 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि फार्मा और रियल्टी इंडेक्स मामूली रूप से लाल निशान में थे. इस बीच, बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) बढ़ा रहा. India VIX 2 प्रतिशत से ज्यादा ऊपर चढ़ा, जो अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों में बनी हुई सावधानी का संकेत है.

जानकारों ने क्यों सावधान किया?
विश्लेषकों का कहना है कि ईरान-इज़रायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते बाज़ार सतर्क बने हुए हैं, और अब तक संघर्ष विराम की बातचीत में कोई सफलता नहीं मिली है. हालांकि US बाजार पिछले हफ़्ते मज़बूत रोज़गार डेटा के चलते बढ़त के साथ बंद हुए, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण बाजार का मूड अभी भी नाज़ुक बना हुआ है.
उन्होंने आगे कहा कि इस हफ़्ते RBI की MPC बैठक एक अहम ट्रिगर साबित होगी, जबकि तनाव कम होने के किसी भी संकेत से बाज़ार में सुधार को सहारा मिल सकता है. घरेलू मोर्चे पर, कमर्शियल वाहनों की बिक्री में दिख रहे बेहतर रुझान आर्थिक गतिविधियों और कमाई में सुधार के शुरुआती संकेत दे रहे हैं.
भू-राजनीतिक तनाव के बीच बाजार का मूड नाज़ुक बना हुआ है और निवेशक होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास हो रहे घटनाक्रमों पर पैनी नज़र रखे हुए हैं; यह दुनिया भर में तेल की सप्लाई का एक अहम रास्ता है.
इससे पहले गुरुवार को, जो कि ट्रेडिंग का आखिरी सत्र था, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अपनी बिकवाली का सिलसिला जारी रखा और 9,931 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले. इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को सहारा दिया और 7,200 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे.
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