बीते हफ्ते भारतीय शेयर मार्केट में आईटी सेक्टर पर प्रेशर साफ दिखाई दिया. ग्लोबल आईटी कंपनी एक्सेंचर के कमजोर ग्रोथ के आंकड़ों ने सारा खेल ही बिगाड़ दिया था. हालांकि 22 मार्च यानी हफ्ते के पहले कारोबारी दिन में आईटी सेक्टर में तेजी देखने को मिली. निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 200 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ.
अब ऐसे में एक सवाल निवेशकों को दिमाग में आ रहा है कि क्या वाकई में आईटी सेक्टर ने तेजी पकड़ ली है या फिर बाजी एक बार फिर पलट सकती है? इन सभी सवालों के जवाब हमने पीएचडी कैपिटल से जानने की कोशिश की.
एक्सेंचर कैसे बनी थी भारतीय मार्केट के लिए विलेन?
एक्सेंचर ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान को 3 फीसदी से कम करके 4 फीसदी कर दिया था. एक्सेंचर ने कहा कि एआई में बढ़ती रुचि के बाद भी कंपनियां अपने आईटी बजट को नहीं बढ़ा रही हैं. अब इस खबर के सामने आते ही बीते हफ्ते निफ्टी आईटी करीब 6.5% तक टूट गया. नतीजन इंफोसिस का शेयर 7% गिरकर अपने 52 हफ्ते के निचले लेवल पर आ गया. साथ ही टीसीएस भी 6 महीने के लो लेवल पर पहुंच गया.
आईटी सेक्टर में आई तेजी असल में क्या?
पीएचडी कैपिटल ने बताया कि इस साल आईटी शेयर्स करीब 29% तक टूट चुके हैं. इस समय ये मार्केट के सबसे कमजोर सेक्टर साबित हो रहे हैं. इसके पीछे की वजह एक नहीं बल्कि कई हैं. विदेशी क्लाइंट्स नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च नहीं कर रहे. साथ ही एआई तकनीक आने से कंपनियों के रेवेन्यू पर असर पड़ा है. इसके अलावा अमेरिका-ईरान की जंग की वजह से नई डील नहीं आ पा रही हैं. ऐसे में अगर आईटी शेयरों में हल्की रिकवरी आ भी रही है तो इसे ओवर सोल्ड बाउंस के तौर पर देखा जा सकता है.
निवेशक अब क्या प्लानिंग अपनाएं?
आगे की प्लानिंग को लेकर पीएचडी कैपिटल ने कहा कि इस हफ्ते में सिर्फ 4 ट्रेडिंग सेशन हैं. मुहर्रम की वजह से शुक्रवार को मार्केट बंद रहेगा. ऐसे में जब तक कोई मजबूत बेस ना बन जाएं, तब तक नए शेयर्स खरीदने से बचना चाहिए. हालांकि लार्ज कैप में इंफोसिस और टेक महिंद्रा के साथ मिड कैप में कोफोर्ज, परसिस्टेंट और एमफैसिस को अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं.
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