Share Market Crash Reasons Explained: अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते से शेयर बाजार में आई 5 दिनों की तेजी पर शुक्रवार को ब्रेक लग गया. 5 ट्रेडिंग सेशन की बढ़त ने बेंचमार्क इंडेक्स को करीब 5 फीसदी तक की ऊंचाई दी थी, उसके बाद लंबे समय से शांत पड़े निवेशकों ने मुनाफावसूली का बटन दबा दिया. नतीजा- सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी 24,000 के काफी नीचे आ गया. करीब हफ्ते भर की कमाई, कुछ घंटों में साफ! BSE लिस्टेड कंपनियों की वैल्युएशन महज 2 घंटे में 4,77,60,908 करोड़ से घटकर 4,76,38,963 करोड़ रुपये पर आ गई. यानी निवेशकों को 1.3 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान. मार्केट में आज की गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण Accenture के निराशाजनक अनुमानों को बताया जा रहा है. लेकिन क्या केवल यही एक वजह है. मार्केट एक्सपर्ट्स इसके पीछे और भी वजहें गिना रहे हैं.
एक्सेंचर के अनुमानों से डूबा आईटी सेक्टर
शुक्रवार को सबसे बड़ा झटका आईटी सेक्टर को लगा. निफ्टी आईटी इंडेक्स इंट्राडे में करीब 6% तक टूट गया. इंफोसिस, TCS, टेक महिंद्रा, HCL टेक और एम्फैसिस जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर 5 से 8% तक गिर गए. अमेरिकी बाजार में एक्सेंचर के शेयरों में 19% तक की गिरावट देखी गई, कारण कि इसने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान को 3-5% से घटाकर 3-4% कर दिया था. इसने भारतीय आईटी कंपनियों को भी इस चिंता में डाल दिया कि IT सविसेज लेने वालीं ग्लोबल कंपनियां अब भी तकनीकी खर्चों में देरी कर रही हैं.
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FIIs की दोबारा बिकवाली
बाजार के सेंटिमेंट पर विदेशी निवेशकों की बेरुखी का भी असर पड़ा. लगातार तीन दिनों तक खरीदारी करने के बाद, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने गुरुवार को 1,025 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले. इस साल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे हैं. वे उन वैश्विक बाजारों को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां वैल्युएशन ज्यादा आकर्षक है. भारतीय बाजार की मजबूत कड़ी माने जाने वाले घरेलू निवेशकों (DIIs) ने बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने डर बढ़ा दिया.
3. मुनाफावसूली: ये तो... होना ही था
पिछले 5 ट्रेडिंग सेशन में सेंसेक्स करीब 5% और निफ्टी 4% से ज्यादा चढ़ चुका था. ये तेजी मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद आई थी, जिससे मिडिल ईस्ट का तनाव कम हुआ था. लेकिन तय है कि बाजार कभी भी एक सीधी रेखा में ऊपर नहीं जाता.चूंकि बहुत कम समय में शेयर काफी महंगे हो गए थे, इसलिए ट्रेडर्स ने शुक्रवार को मुनाफा वसूली करना (प्रॉफिट बुकिंग) सही समझा, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ गया.
ग्लोबल मार्केट से नहीं मिला सहारा
इंटरनेशनल मार्केट्स से मिले कमजोर संकेतों ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया. एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखी गई, जहां दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग करीब 2-2% तक टूट गए. हालांकि अमेरिकी बाजार भले ही पिछले सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे, लेकिन फ्यूचर्स के कमजोर संकेतों ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया, जिसका असर भारतीय बाजार पर देखा गया.
मिडिल ईस्ट का खतरा पूरी तरह टला नहीं
भले ही अमेरिका-ईरान समझौते ने युद्ध के तात्कालिक खतरे को कम कर दिया है, लेकिन जियो-पॉलिटिकल रिस्क अभी खत्म नहीं हुआ है. अमेरिका तो मान गया, इजरायल कहां मानने वाला है. उसने अपनी मंशा जाहिर कर दी हे; दक्षिणी लेबनान में नए इजरायली हमलों की खबरों और संघर्ष विराम की अनिश्चितता ने निवेशकों को फिर से डरा दिया है. इसके अलावा, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयानों और राजनयिक वार्ताओं के टलने से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है. भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए सबसे बड़ा डर यह है कि अगर वहां दोबारा तनाव बढ़ा, तो कच्चे तेल (Brent Crude) के दाम फिर बढ़ सकते हैं, जिससे देश में महंगाई का खतरा बढ़ सकता है.
मार्केट में फिर लौटी घबराहट
बाजार में बढ़े इस डर का अंदाजा 'इंडिया विक्स' (India VIX) से लगाया जा सकता है, जो कि करीब 5% उछलकर 13.3 के स्तर पर पहुंच गया. NSE पर करीब 1,500 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार की कमजोरी को साफ दर्शाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि एक्सेंचर की रिपोर्ट ने तो सिर्फ चिंगारी का काम किया, लेकिन असल गिरावट... महंगे वैल्युएशन, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता के मिले-जुले असर के चलते आई है.
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