Share Market News Today: अमेरिका ईरान युद्ध टलने के साथ ही कच्चे तेल में गिरावट का दौर जारी. इसका सीधा असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है. भारतीय शेयर बाजार के 50 अंकों के सूचकांक वाला एनएसई निफ्टी 50 और बीएसई का सूचकांक सेंसेक्स मंगलवार को भी तेजी के साथ खुला. भारतीय शेयर बाजार के 50 अंकों के सूचकांक वाला एनएसई निफ्टी 50 और बीएसई का सूचकांक सेंसेक्स मंगलवार को भी तेजी के साथ खुला. निफ्टी तेजी के साथ 23971 .25पर खुला. वहीं, सेंसेक्स भी तेजी के साथ 76738 पर खुला.
इससे पहले सोमवार को भी भारतीय शेयर बाजारों के सूचकांक यानी निफ्टी और सेंसेक्स में तेजी देखने को मिली थी. सेंसेक्स जहां 776.01 अंक यानी 1.02% की बढ़त के बाद 76,835.78 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 भी 228.50 अंक यानी 0.96% की बढ़त के बाद 23,995.95 पर बंद हुआ था.
मजबूत रुपया और गिरते क्रूड ऑयल से मिला स्पोर्ट
वैश्विक बाजार से मिले जुले संकेतों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की घटती कीमतों और रिजर्व बैंक (RBI) के सपोर्ट से भारतीय रुपये में जोरदार मजबूती दर्ज की गई है. रुपया डॉलर के मुकाबले 15 पैसे बढ़कर ₹95.76 के स्तर पर खुला है, जिससे घरेलू शेयर बाजार को भी पंख लग गए हैं. भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को फिर से तेजी का माहौल देखने को मिल रहा है. दरअसल, विदेशी और घरेलू मोर्चे से मिले सकारात्मक संकेतों ने बाजार के सेंटिमेंट को काफी मजबूत किया है. इस तेजी के पीछे दो सबसे मुख्य कारण रहे हैं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई मजबूत उछाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की गिरती कीमतें.
आरबीआई के सपोर्ट से मजबूत हुआ रुपया
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा स्पॉट मार्केट में संभावित डॉलर बिकवाली और बाजार हस्तक्षेप के चलते रुपये ने शानदार बढ़त बनाई है. 28 जुलाई को भारतीय रुपया पिछले सत्र के ₹95.91 प्रति डॉलर के मुकाबले 15 पैसे मजबूत होकर ₹95.76 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला. इससे पिछले सत्र यानी सोमवार में भी रुपये ने लगभग 70 पैसे की जोरदार बढ़त दर्ज की थी, जो पिछले छह हफ्तों का इसका सबसे बेहतरीन प्रदर्शन था. दरअसल, रुपये में भारी गिरावट रोकने के लिए रिजर्व बैंक लगातार बाजार में डॉलर बेचकर अपनी करेंसी को सहारा दे रहा है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर दिख रहा है.
क्रूड ऑयल की कीमतों में आई नरमी
रुपये की मजबूती के साथ साथ कच्चे तेल के दामों में गिरावट ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार को बड़ी राहत दी है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू राजनीतिक तनाव में कमी आने के संकेतों के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली. अंतरराष्ट्रीय बाजार में WTI क्रूड ऑयल वायदा सितंबर 26 का भाव 1.10% (0.91 USD) की गिरावट के साथ 81.70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है. कारोबार के दौरान इसने 81.43 डॉलर का निचला और 82.22 डॉलर का ऊपरी स्तर छुआ.
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भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल सस्ता होने से भारत का आयात बिल घटता है और चालू खाते का घाटा (CAD) कम होता है. वहीं, दूसरी ओर जब रुपया मजबूत होता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजारों में अपना निवेश बढ़ाना शुरू कर देते हैं. गिरते क्रूड ऑयल और मजबूत रुपये के इस 'डबल बूस्टर' के कारण ही घरेलू शेयर बाजार को नई दिशा और रफ्तार मिली है.
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